Sunday, January 23, 2011

काले धन पर भारत ने लिचटेंस्टीन सरकार से सहयोग मांगा


विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के लिए बढ़ रहे दबाव के बीच भारत ने लिचटेंस्टीन सरकार से सहयोग मांगा है। भारत ने इस यूरोपीय देश की सरकार से उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई में मदद करने को कहा है जिन्होंने बैंकों में काला धन जमा किया हुआ है। लिचटेंस्टीन सरकार के प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की कि भारत ने एलजीटी बैंक में कुछ भारतीय ग्राहकों के खातों के बारे में प्रशासनिक सहयोग मांगा है। दोनों देशों के बीच किसी तरह की द्विपक्षीय कर संधि नहीं है। ऐसे में इस बात की संभावना नहीं है कि लिचटेंस्टीन सरकार भारत के आग्रह को मानेगी। प्रवक्ता ने कहा, हम मिलकर एक समान उद्देश्य के लिए काम कर रहे हैं जिससे संधि हो सके ओर भविष्य में अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार सूचनाओं का आदान प्रदान किया जा सके। भारत सरकार के ऊपर विदेशी बैंकों में भारतीय द्वारा जमा कराई गई गैरकानूनी संपत्तियों को वापस लाने का जबर्दस्त दबाव है। इसमें से ज्यादातर बैंक स्विट्जरलैंड और लिचटेंस्टीन जैसे अन्य यूरोपीय स्थानों पर हैं। इन देशों में ग्राहकों की जानकारियों को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। पिछले साल भारत सरकार ने कहा था कि उसे जर्मनी की सरकार से कुछ ऐसे भारतीयों के बारे में जानकारी मिली है जिनके एलजीटी बैंक में गोपनीय खाते हैं। आयकर विभाग ने इन लोगों और इकाइयों को कर चोरी का नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। जब्त किया जाए स्विस बैंक का धन : वामपंथी पार्टियों ने सरकार से कहा कि स्विस बैंकों में जमा काले धन को वह जब्त करे और खाताधारकों के नाम को सार्वजनिक करे। पार्टी नेता सीताराम येचुरी ने कहा, सरकार को न केवल इन खातों की विस्तृत जानकारी प्राप्त करनी चाहिए, बल्कि खाताधारकों के नाम को सार्वजनिक भी करना चाहिए और सामाजिक परियोजनाओं में निवेश के लिए काले धन को वापस देश में लाना चाहिए। समस्या हैं गुप्त खाते : यूरोपीय यूनियन स्विट्जरलैंड के बैंक स्थित गुप्त खाते केवल भारत ही नहीं, बल्कि यूरोपीय देशों के बीच भी एक चिंता का विषय है। भारत में यूरोपीय यूनियन की राजदूत डैनियल समादा ने शुक्रवार को कहा कि हम इस मुद्दे पर कई बार स्विट्जरलैंड से बात कर चुके हैं, लेकिन हर बार उनके नियम आड़े आ जाते हैं। स्विट्जरलैंड के अलावा आइलैंड और लिचटेंस्टीन में भी वह यही समस्या देखती हैं।


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