Friday, February 4, 2011

मिस्र पर सेना की छाया


मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के दिन यकीनन लद गए हैं और उनका गद्दी छोड़ना अब महज दिनों की बात रह गई है। वैसे भी मिस्र के अवाम ने उन्हें शुक्रवार की डेडलाइन दी है और मुबारक के इस वादे को दो टूक शब्दों में ठुकरा दिया है जिसमें उन्होंने सितम्बर महीने तक सत्ता छोड़ देने की बात कही थी। तीस वर्षो से अधिक समय से देश की सत्ता को अकेले हाथों संभाल रहे मुबारक की तमाम पेशकश आंदोलनकारियों ने ठुकरा दी है और अमेरिका सहित तमाम पश्चिमी देशों ने भी उनका साथ छोड़ दिया है। चारो ओर से निराश मुबारक के समर्थक हताशा में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी कर रहे हैं लेकिन मौत का डर भी मुबारक विरोधियों के हौसले को तोड़ने में नाकाम दिख रहा है। लेकिन, सेना जो कल तक विरोधियों के प्रदर्शनों को खामोशी से देख रही थी और उनके खिलाफ बल प्रयोग से इंकार कर रही थी, अब सख्ती के मूड में आती दिख रही है। सेना ने आंदोलनकारियों से कहा है कि उनकी बातें सुन ली गईं हैं और अब उन्हें वापस लौट जाना चाहिए। लेकिन, मुबारक को घुटनोें पर लाने वाले आंदोलनकारी इसके लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में अगर सेना की कार्रवाई शुरू हो गई तो आश्र्चय नहीं कि मिस्र की गलियां लहू से नहा उठें। अगर ऐसा हुआ तो इसका सीधा फायदा मिस्र के प्रतिबंधित संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड को जाएगा और इस सेक्यूलर देश पर भी जेहादी अतिवाद की छाया पड़ने लगेगी। जाहिर है कि इसके लिए न तो अमेरिका तैयार है और न मिस्र की सेना। वहां अगर इस्लामिस्ट हावी हो गये तो अमेरिका की मध्य-पूर्व नीति और इस्रइल-अरब संबंध सीधे आग की भेंट चढ़ जाएंगे। यही कारण था कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मुबारक से सीधे कह दिया है कि वे बिना समय गवाएं गद्दी छोड़ दें और जनभावना के अनुरूप व्यवस्था बनने दें। लेकिन, मुबारक ने किया ठीक इसके उलटा। अब खूनी झड़पों के शुरू हो जाने के बाद सेना की मजबूरी है कि वह हालात को तेजी से अपने कब्जे में ले आए। ऐसे में वही होगा जो मिस्र में आज तक होता आया है। पचास के शुरुआती दशक में इंग्लैंड समर्थित मिस्र के बादशाह को सेना ने अपदस्थ किया था और तब से अब तक वहां राष्ट्रपति पद पर चार लोग बैठे हैं और सभी सेना से आए हैं। ऐसे में आश्र्चय नहीं कि वर्तमान सेनाध्यक्ष सामी इनान देश के अगले राष्ट्रपति बन जाएं। मुबारक खुद पचहत्तर के दशक में वायुसेना प्रमुख थे जब तत्कालीन राष्ट्रपति अनवर सादात ने उन्हें उप राष्ट्रपति बनाया था। आम जनता के अलावा मुस्लिम ब्रदरहुड का समर्थन भी इनान को हासिल करने में दिक्कत नहीं होगी। वैसे भी मुबारक ने देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को पनपने नहीं दिया जिस कारण आज आंदोलन मुस्लिम अतिवादियों के हाथ जाने का खतरा पैदा हो गया है। इनानी के राष्ट्रपति बनने से न केवल अमेरिका बल्कि इस्रइल भी चैन की सांस लेता दिखेगा।

2 comments:

  1. मिस्र में लोकतान्त्रिक सरकार बने और जल्द से जल्द शांति स्थापित हो

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  2. आदरणीय,

    आज हम जिन हालातों में जी रहे हैं, उनमें किसी भी जनहित या राष्ट्रहित या मानव उत्थान से जुड़े मुद्दे पर या मानवीय संवेदना तथा सरोकारों के बारे में सार्वजनिक मंच पर लिखना, बात करना या सामग्री प्रस्तुत या प्रकाशित करना ही अपने आप में बड़ा और उल्लेखनीय कार्य है|

    ऐसे में हर संवेदनशील व्यक्ति का अनिवार्य दायित्व बनता है कि नेक कार्यों और नेक लोगों को सहमर्थन एवं प्रोत्साहन दिया जाये|

    आशा है कि आप उत्तरोत्तर अपने सकारात्मक प्रयास जारी रहेंगे|

    शुभकामनाओं सहित!

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’
    सम्पादक (जयपुर से प्रकाशित हिन्दी पाक्षिक समाचार-पत्र ‘प्रेसपालिका’) एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    (देश के सत्रह राज्यों में सेवारत और 1994 से दिल्ली से पंजीबद्ध राष्ट्रीय संगठन, जिसमें 4650 से अधिक आजीवन कार्यकर्ता सेवारत हैं)
    फोन : 0141-2222225 (सायं सात से आठ बजे के बीच)
    मोबाइल : 098285-02666

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