Sunday, January 30, 2011

ट्यूनीसिया-मिस्र से यमन पहुंची तानाशाही विरोधी लहर


ट्यूनीसिया से शुरू हुई तानाशाही विरोधी लहर मिस्र के बाद यमन पहुंच गई है। ट्यूनीसिया और मिस्र के बाशिंदों से प्रेरित होकर गुरुवार को यमन की राजधानी साना में हजारों लोग राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। अब्दुल्ला 1978 से यमन के राष्ट्रपति पद पर काबिज हैं। इससे अरब जगत के सबसे गरीब देश की स्थिरता को खतरा हो गया है जो पहले ही अलकायदा की एक शाखा की सक्रियता से पश्चिमी देशों के लिए चिंता का कारण है। माना जा रहा है कि विश्व भर में तानाशाही के खिलाफ छिड़ी यह जंग अभी और देशों में भी रंग दिखाएगी। उधर, मिस्र में राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक की तानाशाही के खिलाफ पिछले दो दिन में अप्रत्याशित विरोध प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों समेत सैकड़ों प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए गए और कम से कम छह लोग मारे गए। मिस्र में मुबारक के 30 साल के शासन के खिलाफ हजारों लोग नारे लगाते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। काहिरा के पुराने इलाके में बुधवार को हजारों सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया जो तहरीर चौराहे पर फिर से जमा होने का प्रयास कर रहे थे। मंगलवार को इस चौराहे पर 20 हजार से अधिक प्रदर्शनकारी इकट्ठा हो गए थे और वे कई घंटों तक चौराहे पर बैठे रहे। बुधवार तड़के ही उन्हें सुरक्षा बलों ने तितर बितर किया। कई स्थानों पर सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे और रबर की गोलियां चलाईं। प्रदर्शनकारियों ने भी उनपर पथराव किया। मीडिया की खबरों के मुताबिक हिंसा में एक प्रदर्शनकारी एवं एक पुलिसकर्मी मारा गया जिसके साथ ही पिछले दो दिन के दौरान मारे गए लोगों की संख्या छह हो गई। अल अहरम की गुरुवार की खबरों के मुताबिक आठ पत्रकारों समेत सैकड़ों प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए गए हैं। काहिरा में प्रदर्शनकारियों की संख्या तीन हजार के करीब बताई गई। ये लोग पत्रकार मंच के माध्यम से अपना प्रदर्शन कर रहे हैं। हालंाकि पहले दिन के प्रदर्शन के बाद गृहमंत्रालय ने चेतावनी दी थी कि किसी भी तरह का प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अन्य स्थानों से भी प्रदर्शन की खबरें हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुबारक को अमेरिका का निकट सहयोगी बताते हुए उनके शासन को उखाड़ फेंकने की धमकी दी है। उधर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सभी पक्षों से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि हिंसा न भड़कने दें।
दमन पर अमेरिका का कड़ा रुख
मिस्र में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों और सरकार के कथित दमन पर अमेरिका ने इस अफ्रीकी देश और अरब जगत के अपने अन्य सहयोगियों के प्रति रुख कड़ा कर लिया है। वॉशिंगटन की ओर से कहा गया है कि मिस्र की सरकार विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के प्रयास से परहेज करे। अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि मिस्र को लोकतांत्रिक एवं अन्य सुधारों को स्वीकार करना होगा। उन्होंने मुबारक प्रशासन से कहा कि लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की इजाजत मिलनी चाहिए।
ट्विटर पर प्रतिबंध
 इक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर ने बुधवार को इस बात की पुष्टि कर दी कि मिस्र में उसकी सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार विरोधी प्रदर्शनों की जानकारी के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने यह कार्रवाई की है। सरकारी वेबसाइट हरडिक्ट डॉट काम के मुताबिक मिस्र के अधिकारी फेसबुक, यूट्यूब, परसंश डॉट काम पर भी पाबंदी लगा सकते हैं।
ट्यूनीसिया के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के लिए अलर्ट
अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल ने ट्यूनीसिया के फरार राष्ट्रपति जैनुल आबेदीन बेन अली और उनके छह रिश्तेदारों की गिरफ्तारी के लिए अलर्ट जारी किया है। इंटरपोल ने एक बयान जारी कर कहा, ट्यूनीसिया के अधिकारियों के मुताबिक बेन अली और उसके परिवार के कुछ सदस्यों पर चोरी और अवैध तरीके से विदेशी मुद्रा के लेनदेन का आरोप है। इंटरपोल ने वैश्विक स्तर पर यह चेतावनी सभी 188 देशों के लिए जारी की है। गिरफ्तारी वारंट के मुताबिक सभी सदस्य देशों की यह जिम्मेदारी है कि वे बेन अली और उसके रिश्तेदारों की गिरफ्तारी के लिए ट्यूनीशिया को सहायता उपलब्ध कराएं। पिछले दिनों ट्यूनीसिया में हुए दंगों और हिंसा के बाद बेन अली 14 जनवरी को फरार हो गए थे। बेन अली की पत्नी भी वांछितों की सूची में शामिल हैं।



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