अब इसे आर्थिक मंदी के चलते अमेरिका का घटता वर्चस्व कहें या चीन की बढ़ती ताकत। वजह जो भी हो आजकल हर जगह चीन ही चीन नजर आ रहा है। इस सप्ताह दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति का दर्जा पा चुके हू जिन ताओ की अमेरिका यात्रा की ही खबरें छाई रहीं। टीवी चैनल से लेकर समाचार पत्रों में साइनो-यूएस संबंधों की ही बात हो रही है। इंटरनेशनल मीडिया ने भी चीनी अर्थव्यवस्था में हो रहे तेज इजाफे के साथ-साथ चीन की बढ़ती राजनीतिक शक्ति को प्रमुखता से जगह दी है।
भले ही मानवाधिकार व अन्य संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद बरकरार हों मगर चीन इसे अमेरिका-चीन संबंधों में नए अध्याय के रूप में देख रहा है। अमेरिका के टाइम्स स्क्वेयर पर स्क्रीन में चीन के एक विज्ञापन को जगह मिलने को चीनी समाचार पत्रों ने अपनी हेडलाइन बनाया है। दोनों देशों के बीच हुई बिजनेस डील से भी चीनी मीडिया चहका हुआ है। पश्चिमी दुनिया भी चीन का लोहा मानने लगी है, पिछले साल चीन की जीडीपी 10 फीसदी से ऊपर रही, इसे भी काफी अहमियत दी जा रही है।
सत्तर के दशक तक दूसरे देशों के लिए व्यापारिक दरवाजे बंद रखने वाला चीन आज हर किसी का स्वागत करने को तैयार है। दुनिया भी उसे इसी नजरिए से देख रही है।
ऑनलाइन शॉपिंग
चीन में ऑनलाइन शॉपिंग लोगों की खरीदारी का प्रमुख जरिया बन गयी है। पिछले साल ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों की संख्या 50 फीसदी बढ़ गई है। यहां बता दें कि चीन में 457 मिलियन इंटरनेट यूजर्स हैं। वर्ष 1997 के बाद इंटरनेट की दुनिया में चीन ने लंबी छलांग लगाई है।
चाइना इंटरनेट नेटवर्क इनफार्मेशन सेंटर के मुताबिक चीन में ई-कामर्स सबसे तेज ऑनलाइन एक्टिविटी बन गई है। जहां तक ऑनलाइन-शॉपिंग मार्केट का सवाल है तो इसमें 370 प्रतिशत का वार्षिक इजाफा दर्ज किया गया है, जो कि 78.79 अरब डॉलर पहुंच गया है। 520 अरब युआन। इंटरनेट पर सबसे अधिक खरीददारी का क्रेज इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों व गारमेंट सेक्टर में देखने में आया है। 2008 में आर्थिक मंदी व ई-मार्केट में आए बूम के चलते कई कंपनियों ने अपना बिजनेस ऑनलाइन में शिफ्ट कर दिया।
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