अफ्रीकी-अरब देशों में चल रही तानाशाही-राजशाही विरोधी लहर से बचने के लिए यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह ने बुधवार को एक और कदम उठाया। सालेह ने जनता से वादा किया वह अगला कार्यकाल नहीं चाहते हैं। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि 2013 में कार्यकाल पूरा होने के बाद वह अपने बेटे को सत्ता हस्तांतरित नहीं करेंगे। इससे पहले यमन सरकार ने सत्ता विरोधी प्रदर्शन कर रहे युवाओं को शांत करने के प्रयासों के तहत उनके लिए अलग कोष गठित करने का एलान किया था। बुधवार को देश की संसद को संबोधित करते हुए सालेह ने कहा, मैं राष्ट्रपति पद पर एक और कार्यकाल नहीं चाहता और न ही अपने पुत्र को सत्ता सौंपना चाहता हूं। पिछले महीने ट्यूनीशिया में जनविद्रोह के बाद हुए सत्ता परिवर्तन से प्रेरित होकर यमन, मिस्र और जॉर्डन में प्रदर्शन शुरू हुए थे। यमनी राष्ट्रपति का यह बयान मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक की घोषणा के बाद आया है। उन्होंने भी अगला चुनाव नहीं लड़ने का वादा किया है। मंगलवार को जॉर्डन में भी बदलाव देखने को मिला। वहां किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने प्रधानमंत्री समीर रिफई सहित पूरी कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया। इन तीनों देशों की सरकारें अमेरिका समर्थित हैं।
No comments:
Post a Comment