Saturday, January 15, 2011

पाकिस्तान वैश्विक आतंकवाद का केंद्र

पाकिस्तान को वैश्विक आतंकवाद का केंद्र बताते हुए एक शीर्ष अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने कहा कि हम अफगानिस्तान में तब तक सफल नहीं हो सकते जब तक कि पाकिस्तान स्थित आतंकियों के सुरक्षित पनाहगाह बंद नहीं हो जाते। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ प्रमुख एडमिरल माइक मुलेन ने बुधवार को कहा, मैं पहले भी कह चुका हूं और दोबारा कहूंगा कि वर्तमान में विश्व में आतंकवाद का केंद्र पाकिस्तान है और इस पर सभी को ध्यान देने की जरूरत है ताकि जितना जल्दी संभव हो सके हम इस खतरे को समाप्त कर सकें। मुलेन ने कहा, निश्चित तौर पर यह गंभीर सवाल है कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को कैसे बंद किया जाय। इन ठिकानों को बंद किए बिना हम अफगानिस्तान में सफल नहीं हो सकते। आतंकी ठिकाने को समाप्त करने को लेकर मुलेन पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल अशफाक कयानी से कई बार बात कर चुके हैं। मुलेन ने कहा कि बात केवल हक्कानी नेटवर्क और अलकायदा की नहीं है, बल्कि अफगान तालिबान और लश्करे तैयबा की भी है। आज सभी एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं, लेकिन दो साल पहले ऐसा नहीं था। मुलेन ने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता कायम करने में पाकिस्तान की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। पंजाब के गवर्नर सलमान तसीर की हत्या और मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के गठबंधन छोड़ने और दोबारा शामिल होने जैसी चुनौतियां पाकिस्तान के सामने हैं। उन्होंने कहा, पाकिस्तान के राजनीतिक हालात पर हम लगातार नजर रखे हुए हैं। जब हम इस क्षेत्र की बात करते हैं तो उसमें केवल पाक-अफगानिस्तान शामिल नहीं होते बल्कि रूस, ईरान और भारत भी हैं। मुलेन ने कहा, मैं समझता हूं कि यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि क्षेत्र में फैले आतंकवाद को जितनी जल्दी हो सके समाप्त करें।
अफगानिस्तान में और खून बहेगा : मुलेन ने कहा कि अफगानिस्तान में इस साल हिंसा और रक्तपात बढ़ जाएगा तथा बड़ी संख्या में लोग हताहत होंगे। उन्होंने कहा कि इसे स्वीकार करना काफी मुश्किल हो सकता है,लेकिन आने वाले महीनों में अधिक हिंसा से निपटने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में अफगानिस्तान के कई हिस्सों में हिंसा फैली हुई थी, लेकिन 2011 में यह स्थिति और बदतर हो जाएगी। मुलेन ने कहा, अभी वहां बहुत-बहुत कुछ करना है। तालिबान से सुलह सहमति, हिंसा छोड़ने और अफगान संविधान को स्वीकार करने में हम लोगों को लंबे समय तक अफगानिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था की मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका, अफगानिस्तान के साथ सामरिक भागीदारी जारी रखेगा। यह केवल सैन्य भागीदारी होगी, लेकिन यह आपसी मित्रता पर आधारित होगी। अफगानिस्तान से वर्ष 2011 की जुलाई से अमेरिकी सैनिकों की वापसी शुरू हो जाएगी।
चीन की सैन्य क्षमताएं अमेरिका केंद्रित : चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ के अमेरिकी दौरे से ठीक पहले माइक मुलेन ने कहा कि चीन द्वारा विकसित की जा रहीं ज्यादातर आधुनिक सैन्य क्षमताएं अमेरिका पर केंद्रित हैं। उनसे संवाददाताओं ने चीन द्वारा उच्च तकनीक के सैन्य उपकरण, उपग्रह रोधी मिसाइल और पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू जेट विकसित किए जाने के बारे में पूछा था। उन्होंने कहा इस संबंध में नवीनतम खबरों से उन्हें कोई हैरत नहीं हुई है, क्योंकि साम्यवादी देश की सैन्य क्षमता विस्तार पर उनकी नजर थी। मुलेन ने कहा, उस संबंध में यह महत्वपूर्ण है, लेकिन यह चौंकाने वाली बात नहीं है। मैने कई बार कहा है कि चीन च्च्च तकनीक की क्षमताओं में निवेश कर रहा है। चीन वैश्विक स्तर पर वैश्विक प्रभाव के साथ उभरता हुआ एक देश है और उसे अपनी सैन्य क्षमता के विस्तार का अधिकार है। मुलेन ने कहा कि रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स का हाल में ही संपन्न चीन दौरा काफी सफल रहा।
अलकायदा-तालिबान पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश
अमेरिका के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष एडमिरल माइक मुलेन ने कहा है कि उनका देश चाहता है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान सीमा से सटे उत्तरी वजीरिस्तान के कबायली क्षेत्रों में छिपे आतंकवादी संगठन अलकायदा और तालिबान आतंकवादियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करे। मुलेन ने पाकिस्तान के टेलीविजन चैनल जिओ न्यूज को दिए साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पिछले दो वर्षों में स्वात और दक्षिण वजरीरिस्तान एजेंसी में नौ मुख्य कार्रवाइयां की हैं। उन्होंने कहा कि उत्तरी वजीरिस्तान में स्थित आतंकवादी सबसे बड़ा खतरा बने हुए हैं। पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष जनरल अश्फाक परवेज कयानी को उत्तरी वजीरिस्तान क्षेत्र में आतंकवादियों से मिलने वाले खतरे की जानकारी है। उन्होंने कहा कि जनरल कयानी ने इन आतंकवादियों के खिलाफ अभियान शुरू करने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा है कि इस अभियान के समय का फैसला पाकिस्तान द्वारा किया जाएगा। हालांकि अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान यह कार्रवाई जल्द करे। पाक अब तक कहता आया कि वह इन इलाकों में कार्रवाई पर बाहरी दबाव को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

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