Thursday, February 3, 2011

जासूसी के आरोपियों को छुड़ाने में जुटा चीन


नेपाल की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में जासूसी के आरोप में धरे गए तीन चीनी नागरिकों का मामला रफा दफा कराने के लिए बीजिंग ने भारत पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय तो पिछले कई दिनों से अपने लोगों के बचाव में बयानबाजी कर ही रहा है, लेकिन अब दिल्ली में मोर्चा चीनी राजदूत झांग यान ने संभाल लिया है।
उन्होंने पिछले सप्ताह विदेश सचिव निरुपमा राव से इस संबंध में लंबी मुलाकात भी की है।
सूत्रों के अनुसार यान ने इस मुलाकात में अपने लोगों का मामला रफा दफा कराने के लिए ही दबाव बनाने की कोशिश की। यही वजह है कि उन्होंने अंदेशा जताया है कि नेपाल से भटक कर भारत की सरहद में प्रवेश कर गए तीनों चीनियों की जांच में निष्पक्षता का अभाव है। वहीं उन्होंने पुलिस की नीयत पर भी शक जताया है। चीनी दूतावास के एक अधिकारी ने तो 17 जनवरी के बाद से अभी तक लगातार साउथ ब्लॉक के कई चक्कर सिर्फ इस मामले में विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप के लिए लगाए हैं। सूत्रों के अनुसार सशस्त्र सीमा बल के हत्थे चढ़े दो चीनी युवक और एक महिला से पूछताछ के दौरान चीनी दुभाषिया का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, चीनी प्रशासन को यह कहा जा चुका है देश में पूरी पारदर्शिता से देश का कानून अपना काम कर रहा है।
एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि बहराइच जिले में ही तीनों को न्यायिक रिमांड पर लिया गया था और अभी जासूसी के सभी तीनों आरोपियों को हिरासत में ही रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले में नेपाली विदेश विभाग से भी संपर्क किया है ताकि इन तीनों के बारे में वहां से भी पूरा विवरण मिले।
चीनी खेमे की चिंता यही है कि लिऊ जिंग, यू डांगली और यांग लिऊ नाम के तीनों चीनियों के बारे में नेपाल ने भी अगर नकारात्मक राय जता दी तो भारत के पास केस मजबूत हो जाएगा। विदेश मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि तीनों में से एक ने गुड़गांव स्थित किसी चीनी कंपनी में काम किया था और उसके पास भारतीय पैन कार्ड मिला है। चीनी खेमे की सफाई है कि भारतीय सीमा के पास नेपाल में फोन टॉवर लगाने के मकसद से तीनों वहां काम कर रहे थे।


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