Sunday, January 30, 2011

केंद्र को करमापा पर चीनी जासूस होने का संदेह


केंद्र सरकार ने तिब्बती बौद्धों के धर्मगुरू करमापा यूटी. दोरजे पर चीन का एजेंट होने का शक जताया है। आशंका है कि करमापा के जरिए चीन भारत के बौद्ध मठों पर अपना कब्जा करने की कोशिश में था। माना जा रहा है कि एक दिन पहले उनके मठ से बरामद हुई छह करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा भी चीनी प्रशासन की ओर से ही भेजी गई है। करमापा को लेकर यह खुलासा इसलिए बेहद चौंकाने वाला है, क्योंकि तिब्बत के लोग चीन के शोषण के खिलाफ लंबे समय से लड़ते रहे हैं। साथ ही भारत सरकार भी तिब्बतियों को शरण देने के लिए हमेशा चीन की आंखों की किरकिरी बनती रही है। मगर शुक्रवार को गृह मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि करमापा का संबंध चीन प्रशासन से हो सकता है। उनको तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा का उत्तराधिकारी माना जाता है। सूत्र बताते हैं कि इस सिलसिले में जल्दी ही करमापा से पूछताछ की जा सकती है। उनके करीबी सहयोगी रबजबचौंग उर्फ शक्ती लामा को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है। इस धर्मगुरु पर भारतीय खुफिया एजेंसियों को आशंका बहुत समय से थी। इनका कहना है कि करमापा के जरिए भारत के, खास कर सीमावर्ती इलाकों के बौद्ध मठों पर चीन अपना प्रभाव कायम करना चाहता था। इस लिहाज से करमापा लंबे समय से चीन के साथ संबंध बनाए हुए हैं। लद्दाख से लेकर तवांग तक के संवेदनशील इलाकों में बड़ी तादाद में बौद्ध मठ हैं। इनको भारत सरकार काफी तवज्जो देती रही है। पिछले महीने ही गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने तवांग जाकर एक मठ के लिए रोपवे का उद्घाटन किया है। धर्मशाला में इनके मठ में बरामद की गई विदेशी मुद्रा चीन प्रशासन से ही आई है। यहां से चीन, जापान, अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया और थाइलैंड सहित विभिन्न देशों की करोड़ों रुपये मूल्य की मुद्रा बरामद की गई है।


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