भारत और पाकिस्तान के नेतृत्व भले ही बातचीत के जरिए कड़वाहट को खत्म करने की प्रतिबद्धता जाहिर करें, लेकिन दोनों देशों के संबंधों में कोई तरक्की नहीं हुई है। यह दावा किया है अमेरिका के एक खुफिया आला अधिकारी ने। नेशनल इंटेलीजेंस के निदेशक जेम्स आर क्लेपर ने सीनेट सलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलीजेंस के समक्ष यह बयान दिया। उनका कहना है कि भारत और पाकिस्तान कश्मीर और आतंकवाद समेत सभी मुद्दों पर बात करना चाहते हैं। दोनों विदेश मंत्री स्तर पर बातचीत के दूसरे चरण के लिए भी प्रतिबद्ध हैं, जिसकी तारीख अभी निर्धारित होना है, लेकिन दोनों देशों के बीच संबंधों में ज्यादा बदलाव नहीं आने वाला। क्लेपर ने कहा, भारत के आला अधिकारी पाकिस्तान से मंुबई हमलों के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए बार-बार कह रहे हैं। जिस रफ्तार से पाकिस्तान में यह प्रक्रिया चल रही है उसको लेकर वह चिंतित भी हैं। उसके बावजूद भारत-पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने को लेकर लगातार कोशिश में है। उनका मानना है कि भारत एक निर्धारित विदेश नीति पर काम कर रहा है। जिसके तहत वह पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंध बनाने की दिशा में काम कर रहा है। चीन के प्रधानमंत्री के अलावा, अमेरिका, फ्रांस और रूस के राष्ट्रपति के पिछले साल दौरों से भारत की विदेश नीति को स्पष्ट करती है। भारत के प्रति अमेरिका के लचीले रवैये से भी स्पष्ट होता है कि भारत अपनी नीति में सफल हो रहा है।
पाक के साथ अमेरिका के संबंध जटिल : सीआइए
सीआइए निदेशक लियोन पेनेटा ने अमेरिकी सांसदों से कहा है कि अमेरिका के संबंध पाकिस्तान के साथ अत्यंत जटिल हैं और विभिन्न मुद्दों पर दोनों देशों के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। पेनेटा ने खुफिया मामलों से संबंधित सीनेट सलेक्ट कमेटी के समक्ष कहा, मैं हम फाटा क्षेत्र में अलकायदा नेतृत्व को निशाना बना रहे हैं और इस प्रयास में हमें पाकिस्तानियों का सहयोग मिलता है। दूसरी ओर पाकिस्तान अपने राष्ट्रीय हितों से संबंधित मुद्दों को देखता है और ऐसे कदम उठाता है जिनसे संबंध जटिल हो जाते हैं तथा दोनों देशों के बीच तनाव उत्पन्न होता है।
आतंकवाद के खिलाफ आइएसआइ के दोहरे मापदंड
अमेरिका ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ पर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। आइएसआइ के प्रभाव का ही असर है कि एक तरफ पाकिस्तान अमेरिका को आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्र्वासन देता है, दूसरी तरफ भारत को मंुबई हमलों के आतंकियों को सौंपने से इंकार करता है। इंटेलीजेंस कमेटी के अध्यक्ष डिएन फींस्टीन ने आइएसआइ के बारे में यह राय पेश की है। उन्होंने कहा, लगता है आइएसआइ दो नावों पर सवार है। वह भारत में मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार दो प्रमुख आतंकवादियों, एक सरगना और दूसरा इसे अंजाम देने वाले आतंकवादी को भारत को सौंपने में पीछे रहा है। अमेरिका के लाख कहने कि बावजूद वह आतंकियों के सुरक्षित ठिकाने उत्तरी वजीरिस्तान में सख्त कदम उठाने से पीछे भागता है। उनका मानना है कि पाकिस्तान के सामने अमेरिका और भारत को लेकर कई मुद्दे हैं और ऐसे में वह एक और परमाणु हथियार बनाने के बारे में सोच रहा है। यह फैसला उसके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
पकड़ा गया तो ग्वांतानामो भेजा जाएगा लादेन
दुनिया का मोस्ट वांटेट आतंकवादी अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन और उसका खास सहयोगी अयमान अल जवाहिरी अगर पकड़े जाते हैं, तो उन्हें ग्वांतोनामो बे जेल भेजा जाएगा। यह बात अमेरिकी खुफिया एजेंसी के प्रमुख लियोन पैनेटा ने कही। पैनेटा ने कांग्रेस के सामने एक सुनवाई में सवालों के जवाब में कहा, दोनों आतंकियों के पकड़े जाने पर हम उन्हें तत्काल बगराम स्थित सेना के शिविर में ले जाएंगे। उसके बाद उन्हें ग्वांतोनामो बे भेज दिया जाएगा। यह पहला मौका है जब किसी अमेरिकी अधिकारी ने अल कायदा के शीर्ष नेतृत्व की हिरासत की योजना का रहस्योद्घाटन किया है। अमेरिकी कांग्रेस ने प्रशासन पर ग्वांतानामो के किसी भी बंदी को अमेरिका लाने पर रोक लगा रखी है। पैनेटा का बयान ओसामा या जवाहिरी के लिए किसी संघीय सुनवाई की संभावना को नकारता प्रतीत होता है। 2002 में ग्वांतोनामो जेल में कैदियों के साथ अमानवीय तस्वीरें सामने आने के बाद अमेरिका की काफी किरकिरी हुई थी।
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