Thursday, January 13, 2011

65 पाकिस्तानी कैदी नहीं जाना चाहते स्वदेश

इसे पाकिस्तान का दुर्भाग्य कहें या भारत पर अवैध आव्रजकों का बढ़ता बोझ लेकिन तिहाड़ में बंद 65 पाकिस्तानी कैदी किसी भी हालत में स्वदेश नहीं लौटना चाहते। आलम यह है कि उन्होंने अपने पासपोर्ट तक जला डाले हैं और पाकिस्तान भेजे जाने पर हाईकोर्ट से स्थगन आदेश भी ले लिया है। लिहाजा, अब इनके भविष्य पर फैसला संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी आयोग को सौंपा गया है। आयोग की तीन सदस्यीय टीम इन कैदियों का इंटरव्यू कर अपनी रिपोर्ट देगी कि इन्हें शरणार्थी का दर्जा देते हुए भारत में ही रहने दिया जाए अथवा नहीं। तिहाड़ में 65 पाकिस्तानी विचाराधीन कैदी (19 महिलाएं एवं 46 पुरुष) बीते कई सालों से बंद हैं। यह सभी दिल्ली में एक धर्मस्थल के दर्शन के लिए भारत में घुसपैठ करके आए थे और फिर वापस नहीं लौटे। इनसे संबद्ध मामलों की सुनवाई भी चार वर्षो से ट्रायल कोर्ट में चल रही है। समस्या यह है कि ये पाकिस्तानी कैदी किसी भी सूरत में अपने वतन वापस नहीं लौटना चाहते। पाकिस्तान भेजने की हर संभावना खत्म करने के लिए उन्होंने अपने पासपोर्ट तक जला डाले हैं। तिहाड़ में रहते हुए जब इन्हें पता चला कि इनको स्वदेश भेजने की बाबत प्रक्रिया चल रही है तो उन्होंने हाईकोर्ट में अर्जी लगाकर स्थगन आदेश ले लिया। अब इनका मामला संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी आयोग को सौंपा गया है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी आयोग की तीन सदस्यीय टीम तिहाड़ में इन सभी पाकिस्तानी कैदियों का इंटरव्यू ले रही है। इनकी पृष्ठभूमि जानने के साथ साथ इस दौरान उन सभी कारणों को भी जानने का प्रयास किया जा रहा है, जिनके चलते यह कैदी पाकिस्तान नहीं जाना चाहते। तिहाड़ के कानून अधिकारी सुनील गुप्ता ने बताया कि सभी कैदियों का इंटरव्यू करने के बाद ही यह तीन सदस्यीय टीम हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट देगी जिसमें संस्तुति की जाएगी इन्हें शरणार्थी का दर्जा देकर भारत में ही रहने दिया जाए अथवा वापस पाकिस्तान भेज दिया जाएगा। गुप्ता ने बताया कि इंटरव्यू शुरू हो चुके हैं और जल्दी ही प्रक्रिया पूरी कर कोर्ट को रिपोर्ट भेज दी जाएगी।

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