भारतीय नागरिकों के लिए चीन की वीजा नीति को लेकर नई दिल्ली और बीजिंग के बीच टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। भारत की ओर से नत्थी वीजा को लेकर लगातार शिकायत दर्ज कराने और संवेदनशीलता का हवाला देने के बावजूद पड़ोसी मुल्क चीन अपने रुख में तनिक भी ढिलाई नहीं बरत रहा है। उसने भारत के जख्मों को कुरेदते हुए यहां तक कह दिया है कि वह अरुणाचल प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों को वह वीजा नहीं देगा। चीन के इस कदम ने अरुणाचल को लेकर दोनों देशों के बीच चल रही खींचतान को एक बार फिर गरमा दिया है। भारत स्थित चीनी दूतावास के सूत्रों के मुताबिक अरुणाचल के सरकारी कर्मचारियों के लिए अपने वीजा इंकार को चीन ने जायज ठहराया है। साथ ही राज्य के अन्य नागरिकों को नत्थी वीजा की भी वकालत की है। रक्षा मंत्री एके एंटनी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत किसी भी सूरत में अपने नागरिकों के लिए नत्थी वीजा स्वीकार नहीं कर सकता। इस मुद्दे को बीते दिनों भारत आए चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के दौरे में भी भारत ने उठाया था। इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने कई मोर्चे पर बीजिंग के इस रवैये की आलोचना की है। ताजा मामले में अरुणाचल के दो नागरिकों को नत्थी वीजा के चलते इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बुधवार को रोक दिया गया था। इसमें अरुणाचल वेट लिफ्टिंग एसोसिएशन के संयुक्त सचिव अब्राहम के तेची और एक भारोत्तोलक शामिल थे। भारत यह स्पष्ट चुका है कि वह नत्थी वीजा पर किसी भी नागरिक को विदेश यात्रा की इजाजत नहीं देगा।
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