Thursday, February 3, 2011

तिब्बतियों ने खरीदी अवैध तरीके से जमीनें


हिमाचल में तिब्बतियों द्वारा जमीनें खरीदे जाने की बात उजागर होने के बाद उत्तराखंड में भी इस तरह के मामले सामने आए हैं। नैनीताल नगर पालिका क्षेत्र में कई तिब्बती शरणार्थियों ने अपने नाम से जमीनें खरीदी हैं और उनकी रजिस्ट्री भी कराई है। कई शरणार्थियों ने उनमें आलीशान मकान भी बना डाले हैं। कई तिब्बती शरणार्थियों के पास जिला पूर्ति कार्यालय से जारी स्थायी राशन कार्ड होने की गोपनीय शिकायत मिलने के बाद जिला पूर्ति अधिकारी ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। एक आवेदक द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत नगर पालिका क्षेत्र में तिब्बती नागरिकों के नाम जमीन की सूचना मांगे जाने के बाद नगर पालिका प्रशासन जमीन की दस्तावेजों की पड़ताल में जुट गया है। खुफिया एजेंसियों द्वारा वर्ष 2004 में की गई जांच में नगर पालिका क्षेत्र में 7 तिब्बती लोगों के नाम जमीन होने के प्रमाण मिले थे। अब तक इनकी संख्या और बढ़ने के प्रबल आसार हैं। नगर पालिका क्षेत्र में तिब्बती समुदाय की कुल पंजीकृत आबादी 306 है। इनमें 158 ऐसे तिब्बती हैं, जिनकी आयु 18 वर्ष अथवा इससे अधिक हो चुकी है। नैनीताल में अधिकांश तिब्बती शरणार्थी 1965 से रह रहे हैं। मल्लीताल में फ्लैट मैदान के समीप स्थित तिब्बती मार्केट यहां का मशहूर मार्केट है। अधिशासी अधिकारी नीरज जोशी के अनुसार जमीनों के दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी गई है। जिला पूर्ति कार्यालय को भी एक गोपनीय शिकायत भेजी गई है, जिसमें तिब्बती लोगों के नाम स्थायी राशन कार्ड होने की जानकारी दी गई है। जिला पूर्ति अधिकारी राहुल शर्मा ने शिकायती पत्र की जांच पूर्ति निरीक्षक गीता आर्य को सौंप दी है। शरणार्थियों को अल्पकालीन अस्थायी राशन कार्ड जारी किए जाते हैं। जिलाधिकारी शैलेश बगौली ने नागरिकता संबंधी कानूनों का हवाला देते हुए बताया वर्ष 1945 से पूर्व से रहने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने तथा जिसका जन्म यहां हुआ है उसे हर सुविधा प्राप्त करने का अधिकार है। उन्होंने कहा, यदि किसी मामले में नागरिकता कानून का उल्लंघन हुआ है तो इसकी गहराई से जांच की जाएगी।


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