ट्यूनीशिया-मिस्र में सत्ता परिवर्तन के बाद यमन, जॉर्डन, लीबिया, बहरीन, अल्जीरिया, थाईलैंड और ईरान में सुलगी जन आंदोलन की आग अल्बानिया, कुवैत, जिबूती, बोलीविया तक पहुंच गई है। शनिवार को रूस में भी मानवाधिकार समर्थक सड़कों पर उतरे, लेकिन वहां हुए प्रदर्शनों से सरकार को फिलहाल खतरा नहीं दिखता।
लीबिया : उत्तर अफ्रीकी देश लीबिया के पूर्वी इलाकों में सत्ता विरोधी प्रदर्शन लगातार तेज हो रहा है, लेकिन राष्ट्रपति कर्नल गद्दाफी की सेना उतनी ही तेजी से जनांदोलन का दमन कर रही है। विदेशी मीडिया का इन इलाकों में प्रवेश रोक दिया गया है। शनिवार को दर्जनों प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की खबर है। न्यूयॉर्क के अमेरिकी मानवाधिकार संगठन ने कहा है कि बृहस्पतिवार से हो रहे प्रदर्शन में अब तक 84 जानें गई हैं। लीबिया के ओईए समाचार पत्र की वेबसाइट के अनुसार पूर्वी शहर अल-बैदा में गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को दो पुलिसकर्मियों को फांसी पर लटका दिया। बृहस्पतिवार को राजधानी त्रिपोली से 600 मील दूर बेंघाजी शहर में सेना और जनता के बीच को संघर्ष हुआ था। जिसमें कई नागरिक मारे गए थे। इनके अंतिम संस्कार के दौरान प्रदर्शनकारी और सुरक्षाबल फिर भिड़ गए थे। खबरों में कहा गया है कि बेंघाजी में कई जगहों पर बिजली काट दी गई है और टैंक गश्त लगा रहे हैं। कतर स्थित न्यूज चैनल अल जजीरा ने कहा है कि उसके कई सिग्नल जाम कर दिए गए हैं और उसकी वेबसाइट को भी ब्लॉक कर दिया गया है। लंदन स्थित लीबियाई पत्रकार अशौर शमीस ने अपने सूत्रों के हवाले से कहा कि बेंघाजी के कुवाफिया जेल पर हमला कर प्रदर्शनकारियों ने दर्जनों राजनीतिक कैदियों को छुड़ा लिया है। उन्होंने कहा कि करीब एक हजार कैदी इस हमले में निकल भागने में कामयाब रहे थे। लीबिया के पूर्वी क्षेत्र के अलावा कहीं और विद्रोह नहीं है। शुक्रवार को यहां राष्ट्रीय टेलीविजन ने त्रिपोली में गद्दाफी के समर्थकों का प्रदर्शन दिखाया। ये प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नारे लगाते हुए कह रहे थे कि वे देश को बांटना चाहते हैं। जानकारों का कहना है कि यहां मिस्र जैसा विद्रोह संभव नहीं है क्योंकि गद्दाफी और उनकी सत्ता के पास बहुत धन है। जिससे वे असंतुष्ट नागरिकों को सुविधाएं देकर शांत कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त देश के अधिकांश हिस्से में गद्दाफी का प्रभाव है।
बहरीन : बहरीन की सरकार ने शनिवार को विपक्ष की मांग स्वीकार करते हुए राजधानी मनामा की सड़कों से सेना हटा ली। हालांकि इस फैसले के बाद भी प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे हैं। हालांकि इस फैसले पर विपक्ष्री दलों ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे पहले विपक्ष की ओर से कहा गया था कि सरकार को इस्तीफा देना चाहिए और राजधानी की सड़कों से सेना को हटाना चाहिए तभी वह वार्ता की पेशकश स्वीकार करेगा। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सेना के हटाने के फैसले पर विपक्ष क्या रुख अपनाएं। मनामा की सड़कों पर सुरक्षा बलों पे आंसू गैस के गोले छोड़े। लोग सेना हटाने के फैसले पर लोग जश्न मना रहे थे। कम से कम 10 लोगों को हिरासत में ले लिया। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि शहजादा सलमान बिन हमाद अल खलीफा ने सेना को सड़कों से हटने का आदेश दिया। शाह घराने ने बातचीत के लिए शहजादा सलमान को बातचीत के लिए अधिकृत किया है। दूसरी ओर देश के सबसे बड़े शिया विपक्षी समूह अल वफाक के संसदीय नेता अब्दुल जलील खलील इब्राहिम ने कहा, वार्ता पर विचार करने के लिए सरकार को अवश्य ही इस्तीफा देना चाहिए। अब हम जो देख रहे हैं वह संवाद की भाषा नहीं, बल की भाषा है। उन्होंने कहा कि कल की सरकारी कार्रवाई में 95 लोग घायल हुए हैं और उनमें से तीन चिकित्सीय रूप से मृत हैं। इससे पहले मनामा में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर सनिकों ने गोलीबारी की जिसमें 66 लोग घायल हो गए। गुरुवार को प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई थी।
यमन : यमन में राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला लगातार जारी है। लगभग 500 लोगों ने शनिवार को सना विश्विद्यालय के सामने प्रदर्शन किया। इसके पहले शुक्रवार को दक्षिणी पत्तन शहर अदन में लगभग 7,000 प्रदर्शनकारियों ने दो सरकारी इमारतों पर धावा बोला और उन्हें आग के हवाले कर दिया था। प्रदर्शनकारी कुछ इस तरह के नारे लगा रहे थे सालेह गद्दी छोड़ो, गद्दी छोड़ो, हमारी मांगें साफ हैं। राष्ट्रपति सालेह के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार जारी विरोध प्रदर्शन शनिवार को नौवें दिन में प्रवेश कर गए। सालेह पिछले 32 वर्षो से सत्ता में हैं। इस बीच सरकार समर्थक 100 से अधिक प्रदर्शनकारी भी वहीं पास में जमा हो गए, और उन्होंने भी नारा लगाया, हम अली के अलावा और किसी को नहीं चाहते। शुक्रवार को लगभग 7,000 प्रदर्शनकारियों ने अदन में स्थानीय परिषद की दो इमारतों और एक पुलिस थाने पर धावा बोल दिया और उन्हें आग के हवाले कर दिया। इस घटना में कई लोग घायल हो गए। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने यमन के अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे सरकार विरोधी प्रर्दशनों को रोकने के लिए अधिक बल प्रयोग न करें, क्योंकि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगातार जारी हिंसा में कई व्यक्ति घायल हो गए हैं।
जिबूती : सबसे गरीब देशों में शामिल अफ्रीकी राष्ट्र जिबूती में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जोरदार झड़पें हुई। जिबूती में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत शुक्रवार से हुई थी। प्रदर्शनकारी इस्माइल उमर गुलेह से सत्ता छोड़ने की मांग कर रहे हैं। वह राष्ट्रपति 1999 से सत्ता में बने हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की योजना मिस्र की तरह एक स्थान पर सरकार विरोधी प्रदर्शन करने की थी, लेकिन सुरक्षाबलों के दखल की वजह से प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर पथराव किया। दूसरी तरफ सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे।
कुवैत : कुवैत में अधिकारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ दंगा निरोधी पुलिस की जोरदार झड़प हुई। इसमें पांच नागरिक घायल हो गए। कुवैत पुलिस ने 15 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया है। इससे पहले प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन वापस नहीं की अपील की थी, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया। इसके बाद पुलिस बल प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया।
जॉर्डन : राजधानी अम्मान में सरकार विरोधी और समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच शनिवार को जोरदार संघर्ष हुआ। इसमें आठ लोग घायल हो गए। अल-जजीरा ने शनिवार को कहा कि सरकार विरोधी प्रदर्शन शुक्रवार को भी जारी रहे। प्रदर्शनकारी संवैधानिक सुधार और निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी चाहते हैं। ईरान के प्रेस टीवी के मुताबिक करीब 2,000 लोगों के सरकार विरोधी प्रदर्शन पर सरकार समर्थकों ने बल्लों, पाइप और पत्थरों से हमला कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक सभी घायल सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी हैं। सरकार समर्थक कुछ प्रदर्शनकारियों ने समाचार चैनल अल-जजीरा पर असंतोष भड़काने का आरोप भी लगाया है। पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बाद अब तक के सबसे गंभीर घरेलू आर्थिक संकट और सरकारी भ्रष्टाचार के कारण जॉर्डन में सरकार के विरोध में आंदोलन भड़क उठा है। सरकार की आर्थिक और राजनीतिक नीति के विरोध में आंदोलन भड़कने के बाद शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने मंत्रिमंडल भंग कर दिया है। नए प्रधानमंत्री मारुफ बखित ने शाह के निर्देश लागू करने, वास्तविक आर्थिक और राजनीतिक सुधार करने तथा चुनाव कानून में सुधार का वादा किया है। लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री का चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया से हो न कि शाह द्वारा उनका मनोनयन हो।
ईरान : ईरान सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर विपक्ष्री दलों ने फिर सरकार विरोधी रैली निकारी तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रमुख विपक्षी नेता मीर हुसैन मुसावी और मेहदी कारौबी ने अपनी वेबसाइट के माध्यम से आह्वान किया कि वे रविवार को होने वाली रैली में एकत्र हों। पिछले दिनों हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों की याद में यह रैली निकाली जानी है। इस बारे में ईरान के गृह मंत्री मुस्तफा मोहम्मद नजर ने कहा, हम प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करेंगे। देशद्रोहियों के प्रतिनिधियों और देशद्रोही नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
थाईलैंड : थाईलैंड में नौ महीने पहले हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों की याद में हजारों लोग शनिवार को फिर राजधानी बैंकॉक की सड़कों पर नजर आए। लगभग 25000 रेड शर्ट प्रदर्शनकारियों ने डेमोक्रेसी मान्यूमेंट के निकट एकत्र होकर बीते साल अप्रैल और मई में मारे गए प्रदर्शनकारियों को याद किया। आंदोलन के नेता थिदा थावोर्नसेथ ने कहा, हम अपने उन लोगों के लिए इंसाफ मांगने के लिए एकत्र हुए जो नौ महीने पहले इसी स्थान पर मारे गए थे। 2010 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान 90 से अधिक लोग मारे गए थे और लगभग।900 लोग घायल हो गए थे।
अल्जीरिया : अल्जीरिया में पुलिस ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को जुलूस निकालने से रोकने के लिए उनके खिलाफ बल प्रयोग किया। जुलूस निकालने की योजना कोऑर्डिनेशन फॉर डेमोक्रेटिक चेंज इन अल्जीरिया की ओर से बनाई गई थी। आयोजकों का कहना है कि 10,000 लोग एकत्र हुए थे, जबकि उन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस के 26,000 जवानों को तैनात किया गया था। यहां एक स्प्ताह पहले भी विरोध प्रदर्शन हुए थे। सरकार की ओर से कहा कि पिछले प्रदर्शन में मात्र 1500 लोग ही जमा हुए थे।
अल्बानिया : विपक्षी सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर शनिवार को राजधानी तिराना में हजारों सरकार विरोधी सड़कों पर उतरे। इस दौरान वहां हिंसा भी भड़की। तिराना में एक महीने पूर्व भी हिंसा भड़की थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी।
बोलिविया : बोलिविया की लेबर यूनियन के हजारों कार्यकर्ताओं ने खाद्य उत्पादों की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शनिवार को ला पेज में विशाल रैली निकाली। सरकार ने दिसंबर में पेट्रोल और डीजल से सब्सिडी वापस ली थी, जिसके बाद से मंहगाई लगातार बढ़ रही है।
होस्नी मुबारक के समर्थकों ने निकाली सॉरी रैली
काइरो : मिस्र में राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के करीब सात सौ समर्थकों ने शुक्रवार को मध्य काइरो में सॉरी रैली का आयोजन किया। उन्होंने मुबारक को सत्ता से बेदखल होने से बचा पाने में असमर्थ होने का खेद प्रकट किया। वे 82 वर्षीय मुबारक के पोस्टर और देश के झंडे लेकर नारे लगा रहे थे। वे एक स्वर में कह रहे थे, मुबारक हम सभी आप से बहुत प्यार करते हैं। हम आपको कभी नहीं भूल पाएंगे। जबकि कुछ ही किलोमीटर दूर राजधानी के तहरीर चौक पर मुबारक विरोधी जश्न मना रहे थे। मुबारक समर्थक लाउडस्पीकर पर पूर्व राष्ट्रपति आखिरी भाषण बजा रहे थे। 57 वर्षीय राकिया इब्राहीम ने कहा, हम भी भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं, लेकिन मुबारक शांति चाहते थे। उन्होंने 1973 में अरब-इजरायल युद्ध में भी हिस्सा लिया था। वह हमारे पिता की तरह हैं और हमें अपने पिता का ख्याल रखना चाहिए। 36 वर्षीय हिशाम रगाब ने कहा, मैं भी बदलाव का समर्थक हूं। मगर इस तरह से 30 वर्ष तक देश को संभालने वाले शासक की बेइज्जती करना गलत हैं। लोग सितंबर तक सब्र नहीं कर सके। कुछ लोगों ने सरकारी इमारतों से भी उनके चित्रों को हटा दिया। जबकि वह मिस्र की पहचान थे।
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