Friday, January 21, 2011

वीजा के सहारे बीती विस्थापितों की जवानी

राधिका का परिवार 18 साल से अमृतसर में रह रहा है। उनकी जवानी वीजा के सहारे बीत गई। न उनके पास राशनकार्ड है, न वोटर कार्ड और न ही अपने नाम का बिजली कनेक्शन। बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए दर-दर ठोकरें खाती रही। बड़ी मशक्कत के बाद बच्चों को तालीम दिला सकी। अभी भी उन्हें बच्चों को दो जून रोटी खिलाने से ज्यादा चिंता वीजा की अवधि बढ़ाने की होती है। उन्हें वीजा बढ़ाने के लिए पाक जाना पड़ता है। कभी एक साल बाद तो कभी छह महीने बाद। वह कहती हैं कि मेरी तो जिंदगी भारत-पाक की सीमाओं ने बांट दी है। पाकिस्तान से उजड़ने के बाद अमृतसर में आ बसे लेकिन अभी भी मुझे भारत की बेटी बनने का अधिकार नहीं मिला है। मैने भी ठान लिया है कि चाहे दम निकल जाए लेकिन भारत नहीं छोड़ सकती। राधिका देवी की तरह अमृतसर के विभिन्न क्षेत्रों में पाकिस्तान से आकर बसे हिंदू व सिखों के तकरीबन सौ परिवार रह रहे हैं, जिन्हें भारत की राष्ट्रीयता नहीं मिली है। रहते तो वह भारत में हैं, लेकिन उनकी आइडेंटिटी पाकिस्तान की है। शीतल कुमारी पेशावर में पढ़ती थी। पाकिस्तान से 12वीं की। पाक में हालात बदतर हुए तो परिवार के साथ वह भारत आ गई। अमृतसर में रह रही हैं। शीतल पढ़ना चाहती हैं लेकिन उनके पास जो सर्टीफिकेट हैं वह यहां मान्य नहीं है। अब उसे पढ़ना है तो शुरू से पढ़ाई करनी होगी। निरंजनजीत कौर कहती हैं कि पाकिस्तान में सातवीं तक पढ़ाई करने के बाद वह भारत आकर रहने लगी। यहां पर उसे दो साल तक इंतजार करना पड़ा तब उनका नाम पांचवीं कक्षा में लिखा गया। जसविंदर कौर पाक से आकर अब भारत में रह रही हैं। वह बताती हैं कि उसे भी भारत में पढ़ाई करने के लिए दो साल इंतजार करना पड़ा। दोबारा उसका नाम सातवीं कक्षा में लिखा गया जबकि वह नौवीं कक्षा पढ़ कर आई थी। पाकिस्तान से आकर अमृतसर में रह रहे रूप चंद ने कहा, कई ऐसे परिवार हैं जिन्हें 15 से 20 साल रहते हुए हो गया है लेकिन उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली है। पाकिस्तान से आकर अमृतसर रहने वाली लड़कियों ने कहा, पाकिस्तान में रहना हिंदू व सिख लड़कियों के लिए दुश्वार हो गया है, हम भूखे पेट सो लेंगे लेकिन कभी पाकिस्तान नहीं जाएंगे। गत दिनों पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए हिंदू व सिख परिवारों ने अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर काहन सिंह पन्नू से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा। विस्थापितों का कहना है कि भारत सरकार ने 25 फरवरी 2009 को अध्यादेश जारी किया था कि पाक से विस्थापित होकर आये जो परिवार सात साल से भारत में रह रहे है। उसके आचरण और दस्तावेज की जांच के बाद उसे भारत की नागरिकता दे दी जाएगी। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने भी आदेश जारी किए थे कि 2009 से पहले भारत में रहने वालों को नागरिकता दे दी जाए तो फिर दिक्कत क्या है।

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