Thursday, February 3, 2011

अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और ईयू ने बदलाव को जरूरी बताया


जनता का भारी विरोध झेल रहे मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के तुरंत इस्तीफे से इनकार करने पर दुनिया के बड़े मुल्कों ने नाखुशी जाहिर की है। मिस्र के करीबी अमेरिका के साथ ही ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की ने इशारों ही इशारों में मुबारक पर तुरंत गद्दी छोड़ने का दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मुबारक के बयान पर कहा कि बदलाव शांतिपूर्ण और अभी शुरू हो जाना चाहिए।
उन्होंने अपने संदेश में कहा, मिस्र की जनता खासकर युवाओं के लिए मेरा संदेश साफ है, हमने आपकी आवाज सुनी है। मिस्र की जनता को ही अपना नेता चुनने का अधिकार है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, जनता की भावनाओं की कद्र करते हुए मिस्र में ठोस बदलाव बगैर किसी देरी के शुरू किए जाने चाहिए। उन्होंने मिस्र की सरकार से अनुरोध किया कि बदलाव की प्रक्रिया बगैर किसी हिंसा के पूरी हो। जर्मनी के विदेश मंत्री गुइडो वेस्टरविले ने कहा कि मुबारक ने दोबारा चुनाव लड़ने से इनकार किया है, यह राजनीतिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम है। मिस्रवासी लोकतांत्रिक बदलाव चाहते हैं और इसकी शुरूआत तुरंत होनी चाहिए। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भी जोर दिया कि सत्ता में बदलाव की प्रक्रिया तेज और विश्वसनीय हो साथ ही अभी प्रारंभ की जाए। ब्रिटेन उन लोगों के साथ हैं जो आजादी, प्रजातंत्र और मौलिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। मिस्र की सरकार जनता की इच्छाओं का सम्मान करे। यूरोपीय संघ के विदेशी मामलों के प्रमुख कैथरीन एस्टन ने बदलाव को जरूरी बताते हुए कहा, मिस्र में एक व्यापक जनाधार वाली सरकार कानून के शासन, मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए ठोस प्रजातांत्रिक बदलाव की प्रक्रिया शुरू करे। दुर्भाग्य से मिस्र में नई कैबिनेट व्यापक प्रतिनिधित्व नहीं करती।


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