पाकिस्तान के साथ बातचीत बहाल करने की तैयारियों के बीच भारत ने बुधवार को कहा कि इस प्रक्रिया में कोई भी सार्थक प्रगति तभी हो सकती है जब इस्लामाबाद मुंबई पर 26 नवंबर को हुए आतंकवादी हमले के संबंध में नई दिल्ली की चिंताओं के निवारण के लिए ठोस कदम उठाए। रक्षा मंत्री एके एंटनी ने यहां एशियाई सुरक्षा सम्मेलन में कहा कि कोई भी सार्थक प्रगति तभी हो सकती है जब पाकिस्तान 26 नवंबर के आतंकवादी हमले के संबंध में भारत की चिंताओं का निवारण करने के लिए ठोस कदम उठाए। हालांकि, मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हाल में ही विदेश सचिव स्तर की वार्ता संपन्न हुई है जिसमें उन्होंने बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की इच्छा को प्रदर्शित किया। मुंबई पर 26 नवंबर के आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की प्रक्रिया निलंबित कर दी थी। बातचीत की यह प्रक्रिया थिंपू में एक हफ्ते पहले ही बहाल की गई थी। दोनों देशों के विदेश सचिवों ने एक-दूसरे से मुलाकात कर दोनों पक्षों के बीच मुद्दों पर चर्चा की। भारत मांग कर रहा है कि पाकिस्तान को अपने देश में स्थित आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए और मुंबई हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित करना चाहिए। गौरतलब है कि मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले में 165 लोग मारे गए थे जबकि कई अन्य घायल हुए थे। इस बीच, एक सभा को संबोधित करते हुए एंटनी ने कहा कि भारत ने नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और म्यांमार समेत अपने सभी पड़ोसियों के साथ हमेशा शांतिपूर्ण संबंध चाहा। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि एक देश की सुरक्षा उसके पड़ोसी देशों की सुरक्षा से काफी करीब से जुड़ी होती है और उस पर निर्भर करती है। पड़ोस में हम हमेशा बातचीत के जरिए मुद्दों के समाधान के पक्ष में रहे हैं। एंटनी ने कहा कि एशिया के मानचित्र पर भारत की सामारिक स्थिति इसे सामरिक महत्व देती है। एंटनी ने कहा कि भारत, चीन और जापान का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध है। इन देशों और अन्य एशियाई देशों के बीच अद्भुत अंतर संपर्क को देखते हुए सुरक्षा से संबंधित चुनौतियों और उनके समाधान के लिए समूचे क्षेत्र में एकीकृत नजरिए की आवश्यकता है। उन्होंने आतंकवाद, परमाणु प्रसार, पाइरेसी और हथियारों की तस्करी को एशियाई देशों के समक्ष उपस्थित कुछ मुख्य चुनौतियों के तौर पर गिनाया। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत एक देश की कीमत पर दूसरे देश के साथ संबंधों को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। उन्होंने कहा कि अन्य देशों के साथ हमारे संबंध हमारी सुरक्षा जरूरतों से निर्धारित होते हैं। हमने कभी किसी खास देश के साथ अपने संबंधों को किसी अन्य देश के साथ संबंधों की कीमत पर आगे नहीं बढ़ाना चाहा।
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