ऑस्ट्रेलिया में विपक्ष ने भारत को यूरेनियम बेचने से इंकार करने पर सत्तारूढ़ लेबर पार्टी की आलोचना की है। गठबंधन की विदेश मामलों की प्रवक्ता जूली बिशप ने लेबर सरकार द्वारा भारत को यूरेनियम की बिक्री न करने पर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, लेबर ने एक बार घोषणा की थी कि जलवायु परिवर्तन हमारे युग का सबसे बड़ा नैतिक, पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौती है। इसके बावजूद उसने भारत को यूरेनियम देने से इंकार कर दिया, जिसकी जरूरत उसे अपने बढ़ते परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए है। तीन दिन की यात्रा पर गए भारतीय विदेशमंत्री एस.एम. कृष्णा ने ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री केविन रड और ऊर्जा, संसाधन और पर्यटन मंत्री मार्टिन फग्र्यूसन से यूरेनियम देने का भारत का पुराना आग्रह दोहराया था। इसे ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने यह कहकर ठुकरा दिया कि वह परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देशों को यूरेनियम नहीं बेचता। यूरेनियम के अलावा अन्य मुद्दों पर भी इन दिनों भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में तनातनी चल रही है। राष्ट्रमंडल खेलों की बात हो या फिर ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों पर हो रहे नस्लीय हमले, सभी पर दोनों देशों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। जानकार मानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया के रुख से भारत को उतना नुकसान नहीं होगा, लेकिन यह स्वयं उसके लिए ठीक नहीं होगा
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