Saturday, February 26, 2011

बातचीत की बेजा बेचैनी


अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की जोरदार पैरवी के बावजूद रेमंड डेविस का मामला लाहौर हाईकोर्ट की कानूनी प्रक्रिया में उलझ रहा है। पाकिस्तानी अमेरिका की मजबूरियों से खेलना सीख गए हैं। अरबों डॉलर की सैनिक-असैनिक अमेरिकी मदद का पाकिस्तान कोई अहसान नहीं मानता। पाकिस्तान की सड़कों पर खुलेआम अपराध, अराजकता इस हद तक बढ़ी हुई है कि आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है। डेविस ने अमेरिकी होने के गुरूर में लूट के प्रयास का उसी भाषा में जवाब देना चाहा, लेकिन वह मुश्किलों में फंस गए। अगर आप पाकिस्तान में हफ्ता-दस दिन गुजार कर आएं तो अपना भारत वाकई महान दिखेगा। वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व विधायक तनवीर हैदर उस्मानी का हालिया वृत्तांत हैरत में डालने वाला है। पाकिस्तान में किसी भी भारतीय को अपनी आमद दर्ज कराने पुलिस मुख्यालय जाना पड़ता है। पुलिस मुख्यालय कराची की इंडियन सेल के रजिस्टर में नाम दर्ज करने के लिए तनवीर हैदर से 25 हजार रुपये की मांग की गई। किसी तरह बात दस हजार पर बनी। पैसे तो अलग, सिगरेट का पैकेट भी बड़ी बदतमीजी से झपट लिया गया। सौभाग्य से उसी वक्त कराची के पुलिस कमिश्नर का काफिला आ पहुंचा। स्टाफ की मुट्ठियां गरम कर उन्होंने कमिश्नर तक अपना कार्ड पहुंचाया। भारत की एक प्रमुख पार्टी के नेता का कार्ड देख कर पुलिस कमिश्नर उन्हें बड़ी इज्जत से अपने आफिस में ले गए। उस्मानी साहब ने सारी कहानी बयान की। कहा कि हम दोनों देश एक ही जैसे हैं, लेकिन रेट का फर्क जबरदस्त है। हमारे यहां का पुलिसवाला शायद सौ-दो सौ रुपये तक की मांग करता। इस काम के लिए पच्चीस हजार तो वह सोच भी नहीं सकता। शर्मसार पुलिस कमिश्नर ने तुरंत ही सारी इंडियन सेल को लाइनअप किया। तलाशी में हिंदुस्तानियों से दिन भर की वसूली के सोलह लाख रुपये मिले। सिगरेट का पैकेट भी बरामद हुआ। साफ दिखा कि हमें जिहाद एक्सपोर्ट करने वाले मौका पाते ही हमारी जेबें काट लेते हैं। बहरहाल, पूरी की पूरी इंडियन सेल को सस्पेंड कर दिया गया। उस्मानी साहब एक पारिवारिक शादी में भाग लेने वहां गए थे। नई मर्सिडीज गाड़ी सजने के लिए भेजी गई। चाइनीज पिस्टल दिखाकर गाड़ी, मोबाइल, पैसे वगैरह सब छीन लिए गए। पुलिस कमिश्नर के दखल के बाद भी गाड़ी नहीं मिली। जब मिली तो उसके अंजर-पंजर ईंटों पर रखे थे। गाड़ी के टायर, इंजन, सीटें और जो भी खोला जा सकता था, सब गायब था। शादी के घर की रखवाली के लिए एके 47 लिए दो गार्ड दरवाजे पर खड़े थे। पूछा, यह क्या है? जवाब मिला कि ये गार्ड न हों तो शादी के घर से सारा माल-असबाब लुट जाए। यहां बाजारों में कभी कोई पर्स नहीं खोलता। पैसे कॉलर से लेकर मोजे तक कई जगहों पर छिपाने पड़ते हैं। पाकिस्तान में न्याय एके 47 की गोलियों से निकलता है। यह पता ही नहीं होता कि फौज, लोकतंत्र और तालिबान में से कौन कहां ताकतवर हो जाए। जिहाद को जिंदाबाद बोलते पाकिस्तान का बस खुदा ही मालिक है। पाकिस्तान बनवाने वाले हमारे यूपी, बिहार से गए मुहाजिरों का और भी बुरा हाल है। वे रिफ्यूजी के रिफ्यूजी ही रह गए। आज के पाकिस्तान में उनकी हैसियत सबसे निचले दर्जे की है। वे रोते हैं अपने गांव, अपने वतन के लिए। बाराबंकी से गए एक बुजुर्ग ने दरख्वास्त की थी कि हमारे गांव की मिट्टी लेते आना। तनवीर भाई ने बताया कि अपने गांव की मिट्टी अपने माथे पर लगाते वक्त उनके चेहरे पर जो खुशी का भाव था उसे वे ताउम्र नहीं भूल पाएंगे। एक भरे-पूरे देश में अपनी जिंदा संस्कृति छोड़कर वह उस देश में चले गए हैं जो अभी तक बसा ही नहीं है। वह बंटवारे के दिन को कोसते हैं। वह वापस अपने गांवों, कस्बों में दफन होना चाहते हैं। कोई पूछता है-दंगों में तो बहुत से मुसलमान मारे जाते होंगे। तनवीर भाई ने जवाब दिया-नहीं, दंगे कम हो गए हैं। ऐसे मौकों पर मुल्क हमारा साथ देता है। समस्या तुम्हारी वजह से है। तुम्हारी वजह से हम पर पाकिस्तानी सोच के इलजाम लग जाते हैं। पाकिस्तान ऐसा देश है, जिसे शायद ही कहीं सम्मान से देखा जाता हो। न जाने क्यों हम पाकिस्तान से वार्ता के लिए बेचैन रहते हैं। जिनके वजूद का कोई ठिकाना नहीं, उनसे होने वाली वार्ताओं का अर्थ भी क्या है? कश्मीर कोई समस्या नहीं, सिर्फ एक बहाना है। 26/11 एक मजाक बन कर रह गया है। अब फिर से मुशर्रफ फार्मूले की बातें हो रही हैं। पाकिस्तानी राजनयिक आस्तीनों में मुंह छिपाकर हंसते होंगे। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, यह कहने के बाद दूसरी सांस में वार्ताओं के बयान का दोमुंहापन हमें कहां ले जाएगा? नेहरू ने इस देश को विदेश नीति की प्रयोगशाला बनाने की कोशिश की थी। इसकी परिणति कश्मीर और चीन सीमा विवाद जैसी स्थायी समस्याओं के रूप में हुई है। अगली पीढि़यां अपना सिर धुनेंगी कि पाकिस्तान हमारे लिए एटम बमों के जखीरे बनाता गया और हम उन्हें वार्ताओं के गुलदस्ते पेश करते रहे। (लेखक पूर्व सैन्य अधिकारी हैं)

No comments:

Post a Comment