येलैंडे नेल मिस्त्र में जनविद्रोह के बाद राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक ने खुफिया प्रमुख उमर सुलेमान को उपराष्ट्रपति बनाया। इससे पहले उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा लिया था और नए मंत्रिमंडल को शपथ दिलाई, लेकिन काहिरा की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों पर इन कदमों का कोई प्रभाव पड़ता नहीं दिख रहा है। मुबारक को उम्मीद है कि उनकी नई सरकार प्रदर्शनकारियों को ये समझाने में कामयाब होगी कि सरकार नए राजनीतिक सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है। दूसरी ओर सड़कों पर डेरा डाले बैठे लोग इसे मानने को तैयार नहीं। उनकी मांग स्पष्ट है-हुस्नी मुबारक को जाना होगा। काहिरा के तहरीर स्क्ेवयर पर हजारों की संख्या में मौजूद मिस्रवासियों में से एक मोहम्मद सादिक का कहना था, हम इसलिए मर नहीं रहे हैं कि राष्ट्रपति सिर्फ कैबिनेट बदल दें। हम असली लोकतंत्र चाहते हैं-जहां राष्ट्रपति के अधिकार सीमित हों। छात्र युमला ने कहा, देशवासी राष्ट्रपति, सरकार और भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं। पिछले कुछ वर्षो में मिस्त्र में लोकतंत्र समर्थक अकसर सड़कों पर उतरते रहे हैं, लेकिन ये चेहरे जाने पहचाने होते थे। आगे क्या होगा? सवाल यह है कि अगर राष्ट्रपति इन प्रदर्शनकारियों की मांगें मान लें तो आगे क्या होगा? सरकार गिर जाए तो उसके बाद कौन देश की बागडोर संभालेगा। ट्यूनीशिया में हुए आंदोलन के बाद इसका जवाब खोजना मुश्किल था और मुश्किल था लोगों की आकांक्षाओं पर खरा उतरना। मिस्त्र में सालों तक एक ही दल की सरकार होने के कारण विपक्ष कमज़ोर है, निजी और वैचारिक कारणों से बंटा हुआ भी है। अगर मिस्त्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हों तो आमतौर पर माना जाता है कि इस्लामिक पार्टी मुस्लिम ब्रदरहुड को व्यापक समर्थन मिलेगा। मिस्त्र में यही एकमात्र संगठन है, जिसमें हजारों की संख्या में लोग हैं। 2005 में हुए चुनावों में इस पार्टी को कई सीटें भी मिली थीं।
बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा मुस्लिम ब्रदरहुड फैक्टर
पेप इस्कोबर मिस्र की राजधानी में मंगलवार को मिलियन मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने इस मार्च के जरिए अपना इरादा स्पष्ट कर दिया। वह पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि आने वाले शुक्रवार तक राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को देश छोड़ना होगा। कल क्या होगा कहना मुश्किल है, लेकिन मिस्र के सैन्य कमांडरों के फैसले ने जनता का उत्सह दोगुना कर दिया है। सेना को देशवासी और मुबारक में से एक चुनना था। सैन्य अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर बलप्रयोग नहीं करने का फैसला कर स्पष्ट कर दिया कि वे जनता के साथ खड़े होंगे। बहरहाल पूरे घटनाक्रम में मुस्लिम ब्रदरहुड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो चली है। इस संगठन के अल कायदा से संबंधों की चर्चा है। कहा जा रहा है कि मुबारक के जाने से मिस्र में इस्लामिक कट्टरपंथी को बढ़ावा मिलेगा। मेरे हिसाब से इन भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत है। मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना 1928 में हसन अल बन्ना ने की। उनका मकसद सामाजिक कार्य करना था। उन्होंने स्कूल और मस्जिद निर्माण के साथ अस्पताल भी बनवाए। अल कायदा या इस्लामिक चरमपंथ से इसका लेना-देना नहीं। यह संगठन तकनीकी रूप से भले ही बहुत सक्षम नहीं, लेकिन मिस्र की प्रत्येक गली में इसके प्रशंसक हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद अल बरदेई सबसे आकर्षक चेहरा बने हुए हैं, लेकिन मिस्रवासियों के लिए वह बाहरी शुभचिंतक की तरह हैं। कई जानकार यह भी कह रहे हैं कि बाहरी होने का उन्हें लाभ मिल सकता है।
पेप इस्कोबर मिस्र की राजधानी में मंगलवार को मिलियन मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने इस मार्च के जरिए अपना इरादा स्पष्ट कर दिया। वह पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि आने वाले शुक्रवार तक राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को देश छोड़ना होगा। कल क्या होगा कहना मुश्किल है, लेकिन मिस्र के सैन्य कमांडरों के फैसले ने जनता का उत्सह दोगुना कर दिया है। सेना को देशवासी और मुबारक में से एक चुनना था। सैन्य अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर बलप्रयोग नहीं करने का फैसला कर स्पष्ट कर दिया कि वे जनता के साथ खड़े होंगे। बहरहाल पूरे घटनाक्रम में मुस्लिम ब्रदरहुड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो चली है। इस संगठन के अल कायदा से संबंधों की चर्चा है। कहा जा रहा है कि मुबारक के जाने से मिस्र में इस्लामिक कट्टरपंथी को बढ़ावा मिलेगा। मेरे हिसाब से इन भ्रांतियों को दूर करने की जरूरत है। मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना 1928 में हसन अल बन्ना ने की। उनका मकसद सामाजिक कार्य करना था। उन्होंने स्कूल और मस्जिद निर्माण के साथ अस्पताल भी बनवाए। अल कायदा या इस्लामिक चरमपंथ से इसका लेना-देना नहीं। यह संगठन तकनीकी रूप से भले ही बहुत सक्षम नहीं, लेकिन मिस्र की प्रत्येक गली में इसके प्रशंसक हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद अल बरदेई सबसे आकर्षक चेहरा बने हुए हैं, लेकिन मिस्रवासियों के लिए वह बाहरी शुभचिंतक की तरह हैं। कई जानकार यह भी कह रहे हैं कि बाहरी होने का उन्हें लाभ मिल सकता है।
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