7वें करमापा के प्रवक्ता की ओर से देर शाम जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि करमापा और उनके प्रशासन पर लगाए जा रहे आरोप सर्वथा निराधार हैं। विज्ञप्ति के अनुसार, हम चीन सरकार के साथ किसी भी प्रकार संबंध का पूरी तरह खंडन करते हैं। करमापा का भारत जैसे महान देश के लोगों के प्रति अपार स्नेह है जहां वह अर्से से अपने धर्म का निर्वहन कर रहे हैं। विज्ञप्ति के अनुसार करमापा के अनुयायी कई देशों में हैं और उनसे मिलने वाले दान-चढ़ावे से हम संप्रदाय की ओर जनसेवा के कामों को करने के योग्य होते हैं जिनका लाभ देश विदेश के हजारों लोगों को होता है। विश्व भर के बौद्धमठों में दान दिये जाने में कुछ भी आश्चर्यजनक, नया या अनियमितताओं से भरा नहीं है। पुलिस जिस धन की जांच कर रही है वह करमापा के उद्देश्यों की पूर्ति में मदद करने के लिए दिया गया दान है। चीनी मुद्रा के बारे में विज्ञप्ति में कहा गया है, करमापा के तिब्बत में कई अनुयायी हैं जो चीनी मुद्रा में ही चढ़ावा देते हैं। विश्वभर में हमारा लेनदेन ईमानदार, पारदर्शी है क्योंकि इससे विपरीत कुछ भी होना बुद्ध के सिद्धांतों के खिलाफ होगा जिसे हम जी रहे हैं। विज्ञप्ति के अनुसार चूंकि करमापा अस्थायी आवास में रहते हैं इसलिए मांग रही है कि एक बौद्धमठ बने जो उनका स्थाई आवास हो। यह तभी होगा जब भारत सरकार इसकी स्वीकृति देगी। करमापा कार्यालय ने इस संबंध में जमीन खरीदने की योजना के संबंध में भारत सरकार की एजेंसियों को पूरी तरह सूचित रखा है। एक ऐसी ही जमीन का मूल्यांकन किया गया था और उसे भारत सरकार से स्वीकृति भी मिली है। भूखंड खरीदने के संबंध में बातचीत जारी है और इससे भारतीय अधिकारी अवगत हैं। प्रवक्ता के अनुसार, मैं यह पुष्टि कर सकता हूं कि करमापा ने पूछताछ के लिए संबंधित अधिकारियों के लिए स्वयं को उपलब्ध रखा है।
Wednesday, February 2, 2011
चीन सरकार से कोई संबंध नहीं
7वें करमापा के प्रवक्ता की ओर से देर शाम जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि करमापा और उनके प्रशासन पर लगाए जा रहे आरोप सर्वथा निराधार हैं। विज्ञप्ति के अनुसार, हम चीन सरकार के साथ किसी भी प्रकार संबंध का पूरी तरह खंडन करते हैं। करमापा का भारत जैसे महान देश के लोगों के प्रति अपार स्नेह है जहां वह अर्से से अपने धर्म का निर्वहन कर रहे हैं। विज्ञप्ति के अनुसार करमापा के अनुयायी कई देशों में हैं और उनसे मिलने वाले दान-चढ़ावे से हम संप्रदाय की ओर जनसेवा के कामों को करने के योग्य होते हैं जिनका लाभ देश विदेश के हजारों लोगों को होता है। विश्व भर के बौद्धमठों में दान दिये जाने में कुछ भी आश्चर्यजनक, नया या अनियमितताओं से भरा नहीं है। पुलिस जिस धन की जांच कर रही है वह करमापा के उद्देश्यों की पूर्ति में मदद करने के लिए दिया गया दान है। चीनी मुद्रा के बारे में विज्ञप्ति में कहा गया है, करमापा के तिब्बत में कई अनुयायी हैं जो चीनी मुद्रा में ही चढ़ावा देते हैं। विश्वभर में हमारा लेनदेन ईमानदार, पारदर्शी है क्योंकि इससे विपरीत कुछ भी होना बुद्ध के सिद्धांतों के खिलाफ होगा जिसे हम जी रहे हैं। विज्ञप्ति के अनुसार चूंकि करमापा अस्थायी आवास में रहते हैं इसलिए मांग रही है कि एक बौद्धमठ बने जो उनका स्थाई आवास हो। यह तभी होगा जब भारत सरकार इसकी स्वीकृति देगी। करमापा कार्यालय ने इस संबंध में जमीन खरीदने की योजना के संबंध में भारत सरकार की एजेंसियों को पूरी तरह सूचित रखा है। एक ऐसी ही जमीन का मूल्यांकन किया गया था और उसे भारत सरकार से स्वीकृति भी मिली है। भूखंड खरीदने के संबंध में बातचीत जारी है और इससे भारतीय अधिकारी अवगत हैं। प्रवक्ता के अनुसार, मैं यह पुष्टि कर सकता हूं कि करमापा ने पूछताछ के लिए संबंधित अधिकारियों के लिए स्वयं को उपलब्ध रखा है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment