Friday, January 7, 2011

पाक की बढ़ती ताकत

भारत-पाक सैन्य संतुलन पर लेखक की टिप्पणी
भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण की धीमी प्रक्रिया की तुलना में पाकिस्तान की सैन्य आधुनिकीकरण की योजनाएं तेजी से चल रही हैं और सैन्य शक्ति में भारत-पाकिस्तान के बीच की दूरी तेजी से कम हो रही है। कुछ समय पूर्व भारतीय सेना के एक अध्ययन इंडिया पाकिस्तान कंबैट रेशियोज 2002-12 में यह तथ्य सामने आया था कि पाकिस्तान व भारत के सैन्य संतुलन का अनुपात 1:1.3 रह गया है। बीते दिसंबर माह के प्रथम सप्ताह में पाकिस्तान को अमेरिका से दो उन्नत एफ-16 लड़ाकू विमान प्राप्त हुए हैं। इससे पहले मई 2010 में तीन, जून 2010 में चार व अक्टूबर 2001 में तीन एफ-16 विमान प्राप्त हुए थे। छह विमान और मिलने वाले हैं। पाकिस्तान को यह सैन्य साजोसामान अमेरिका को आंतकवाद के खिलाफ सहयोग के नाम पर मिल रहा है। पाक को लेजर गाइडेड बम किट, अमेरिका निर्मित 12 टोही ड्रोन विमान एवं उपकरण भी मिल रहे हैं। इनमें ऐसे उपकरण हैं जो 1000 पारम्परिक बमों को स्मार्ट बमों में तब्दील कर देंगे। अमेरिकी वायु सेना के प्रवक्ता जेफ्री ग्लेन के मुताबिक पाकिस्तान को 500 पौंड के पारंपरिक बमों को स्मार्ट बमों में तब्दील करने वाली 700 किट तथा 2000 पौंड के बमों को स्मार्ट बम में बदलने वाली 300 किट प्राप्त होंगी। ये बम शत्रु के लक्ष्यों पर सटीक हमला करते हैं। पाकिस्तान को हथियारों की इस नई खेप से वित्तीय वर्ष 2011 में अमेरिकी सैन्य मदद 1.2 अरब डॉलर पहंुच जाएगी। वर्ष 2010 में यह मदद 70 करोड़ डॉलर है। इससे पहले वर्ष 2009 में पाकिस्तान को अमेरिका ने 7.5 अबर डॉलर की मदद की थी। यह सारी मदद उसे आतंकवाद के खिलाफ सहयोग के नाम पर दी जा रही है, लेकिन यह सर्वविदित है कि पाकिस्तान अमेरिकी मदद का उपयोग भारत के खिलाफ सैन्य तैयारियों में करता है। इससे पहले अमेरिका ने पाकिस्तान को अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर, नाइट विजन चश्में और दूसरे साजोसामान देने की घोषणा की थी। पाकिस्तान ने अपनी हवाई क्षमता में इजाफा करने के उद्देश्य से नवंबर, 2009 में चीन से जे-10 श्रेणी के 36 उन्नत लड़ाकू जेट विमान खरीदने का समझौता किया था। पाक, चीन के साथ मिलकर जेएफ-17 लड़ाकू विमान बना रहा है। इनका उत्पादन वर्ष 2009 में ही शुरू हो गया था। अगले चार वषरें में पाकिस्तान 250 जेएफ-17 विमान तैयार करेगा। चीन पाकिस्तान को पिछले तीन दशक से विमान आपूर्ति कर रहा है। पाकिस्तान वायु सेना ने एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल एयरक्राफ्ट (अवाक्स) तकनीक से संपन्न पहला विमान दिसंबर 2009 को प्राप्त किया था। स्वीडन से पाकिस्तान ऐसे कुल तीन विमान खरीद रहा है। इन विमानों से पाकिस्तानी वायु सेना अपनी सीमा में प्रवेश करने वाले सभी तरह के विमानों का पता लगा सकेगी। स्वीडन के स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की सालाना रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि पाकिस्तान के पास 60 वॉरहेड्स हैं और बहुत ही कम समय में वह 100 परमाणु हथियार तैयार कर सकता है जबकि भारत के पास 60 से 70 वॉरहेड्स है। इस तरह पाकिस्तान परमाणु हथियारों के मामले में बढ़त हासिल कर चुका है। अपनी नौसेना की ताकत बढ़ाने के किए पाकिस्तान ने अमेरिका से एक और चीन से भी चार युद्धपोत खरीदे हैं। इन सबके अलावा पाकिस्तान अमेरिका से छह अत्याधुनिक किस्म के परिवहन विमान सी-130 ई खरीद रहा है। थल सेना की ताकत बढ़ाने के लिए वह अमेरिका से सेल्फ प्रोपेल्ड होवित्जर तोपों व एंटी टैंक मिसाइलों की खरीदारी कर रहा है। पाकिस्तान की थल, जल एवं नभ सेनाओं की आधुनिकीकरण प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इसके साथ ही वह अपनी एटमी ताकत की बढ़ोतरी में लगा हुआ है। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में उसका सैन्य संतुलन भारत के बराबर होगा। (लेखक सैन्य मामलों के जानकार हैं)
 

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