मिस्र की सेना ने स्पष्ट कर दिया कि वह प्रदर्शकारियों पर बलप्रयोग नहीं करेगी। सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने सेना से कहा था कि उसे जनता और राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक में से किसी एक को चुनना होगा। सेना के इस रुख को 30 साल से सत्ता पर काबिज हुस्नी मुबारक के दिन पूरे होने का संकेत माना जा रहा है। मंगलवार को टेलीविजन पर सेना की ओर से दिए बयान में कहा गया, हम मिस्र के नागरिकों के अधिकारों को समझते हैं और उनके खिलाफ हथियार न उठाने का वादा करते हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हर किसी को अधिकार है। इसमें बाधा नहीं पहुंचायी जाएगी। प्रदर्शनकारियों ने हुस्नी मुबारक को शुक्रवार तक देश छोड़ने की चेतावनी दे रखी है। हालांकि वह सत्ता बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को उपराष्ट्रपति उमर सुलेमान को आदेश दिया कि वे विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर संकट दूर करने का प्रयास करें। इसके बाद नव नियुक्त उपराष्ट्रपति सुलेमान ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर कहा कि मुबारक ने उन्हें विरोधियों से बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी है। वह संवैधानिक और वैधानिक परिवर्तनों पर तत्काल बातचीत करने को तैयार हैं।
देश छोड़ दें मुबारक
लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता व नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद अलबरदेई ने मंगलवार को कहा कि मुबारक अब अगर अपनी चमड़ी बचाना चाहते हैं, तो उन्हें देश छोड़ देना चाहिए। हालांकि सड़कों पर उतर आई जनता तो निरंकुश राष्ट्रपति मुबारक को कैद कर मुकदमा चलाए जाने के पक्ष में है।
यमन में युवाओं को रोजगार देने के लिए बनेगा कोष
यमन में विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहे राष्ट्रपति अली अबदुल्ला सालेह ने स्नातक युवकों को रोजगार देने के लिए विशेष कोष स्थापित करने का आदेश दिया है। सरकारी समाचार एजेंसी सबा के अनुसार सालेह ने आदेश दिया कि इस साल कम से कम उन 25 फीसदी स्नातक युवकों को नौकरी दी जाए, जो बेरोजगार हैं। यहां हो रहे विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी वजह बेरोजगारी है। इस कोष की राशि के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। अधिकारियों की ओर से यह भी नहीं बताया गया कि युवकों को रोजगार कहां दिया जाएगा।
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