Thursday, February 3, 2011

मैक्लोडगंज बना मौल्लागंज, धर्मशाला हुआ दांसू


चीनी आक्रमण के बाद देश में शरण लेने वाले तिब्बती अब भारतीय भूभाग को तिब्बत बनाने में जुटे हैं। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में मिनी ल्हासा के नाम से प्रचारित निर्वासित तिब्बत सरकार के मुख्यालय मैक्लोडगंज को तिब्बती मौल्लागंज व धर्मशाला को दांसू पुकारते हैं। शरणार्थियों की कालोनियों और बौद्ध मठों के नामों के आगे गांवों व कस्बों के पुराने नाम गायब हो गए हैं। तिब्बतियों ने मठों को तिब्बत की तर्ज पर ही रूप देना शुरू कर दिया है। पिछले 10 साल में इन मठों के साथ की जगह भी बदली-बदली सी लगती है। यहां स्थापित इन मठों का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। कांगड़ा जिले के धर्मशाला में मैक्लोडगंज, सिद्धबाड़ी, बैजनाथ के झकली भेठ, भट्टू, बीड़, जंडपुर, नगरी, गोपालपुर और मंडी जिले के सूजा और चौंतड़ा में दर्जनों बौद्ध मठ, कॉलोनी व हॉस्टल बन चुके हैं। इनमें मैक्लोडगंज को मिनी ल्हासा की संज्ञा देने के साथ इसे मौल्लागंज व धर्मशाला को दांसू का नाम दिया गया है। वहीं, सिद्धबाड़ी व सिद्धपुर की पहचान पर्यटकों और टैक्सी ड्राइवरों को ग्यूतो (ग्योत्सो) और नोरबुलिंगा मठों के नाम पर करवाई जा रही है। गमरू नामक स्थान को तिब्बती खंगी नाम से पुकारने लगे हैं। बैजनाथ के झिकली भेठ गांव में बनाए गए खांपागर बौद्ध मठ के तिब्बत में टासीजोंग नामक स्थान पर होने के कारण,अब इस स्थान को भी टासीजोंग का नाम दे दिया गया है। लोक निर्माण विभाग ने भी मील के पत्थरों पर इस स्थान को टासीजोंग के नाम से अंकित कर दिया है जबकि भट्टू (बैजनाथ) के ऊपरी भाग को शेराबिलिंग नाम से पुकारा जा रहा है। इसी तरह कुछ मार्गो के नाम को भी बदल दिया गया है। मैक्लोडगंज से धर्मकोट जाने वाली सड़क को अब टिप्पा रोड और प्रसिद्ध जोगीवाड़ा रोड को अनी गुम्पा की संज्ञा दे दी गई है। धर्मशाला के करमू मोड को टीसीवी चौक से पुकारा जाने लगा है व खड़ा डंडा रोड को दलाईलामा टैंपल रोड व प्रसिद्ध डल झील को जाने वाले रोड को भी टीसीवी रोड कहा जाता है। राज्य के लोक निर्माण एवं राजस्व मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर का कहना है कि किसी भी स्थान का नाम राजस्व रिकार्ड के अनुसार ही मान्य होता है। यदि कुछ स्थानों में दूसरे नाम अंकित हो रहे हैं व विभाग भी उन्हीं नामों को दर्शा रहा है तो वह इस बारे जांच करेंगे।


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