विभिन्न मुद्दों पर अमेरिका की अहमियत को देखते हुए भारत सरकार और भारत की विभिन्न इकाइयों ने पिछले साल अमेरिकी सत्ता के गलियारों में अपनी आवाज कारगर तरीके पहुंचाने के लिए लॉबिंग पर संयुक्त रूप से 15 लाख डॉलर खर्च किए। बहरहाल, सरकार और घरेलू कंपनियों द्वारा 2010 में अमेरिका में लॉबिंग पर खर्च की गई राशि इससे पिछले साल के मुकाबले काफी कम है। वर्ष 2009 में लॉबिंग पर सरकार और कंपनियों ने 22 लाख डॉलर खर्च किए थे। कारपोरेट जनसंपर्क से जुड़ी नीरा राडिया के राजनेताओं, उद्योगपतियों, मीडया और अन्य क्षेत्र के लोगों से बातचीत के टेप जारी होने से हाल के दिनों में लॉबिंग का मुद्दा गर्म रहा है। इस विवाद के कारण भारत सरकार जनसपंर्क गतिविधियों के लिए कायदे-कानून बनाने पर विचार कर रही है। इससे लॉबिंग पर पिछले साल 2010 में कुल मिलाकर 15. 7 लाख डालर खर्च किए गए, जबकि 2009 में यह राशि 22 लाख डॉलर थी। विशेषज्ञों का कहना है कि जनसंर्पक खर्चो में कमी सरकार और कंपनियों द्वारा लागत में कटौती के उपायों को प्रतिबिंबित करती है। रिपोर्ट के मुताबिक अकेले भारत सरकार ने 2010 के दौरान लाबिंग पर 420,000 डालर भुगतान किया। यह राशि जनसंपर्क कंपनी बारबोर ग्रिफिथ एंड रोजर्स (बजीआर) को दी गई। इसके अलावा भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में लॉबिंग (नेताओं और मीडिया में अपनी बात पहुंचाने) के लिए कुल मिला कर जनसम्पर्क कंपनियों को 11,50,000 डॉलर का भुगतान किया। बहरहाल, सरकार और निजी कंपनियां अमेरिकी सरकार और सांसदों के समक्ष अपने मामलों को आगे बढ़ाने के लिए आधिकारिक रूप से पिछले कई साल से अमेरिका में लॉबिंग पर खर्च करती रही हैं। अमेरिका में लॉबिंग कानूनी मामला है और इससे जुड़ी कंपनियों को सीनेट के समक्ष तिमाही आधार पर रिपोर्ट देनी होती है। रिपोर्ट में ग्राहकों और उनसे लिए गए शुल्क के बारे में विस्तृत जानकारी होती है। सीनेट के समक्ष प्रस्तुत दिसंबर को समाप्त तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार और कंपनियां ने अमेरिकी सांसदों के समक्ष अपने मामलों को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त रूप से जनसंपर्क पर 4,00,000 डॉलर खर्च किए। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार ने जिन मामलों में सीनेट लॉबिंग की, वे सभी द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मामले थे। दूसरी ओर निजी कंपनियों ने संबंधित क्षेत्र में कारोबार के लिए लॉबिंग की। लॉबिंग से जुड़ी निजी क्षेत्र की कंपनियों में मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल है। कंपनी ने कुल 7,60,000 डालर लॉबिंग से जुड़ी कंपनी बजीआर को दिए। लॉबिंग में जुड़ी अन्य कंपनियों में साफ्टवेयर कंपनियों का संगठन नास्काम, कार्पेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्द्धन परिषद और गुजरात फ्लुरोकेमिकल्स शामिल हैं। जहां सरकार ने पिछले साल लॉबिंग पर 420,000 डॉलर खर्च किए। दूसरी ओर 2009 में 700,000 डॉलर खर्च किए गए थे।
Wednesday, January 26, 2011
अमेरिका में लॉबिंग पर भारत ने खर्च किए 15 लाख डॉलर
विभिन्न मुद्दों पर अमेरिका की अहमियत को देखते हुए भारत सरकार और भारत की विभिन्न इकाइयों ने पिछले साल अमेरिकी सत्ता के गलियारों में अपनी आवाज कारगर तरीके पहुंचाने के लिए लॉबिंग पर संयुक्त रूप से 15 लाख डॉलर खर्च किए। बहरहाल, सरकार और घरेलू कंपनियों द्वारा 2010 में अमेरिका में लॉबिंग पर खर्च की गई राशि इससे पिछले साल के मुकाबले काफी कम है। वर्ष 2009 में लॉबिंग पर सरकार और कंपनियों ने 22 लाख डॉलर खर्च किए थे। कारपोरेट जनसंपर्क से जुड़ी नीरा राडिया के राजनेताओं, उद्योगपतियों, मीडया और अन्य क्षेत्र के लोगों से बातचीत के टेप जारी होने से हाल के दिनों में लॉबिंग का मुद्दा गर्म रहा है। इस विवाद के कारण भारत सरकार जनसपंर्क गतिविधियों के लिए कायदे-कानून बनाने पर विचार कर रही है। इससे लॉबिंग पर पिछले साल 2010 में कुल मिलाकर 15. 7 लाख डालर खर्च किए गए, जबकि 2009 में यह राशि 22 लाख डॉलर थी। विशेषज्ञों का कहना है कि जनसंर्पक खर्चो में कमी सरकार और कंपनियों द्वारा लागत में कटौती के उपायों को प्रतिबिंबित करती है। रिपोर्ट के मुताबिक अकेले भारत सरकार ने 2010 के दौरान लाबिंग पर 420,000 डालर भुगतान किया। यह राशि जनसंपर्क कंपनी बारबोर ग्रिफिथ एंड रोजर्स (बजीआर) को दी गई। इसके अलावा भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में लॉबिंग (नेताओं और मीडिया में अपनी बात पहुंचाने) के लिए कुल मिला कर जनसम्पर्क कंपनियों को 11,50,000 डॉलर का भुगतान किया। बहरहाल, सरकार और निजी कंपनियां अमेरिकी सरकार और सांसदों के समक्ष अपने मामलों को आगे बढ़ाने के लिए आधिकारिक रूप से पिछले कई साल से अमेरिका में लॉबिंग पर खर्च करती रही हैं। अमेरिका में लॉबिंग कानूनी मामला है और इससे जुड़ी कंपनियों को सीनेट के समक्ष तिमाही आधार पर रिपोर्ट देनी होती है। रिपोर्ट में ग्राहकों और उनसे लिए गए शुल्क के बारे में विस्तृत जानकारी होती है। सीनेट के समक्ष प्रस्तुत दिसंबर को समाप्त तिमाही की रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार और कंपनियां ने अमेरिकी सांसदों के समक्ष अपने मामलों को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त रूप से जनसंपर्क पर 4,00,000 डॉलर खर्च किए। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार ने जिन मामलों में सीनेट लॉबिंग की, वे सभी द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मामले थे। दूसरी ओर निजी कंपनियों ने संबंधित क्षेत्र में कारोबार के लिए लॉबिंग की। लॉबिंग से जुड़ी निजी क्षेत्र की कंपनियों में मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल है। कंपनी ने कुल 7,60,000 डालर लॉबिंग से जुड़ी कंपनी बजीआर को दिए। लॉबिंग में जुड़ी अन्य कंपनियों में साफ्टवेयर कंपनियों का संगठन नास्काम, कार्पेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्द्धन परिषद और गुजरात फ्लुरोकेमिकल्स शामिल हैं। जहां सरकार ने पिछले साल लॉबिंग पर 420,000 डॉलर खर्च किए। दूसरी ओर 2009 में 700,000 डॉलर खर्च किए गए थे।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment