हिमाचल में रहने वाले विस्थापित तिब्बती सरकार के पर्यटन राजस्व पर डाका डाल रहे हैं। तिब्बती विदेशी से आने वाले पर्यटकों को स्थानीय होटलों या गेस्ट हाउस के बजाए अपने अपंजीकृत तिब्बती ठिकाने में ठहर कर हिमाचली लोगों और सरकार को चूना लगा रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले तिब्बती बिना पंजीकरण के गेस्ट हाउस व रेस्टोरेंट चला रहे हैं। हालांकि पर्यटन विभाग की छापेमारी के बाद कुछ ने अपने गेस्ट हाउस व रेस्टोरेंट का पंजीकरण करवाया है लेकिन अब भी ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने इसे जरूरी नहीं समझा। पर्यटन विभाग की नजरों से बचने के लिए गेस्ट हाउस के बाहर बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। निकटवर्ती बौद्ध मठों में किसी विदेशी या दल के पहुंचने पर उनसे संपर्क कर उन्हें ठहराया जाता है। कुछ स्थानों पर बौद्ध मठों के निकट सुविधा संपन्न भवन चांदी कूट रहे हैं। इससे सरकार को राजस्व तो पंजीकृत होटल व गेस्ट हाउस मालिकों को आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। शिकायतें मिलने पर पर्यटन विभाग ने कुछ वर्ष पहले इन अवैध गेस्ट हाउसों का चालान भी किया। उसके बाद कुछ ने पंजीकरण करवाया। हां, दबिश से बचने के लिए बोर्ड हटा दिए गए हैं। मंडलीय पर्यटन विकास अधिकारी आरएस राणा कहते हैं, गैर पंजीकृत गेस्ट हाउस व रेस्तरां के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है, चालान भी किए गए है। समस्या यह है कि अवैध रूप से चल रहे गेस्ट हाउस के बाहर बोर्ड नहीं है। फिर भी ऐसे गेस्ट हाउस की जानकारी जुटाई जा रही है। 346 होटल व गेस्ट हाउस ही पंजीकृत : तिब्बतियों के गढ़ कांगड़ा में 346 होटल व गेस्ट हाउस पंजीकृत हैं। इनमें मैक्लोडगंज में 98, धर्मशाला में 60 होटल व गेस्ट हाउस हैं। सिद्धबाड़ी में एक भी होटल या गेस्ट हाउस पंजीकृत नहीं है। बीड़ में सात होटल व गेस्ट हाउस पर्यटन विभाग के पंजीकृत है। तिब्बती बहुल क्षेत्र भट्टू में न तो कोई गेस्ट हाउस और न ही कोई होटल विभाग के पास पंजीकृत है। पंजीकरण की प्रक्रिया : कोई भी होटल या गेस्ट हाउस तीन वर्ष के लिए पंजीकृत होता है। शुरू में सौ से पांच सौ रुपये तक की फीस लेने के बाद कमरों के हिसाब से लग्जरी टैक्स तय होता है। पर्यटक जहां भी पैसे देकर ठहर रहा हो उसे होटल या गेस्ट हाउस की श्रेणी में लाया जाता है। नुकसान की वजह : गैर पंजीकृत गेस्ट हाउसों में विदेशियों के ठहरने से सरकार को लग्जरी टैक्स समेत कई करों का नुकसान होता है। कितने पर्यटक आए, इसका आंकड़ा नहीं मिल पाता। कोई भी अप्रिय घटना होने पर पुलिस को परेशानी होती है। पर्यटक को हिमाचल व भारत की एकपक्षीय जानकारी ही मिल पाती है।
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