Tuesday, February 22, 2011

मिशन सुरक्षा परिषद पर भारत ने बढ़ाई रफ्तार


भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट के लिए कोशिशों की रफ्तार बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र सुधार और सुरक्षा परिषद विस्तार पर अगले महीने शुरू होने वाले वार्ता के जमीनी दौर से पहले भारत ने हाल ही में जहां अल्प विकसित देशों के विदेश मंत्रियों की मेजबानी की, वहीं अगले कुछ दिनों में अफ्रीकी कुनबे के साथ शिखर सम्मेलन की तैयारियां भी हो रही हैं। भारत समेत जी-4 मुल्कों की कवायद वीटो के साथ या वीटो के बिना हर हाल में फिलहाल आगे बढ़ने की है। कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक अगले साल तक नतीजों की कोशिश में लगा भारत केवल वीटो की जिद के पीछे फिलहाल ताजा मुहिम की रफ्तार खोने को राजी नहीं है। संयुक्त राष्ट्र का ढांचा सुधारने और सुरक्षा परिषद की तस्वीर ठीक करने को लेकर 2009 में शुरू हुई चर्चा की कवायद अब पांच पन्नों के एक दस्तावेज की शक्ल में तैयार हो गई है जिस पर अगले महीने से दुनिया भर के मुल्क बात करेंगे। संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के प्रतिनिधि जहीर तानिन की अगुवाई वाले अंतरसरकारी पैनल की ओर से तैयार इस मसौदे में सुरक्षा परिषद विस्तार के विभिन्न विकल्पों का खाका पेश किया गया है। उल्लेखनीय है कि आंकड़ों की अग्निपरीक्षा में भारत को 128 मुल्कों के समर्थन की जरूरत होगी। सुरक्षा परिषद सुधार के लिए स्थायी सदस्यों में नए सदस्यों के वीटो को लेकर भले ही मतभेद हों, लेकिन सुधार प्रक्रिया के विरोध में कोई नहीं है। सूत्र बताते हैं कि ब्रिटेन और फ्रांस जहां वीटो के बिना सदस्य संख्या बढ़ाने की अंतरिम व्यवस्था के हक में हैं, वहीं भारत का पुराना दोस्त रूस भी किसी नए सदस्य के वीटो अधिकार के साथ दाखिले के हक में नहीं है। उधर, अमेरिका ने भी संयुक्त राष्ट्र में भारत की दावेदारी का तो समर्थन किया है, लेकिन वीटो को लेकर फिलहाल कूटनीतिक पत्ते नहीं खोले हैं। पी-5 का सदस्य सुधार की रफ्तार को ही धीमा रखने का पक्षधर है। हालांकि संकेत हैं कि मतदान की नौबत में जापान और भारत के बीच चीन अपने नजदीकी पड़ोसी भारत के साथ जाना पसंद करेगा।

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