Saturday, February 12, 2011

महान जन आंदोलन के आगे झुकी 30 साल की तानाशाही


मिस्र में लोकतंत्र समर्थकों का आंदोलन आखिरकार रंग लाया। देशव्यापी आंदोलन के चलते उमड़े जनसैलाबऔर अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को घुटने टेकने पड़े हैं। शुक्रवार को मुबारक के इस्तीफे के साथ ही तीन दशक से जारी उनके शासन का अंत हो गया है और सेना ने देश की बागडोर संभाल ली है। उप राष्ट्रपति उमर सुलेमान ने टीवी संदेश में कहा कि मुबारक ने इस्तीफा दे दिया है। फौजी काउंसिल अब देश को संचालित करेगी। इसके साथ ही सितंबर में राष्ट्रपति पद के स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का वादा किया गया है। अमेरिका और भारत सहित दुनिया भर के ज्यादातर देशों ने मुबारक के पद छोड़ने का स्वागत किया है।
लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारियों का ठिकाना बने तहरीर स्क्वेयर में यह घोषणा किए जाते ही लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने मुबारक की बेदखली का देश के झंडे लहराते हुए जश्न मनाया। एक-दूसरे के गले मिलते हुए उन्होंने मिस्र अब आजाद हैऔर अहिंसक आंदोलन ने आखिरकार निरंकुश हुकूमत का अंत कर दियाके नारे लगाए। मिस्र में 18 दिनों की अस्थिरता और उहापोह भरे माहौल के बाद मुबारक की विदाई पर अंतिम मुहर लगी। लोकतंत्र समर्थक इस दौरान की धमक सूडान, जॉर्डन जैसे कुछ अन्य देशों में भी सुनाई दी तथा वहां भी मिस्र की तर्ज पर व्यवस्था के खिलाफ पुरजोर आवाज उठी।
इससे पहले, सैन्य शासन ने मिस्र में लोकतांत्रिक सुधारों की बहाली की गारंटी दी थी, लेकिन इससे भी लोगों का आक्रोश कम नहीं हुआ था। वे मुबारक के पद छोड़ने से कम किसी बात के लिए रजामंद नहीं थे। बृहस्पतिवार रात मुबारक के पछ छोड़ने से इनकार के बाद तो आंदोलनकारियों का सब्र जवाब दे गया था और उन्होंने अपनी जंगको अंतिम पड़ाव पर ले जाते हुए राष्ट्रपति पैलेस और देश के टीवी टॉवर की घेराबंदी कर थी। लोगों की नाराजगी कम करने की सेना की तमाम कोशिशें विफल हो रही थीं और जन विद्रोह के आगे उसकी भूमिका मूक दर्शकजैसी रह गई थी।

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