आर्थिक और सैन्य शक्ति के रूप में उभर रहे चीन के सुपर पावर के दावे पर चीनवासियों को ही संदेह है। यही नहीं ब्रिक देशों (ब्राजील, रूस, भारत और चीन) में अपने देश को सर्वाधिक उदीयमान मानने वाले चीनियों की धारणा में भी गिरावट हुई है। यह दावा सरकारी प्रकाशन ग्लोबल टाइम्स के वार्षिक सर्वेक्षण में किया गया है। शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक,राष्ट्रीय गौरव बढ़ने के बावजूद पिछले चार साल के वार्षिक सर्वेक्षण की तुलना में चुनिंदा नागरिकों ने चीन को दुनिया की महाशक्ति माना है। चीन 2010 में अमेरिका के बाद दुनिया की दूसरी आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरा है। महाशक्ति को परिभाषित करने वाले दो बड़े मानदंडों, राजनीति और कूटनीतिक स्तर के बढ़ने के बाद भी सिर्फ 12 प्रतिशत लोग ही चीन को महाशक्ति के रूप में देखते हैं। जबकि 2008 में 14.4 प्रतिशत ने देश को महाशक्ति माना था। सर्वे में केवल 57 प्रतिशत नागरिकों ने चीन को ब्रिक देशों में सर्वाधिक उदीयमान देश माना, जबकि पिछले साल यह दर 67 फीसदी थी। हालांकि 84 प्रतिशत लोगों ने विश्व परिदृश्य में चीन के बेहतर भविष्य की उम्मीद जताई। सर्वे में शामिल एक तिहाई से ज्यादा लोगों ने माना कि व्यापारिक संबंधों में तनाव, मानवाधिकार और धार्मिक जैसे नकारात्मक मुद्दों के बावजूद पिछले साल चीन और यूरोप के रिश्तों में सुधार हुआ।
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