छह दिसम्बर 1950 को पं. जवाहरहलाल नेहरू ने नेपाल के साथ भारतीय दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए संसद में कहा था, ‘यहां तक कि एक बच्चा भी जानता है कि भारत से गुजरे बिना कोई नेपाल नहीं पहुंच सकता। इसलिए किसी अन्य देश के साथ नेपाल के उतने घनिष्ठ सम्बंध नहीं हो सकते जितने हमारे साथ। हम चाहते हैं कि प्रत्येक राष्ट्र भारत व नेपाल के बीच स्थापित घनिष्ठ भौगोलिक और सांस्कृतिक सम्बंधों को स्वीकारे।’ लेकिन अब नेपाल के साथ भारत की घनिष्ठता उतनी नहीं रह गयी जिसकी अपेक्षा नेहरूजी कर रहे थे। जब से नेपाली राजनीति पर माओवादी वर्चस्व स्थापित हुआ है, तब से नेपाल पर चीनी रणनीति में तेजी से बदलाव आ रहा है। चीन की मंशा माओवादियों को ‘नये नेपाल’ के निर्माण के लिए उकसाने की ही नहीं बल्कि नेपाल के राजनीतिज्ञों, पत्रकारों और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को प्रशिक्षित कर ‘ट्रैक-2’ नीति पर चलने की है, जिसमें वह बहुत हद तक सफल भी रहा है। नेपाल में जिस तरह लोकतंत्र का प्रहसन बनता जा रहा है, उससे नेपाल की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और बिगड़ेगी। हो सकता है वहां शासनतंत्र असफल हो जाए या प्रजातंत्र ही असफल हो जाए, जिसका सबसे ज्यादा फायदा चीन का होगा। नेपाल धीरे-धीरे उस लक्ष्य से दूर जाता दिख रहा है जिसकी परिकल्पना तीन साल पहले प्रस्तुत की गयी थी। माओवादी अराजकता की ओर लौट रहे हैं। न जाने क्यों लगता है कि नेपाल के माओवादी अपनी गतिविधियों से भारत को चिढ़ा रहे हैं या संदेश दे रहे हैं कि जिस आका की छतछ्राया में वे हैं, उसके रहते उनका कोई बाल बांका नहीं कर सकता। हाल में विदेश सचिव निरुपमा राव की नेपाल यात्रा के दौरान माओवादियों ने कुछ तेवर दिखाये भी। माओवादियों ने 18 जनवरी से पूर्व लड़ाकों का प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है जो 31 जनवरी तक चलेगा। काठमांडू में इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को शुरू करते समय माओवादी पार्टी के प्रमुख प्रचंड ने इसमें हिस्सा ले रहे पांच हजार लोगों से अपील की है कि वे 13 फरवरी से शुरू होने जा रहे जन विद्रोह के लिए तैयार रहें। उल्लेखनीय है कि 1996 में 13 फरवरी के दिन ही जन युद्ध की शुरुआत हुई थी, जिसने माओवादियों को सत्ता के मुहाने तक पहुंचा दिया था। सवाल है कि अब जबकि नेपाल के संविधान का प्रारूप तैयार करने की अवधि चार माह शेष है, तब माओवादी जनविद्रोह की आशंका को हवा क्यों दे रहे हैं? इसका अर्थ यह माना जाए कि माओवादी नेपाल में प्रजातंत्र नहीं बल्कि चीनी किस्म का पीपुल्स गणतंत्र चाहते हैं? नेपाल के कार्यकारी प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने हाल में दावा किया था कि माओवादी विद्रोह की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना था कि मुख्य विपक्षी पार्टी यूनाइटेड कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-माओवादी (यूसीपीएन-एम) लोकतंत्र को पटरी से उतारने के लिए सर्वहारा वर्ग के अधिनायकत्व वाली पण्राली की स्थापना चाहती है। उस समय प्रधानमंत्री ने बताया था कि यूसीपीएन-एम की हाल में सम्पन्न केन्द्रीय समिति की बैठक के दौरान राजनीतिक प्रस्ताव की मंजूरी दी गयी, जिसके जरिए जनता के शासन की स्थापना के लिए विद्रोह की तैयारी की जा रही है क्योंकि माओवादी निश्चय कर चुके हैं कि लोकतंत्र खत्म कर जनता शासन आएगा। 13 फरवरी से पुन: जनविद्रोह की तैयारी माधव कुमार की दावे की पुष्टि करती है। नया प्रधानमंत्री चुनने के लिए संसद ने 16 दौर का मतदान किया लेकिन किसी को अपेक्षित वोट नहीं मिल पाए इसलिए नया प्रधानमंत्री नहीं चुना जा सका। मतलब नेपाल की लोकतांत्रिक व्यवस्था अभी विसनीय स्तर पर नहीं पहुंची है। माओवादी इसी का फायदा उठाना चाहते हैं। हालांकि इस समय माओवादी दल की एकता भी कुछ हद तक दरकती नजर आ रही है क्योंकि शीर्ष माओवादी नेता बाबूराम भट्टराई ने प्रचंड के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनाइटेड कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (सीपीएन- माओवादी) के उपाध्यक्ष भट्टराई ने पार्टी के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का बहिष्कार किया है और राजनीतिक गतिरोध पर पार्टी के रुख को लेकर राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान में हिस्सा नहीं लिया। हो सकता है माओवादी नेतृत्व के बीच आ रही यह खाईं नेपाल के लिए शुभ साबित हो। फिलहाल नेपाल की स्थिति चिंताजनक है। गरीबी और बदहाली नेपाल में माओवादियों के जरिए चीन के लिए मैदान समतल कर रही है, जो भारतीय हितों के प्रतिकूल है। इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेन्स रिसर्च एंड एनालिसिस की पिछले दिनों की रिपोर्ट बताती है कि चीन नेपाल के जरिए भारत तक पहुंचने की रणनीति पर काम कर रहा है। चीन नेपाल में दखलंदाजी कर भारत विरोधी माहौल तैयार करना चाहता है ताकि वि समुदाय को बता सके कि भारत के न केवल चीन और पाकिस्तान बल्कि किसी भी पड़ोसी मुल्क से अच्छे सम्बंध नहीं हैं। वह इस मुहिम को रणनीतिक ढंग से अंजाम दे भी रहा है और माओवादी इसके लिए सबसे बेहतर उपकरण हैं। प्रश्न है कि क्या कोई भारतीय उपकरण नेपाल में भारत के पक्ष में माहौल बनाने में माओवादियों को चित कर पाएगा? फिलहाल इस प्रश्न का सकारात्मक उत्तर नहीं आ पा रहा है।
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