ट्यूनीशिया-मिस्र में रक्तहीन क्रांति के बाद अन्य अरब देशों के तानाशाहों के लिए खतरे की घंटी बज गई है। यमन और अल्जीरिया में तो जनता सड़कों पर उतर चुकी है। पूरे अरब में एक ही सवाल पूछा जा रहा है-अब किसका नंबर आएगा?
यमन :
· ब्रिटेन के उपनिवेश अदन और उत्तरी यमन को मिलाकर 1991 में यमन बना। तब से लेकर अब तक राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सलेह की निरंकुश सत्ता बरकरार।
· आतंकी संगठन अलकायदा के लड़ाकों को प्रशिक्षित करने की सुरक्षित जगह
· अरब देशों में सबसे कम विकसित और सबसे गरीब
· सवा दो करोड़ की आबादी में 86 फीसदी ग्रामीण इलाकों में द्
· कैदियों को यातना देने के लिए बिजली के झटके देना और एसिड से जलाना आम बात द्
· खून के बदले खून की प्रथा आम। इसलिए पुलिस यातना देने से पहले कैदी की हैसियत देखती है
· इस देश में सत्ता परिवर्तन की संभावना सबसे ज्यादा
अल्जीरिया :
· फ्रांस से आजादी के लिए खूनी क्रांति के बाद 1962 में इस देश में धर्मनिरपेक्ष सरकार बनी थी
· 1992 में जब ऐसा लगा कि इस्लामी कट्टरपंथी चुनाव जीत जाएंगे तो सेना ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद हुए गृह युद्ध में हजारों लोग मारे गए
· 1999 से राष्ट्रपति अब्देल अजीज बाउतेफिल्का का शासन
· खुफिया पुलिस का सत्ता पर नियंत्रण। इसके लिए वह क्रूरता की हदें पार कर जाती है
· खुफिया पुलिस की पकड़ ढीली होने पर कट्टरपंथियों के उभरने की आशंका।
· जन दबाव में सत्ता परिवर्तन की प्रबल संभावना
जॉर्डन :
· इस देश का जन्म 1946 में हुआ। इसकी 70 लाख की आबादी में से 10 लाख फलस्तीनी शरणार्थी
· इस देश में राजतंत्र है और इस समय शाह अब्दुल्ला द्वितीय का शासन चल रहा है
· यहां संसदीय चुनाव होते हैं लेकिन दोनों सदनों में शाह के समर्थकों का दबदबा
· हालांकि ट्यूनीशिया और मिस्त्र की देखादेखी यहां भी कई दिन तक प्रदर्शन हुए, लेकिन प्रदर्शनकारियों की संख्या काफी नहीं है
· इसलिए अब्दुल्ला के सत्ता छोड़ने की संभावना कम
· इसके बावजूद अगर वह सत्ता छोड़ते हैं तो राजशाही समर्थकों और फलस्तीनियों में हिंसा की आशंका
सऊदी अरब :
· यहां राजतंत्र है और कोई चुनाव नहीं होता है
· मक्का और मदीना के इस देश का दुनिया भर के मुसलमानों पर गहरा प्रभाव
· आय का असमान वितरण। तेल के कुओं के मालिक बहुत ज्यादा धनी और उनमें काम करने वाले बहुत गरीब
· अरब देशों में सबसे ज्यादा क्रूर शासन। किंग अब्दुल्ला की आलोचना की अनुमति नहीं। विरोधियों को यातना देना और सरेआम कत्ल करना आम
· इस्लामी कट्टरपंथियों का गढ़। अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला करने वाले 15 आतंकी सऊदी नागरिक थे
· इस अरब देश में जनक्रांति से सत्ता परिवर्तन की सबसे कम संभावना
लीबिया :
· यहां के राष्ट्रपति मुअम्मर गद्दाफी अरब देशों में सबसे ज्यादा समय तक शासन करने वाले नेता
· सैन्य तानाशाही पर आधारित शासन व्यवस्था। विरोधियों का मुंह बंद करने के लिए उन्हें सरेआम फांसी भी दी जाती है
· पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस का प्रचुर भंडार इसकी समृद्धि का आधार है लेकिन देश में गरीबों और बेरोजगारों की संख्या बहुत ज्यादा
· इसके बावजूद सत्ता परिवर्तन की संभावना बहुत कम क्योंकि गद्दाफी की सत्ता पर मजबूत पकड़ बनी हुई है
सीरिया :
· हालांकि अमेरिका सहित तमाम पश्चिमी देश सीरिया को बुराई की धुरी कहते हैं, लेकिन राष्ट्रपति बशीर असद की सरकार कट्टरपंथी इस्लाम के बिल्कुल खिलाफ है
· पश्चिमी देशों के विरोधी हिजबुल्ला को इस देश से हर तरह का समर्थन मिलता है
· चुनाव होते हैं, लेकिन सत्ताधारी अरब सोशलिस्ट बाथ पार्टी के अलावा किसी को भाग लेने की अनुमति नहीं
· इसके मद्देनजर राजनीतिक विरोधियों का उत्पीड़न आम बात है
· इसके बावजूद यहां सत्ता परिवर्तन की संभावना बहुत कम
मोरक्को :
· दुनिया की सबसे पुरानी राजशाही में से एक
· हालांकि देश के युवा राजा मुहम्मद षष्ठम ने अपनी छवि सुधारने की कोशिश की है लेकिन वह अपने पिता की क्रूरता से पीछा नहीं छुड़ा पाए हैं
· पड़ोसी ट्यूनीशिया, अल्जीरिया और मिस्त्र में जन आंदोलन के बावजूद मोरक्को पूरी तरह शांत है। इसकी एक वजह यह है कि यहां सत्ता की चाबी राजा के हाथ में होने के बावजूद नियमित अंतराल पर चुनाव होते रहते हैं
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