Saturday, January 8, 2011

चीन को काबू में रखने के लिए भारत से दोस्ती कर रहा अमेरिका

चीन के राष्ट्रपति की अमेरिकी यात्रा से पहले एक प्रमुख अमेरिकी थिंक टैंक ने कहा है कि वह चीन की बढ़ती ताकत से निपटने के लिए भारत जैसे उभरती शक्तियों से मित्रता कर रहा है। कार्नेगी एंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस थिंक टैंक की अध्यक्ष जेसिका मैथ्यूज ने कहा, अमेरिका ने भारत के साथ साझेदारी को बढ़ावा देना पहले ही शुरू कर दिया था। भारत एक उभरती ताकत है और उसकी चीन के साथ लंबी सीमा है। इसलिए भारत के जरिए चीन को काबू में रखने के लिए अमेरिका भारत के साथ विशेष संबंधों को तरजीह दे रहा है। यद्यपि इस बारे में अमेरिकी नेताओं के बीच कभी खुलकर बात नहीं होती। इससे पहले अमेरिकी समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स ने खबर दी थी कि चीन ने हाल के वर्षो में गुप्त रूप से अपना प्रभाव क्षेत्र मध्य एशिया तक बढ़ा लिया है। चीन के इसी आक्रामक रुख की वजह से उसके पड़ोसी देशों ने खुलकर चिंता जाहिर की है। जेसिका कहती हैं, अमेरिका के लिहाज से यह भी विचारयोग्य बात है कि चीन ने उत्तर कोरिया के उत्तेजक व्यवहार से निपटने में बिल्कुल भी रुचि नहीं दिखाई। जबकि चीन को उत्तर कोरिया का मित्र देश माना जाता है। यह बात उत्तर कोरिया द्वारा दक्षिण कोरियाई पोत को डुबाने और कोरिया प्रायद्वीप में हाल के तनाव के दौरान भी स्पष्ट हो गई। चीन अपने उत्तरदायित्वों को निभाने के लिए तैयार नहीं है। कमजोर होती जा रही करजई की स्थिति अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अफगानिस्तान में तालिबान से मोर्चा ले रही अपनी फौजें इस साल जुलाई से वापस बुलाने की तैयारी में हैं, लेकिन थिंक टैंक कार्नेगी एंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस कहना है कि वहां हालात अब भी नहीं सुधरे हैं। युद्ध प्रभावित इस देश में तालिबान जितना मजबूत हो रहा है, करजई सरकार उतनी ही कमजोर हो रही है। थिंक टैंक की अध्यक्ष जेसिका मैथ्यूज का कहना है, अमेरिका की रणनीति तालिबान को कमजोर करना और अफगान राष्ट्रपति हामिज करजई की सरकार को मजबूत करना है। मगर हो इसका उल्टा रहा है। यह चिंता का विषय है। मैथ्यूज ने कहा, आने वाला परिदृश्य कुछ ऐसा होगा कि अमेरिका अपने आपको युद्ध के बीच में घिरा पाएगा। जबकि उसके सहयोगी देशों की सेनाएं एक-एक कर वापस जा रही होंगी और स्थितियों में सुधार नहीं होगा।

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