मिस्र में अप्रत्याशित विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक की ओर से संवैधानिक बदलाव पर गठित आयोग ने छह संशोधन का प्रस्ताव रखा है।
सरकारी संवाद समिति मीना के अनुसार आयोग ने अनुच्छेद 76 और अनुच्छेद 77 में बदलाव पर विचार करने पर सहमति जताई है। अनुच्छेद 76 में इस बात का प्रावधान है कि कौन राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार हो सकता है। अनुच्छेद 77 के अनुसार राष्ट्रपति के कार्यकाल की कोई सीमा नहीं है और इसी अनुच्छेद की वजह से मुबारक पिछले 30 साल से राष्ट्रपति बने हुए हैं। हालांकि आयोग ने दशकों से आपात जैसी माहौल के बारे में कोई चर्चा नहीं की है जिसके बारे में मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इसकी वजह से अभिव्यक्ति और एकत्रित होने की आजादी उपहास का पात्र बन जाती है। अमेरिका ने भी इस प्रतिबंध को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
पैनल चुनाव के अनुच्छेद 88, अनुच्छेद 93 तथा अनुच्छेद 179 में संशोधन पर भी सहमत हुआ है। अनुच्छेद 88 चुनाव के न्यायिक निरीक्षण से संबंधित है जबकि अनुच्छेद 93 चुनाव का आधिकारिक नतीजे के खिलाफ अपील से संबंध है। अनुच्छेद 179 राष्ट्रपति को आतंकवादी कृत्य के मामले में आरोपी के खिलाफ सैन्य सुनवाई का अधिकार प्रदान करता है। समीक्षा के दायरे में अनुच्छेद 189 भी आया है जो फिलहाल केवल राष्ट्रपति और संसद के अध्यक्ष को ही संवैधानिक संशोधन के बारे में निर्णय लेने का अधिकार प्रदान करता है। रविवार को नवनियुक्त उपराष्ट्रपति उमर सुलेमान प्रभावशाली मुस्लिम ब्रदरहुड समेत विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों से मिले। मिस्र में पिछले दो सप्ताह से जारी प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में मुबारक के 30 साल के शासन से लोकतंत्र की ओर परिवर्तन की प्रक्रिया पर नजर रखने की जिम्मेवारी अमेरिका के चहेते समझे जाने वाले सुलेमान पर ही है। वार्ता के बाद सरकार ने कहा कि विभिन्न दल इन संवैधानिक सुधारों पर अध्ययन के लिए न्यायाधीशों और राजनेताओं की एक समिति गठित करने पर राजी हुए। मिस्र में 25 जनवरी से ही मुबारक के शासन के खिलाफ जनांदोलन चल रहा है जिससे वहां की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। प्रदर्शनकारियों को मुबारक की यह पेशकश मंजूर नहीं है कि सितंबर में कार्यकाल पूरे होने पर वह पद छोड़ देंगे। उनकी मांग है कि वह तत्काल पद छोड़ें।
सरकारी संवाद समिति मीना के अनुसार आयोग ने अनुच्छेद 76 और अनुच्छेद 77 में बदलाव पर विचार करने पर सहमति जताई है। अनुच्छेद 76 में इस बात का प्रावधान है कि कौन राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार हो सकता है। अनुच्छेद 77 के अनुसार राष्ट्रपति के कार्यकाल की कोई सीमा नहीं है और इसी अनुच्छेद की वजह से मुबारक पिछले 30 साल से राष्ट्रपति बने हुए हैं। हालांकि आयोग ने दशकों से आपात जैसी माहौल के बारे में कोई चर्चा नहीं की है जिसके बारे में मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इसकी वजह से अभिव्यक्ति और एकत्रित होने की आजादी उपहास का पात्र बन जाती है। अमेरिका ने भी इस प्रतिबंध को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
पैनल चुनाव के अनुच्छेद 88, अनुच्छेद 93 तथा अनुच्छेद 179 में संशोधन पर भी सहमत हुआ है। अनुच्छेद 88 चुनाव के न्यायिक निरीक्षण से संबंधित है जबकि अनुच्छेद 93 चुनाव का आधिकारिक नतीजे के खिलाफ अपील से संबंध है। अनुच्छेद 179 राष्ट्रपति को आतंकवादी कृत्य के मामले में आरोपी के खिलाफ सैन्य सुनवाई का अधिकार प्रदान करता है। समीक्षा के दायरे में अनुच्छेद 189 भी आया है जो फिलहाल केवल राष्ट्रपति और संसद के अध्यक्ष को ही संवैधानिक संशोधन के बारे में निर्णय लेने का अधिकार प्रदान करता है। रविवार को नवनियुक्त उपराष्ट्रपति उमर सुलेमान प्रभावशाली मुस्लिम ब्रदरहुड समेत विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों से मिले। मिस्र में पिछले दो सप्ताह से जारी प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में मुबारक के 30 साल के शासन से लोकतंत्र की ओर परिवर्तन की प्रक्रिया पर नजर रखने की जिम्मेवारी अमेरिका के चहेते समझे जाने वाले सुलेमान पर ही है। वार्ता के बाद सरकार ने कहा कि विभिन्न दल इन संवैधानिक सुधारों पर अध्ययन के लिए न्यायाधीशों और राजनेताओं की एक समिति गठित करने पर राजी हुए। मिस्र में 25 जनवरी से ही मुबारक के शासन के खिलाफ जनांदोलन चल रहा है जिससे वहां की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। प्रदर्शनकारियों को मुबारक की यह पेशकश मंजूर नहीं है कि सितंबर में कार्यकाल पूरे होने पर वह पद छोड़ देंगे। उनकी मांग है कि वह तत्काल पद छोड़ें।
No comments:
Post a Comment