नया प्रधानमंत्री चुनने की करीब सात महीने में हुईं 16 नाकाम कोशिशों के बाद नेपाल के सांसद इस प्रक्रिया की नए सिरे से शुरुआत करेंगे। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि आपसी गतिरोध वाले राजनीतिक दल सरकार के गठन के लिए राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित 26 जनवरी की समय सीमा से पहले उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहे हैं। राष्ट्रपति राम बरन यादव ने बहुमत के आधार पर नए प्रधानमंत्री का चुनाव करने की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करने के संसद को निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री पद का चुनाव कराने वाली संसद की कार्य मंत्रणा समिति ने घोषणा की कि दलों को दो फरवरी तक नामांकन दाखिल करने होंगे। इसके बाद तीन फरवरी को नया चुनाव होगा। अगर जरूरी हुआ तो दूसरे और तीसरे दौर का चुनाव पांच तथा छह फरवरी को होगा। तीन मुख्य दलों यूसीपीएन (माओइस्ट) और सत्तारूढ़ दल के दो सहयोगी सीपीएन (यूएमएल) और नेपाली कांग्रेस के बीच बुधवार को हुई अहम बैठक के बाद भी गतिरोध खत्म नहीं हो पाया क्योंकि तीनों दल प्रधानमंत्री पद के लिए आम सहमति वाले उम्मीदवार का चयन करने पर राजी नहीं हो सके। राष्ट्रपति यादव द्वारा आम सहमति वाली सरकार के गठन के लिए तय की गई दूसरी समय सीमा भी खत्म हो गई। माओवादियों ने कहा कि वे अगली गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगे क्योंकि सदन में उनकी संख्या ज्यादा है। माओवादी प्रमुख प्रचंड ने जोर दिया कि उनकी पार्टी को सरकार बनाने का मौका दिया जाना चाहिए क्योंकि पूर्व विद्रोहियों ने अब अपने लड़ाकों को संयुक्त राष्ट्र का मिशन खत्म होने के बाद मुख्य राजनीतिक दलों की विशेष समिति की निगरानी के दायरे में रख दिया है। नेपाल की 601 सदस्ईय संविधान सभा में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को जीत हासिल करने के लिए 50 फीसदी से अधिक सदस्यों का समर्थन मिलना जरूरी है। हालांकि सभा में किसी भी दल को बहुमत हासिल नहीं है और आपसी गतिरोध वाले दल कोई गठबंधन बनाने में विफल रहे हैं। बीती 25 जनवरी को एकराज भंडारी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्ईय संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री का चुनाव करने संबंधी नियमों में अहम बदलावों को मंजूरी दे दी। बदलाव के बाद सांसदों के लिए सदन के नए नेता का चुनाव करने के लिए मतदान करना अनिवार्य कर दिया गया है। सिफारिशों के तहत सांसदों को मतदान से गैर-हाजिर रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उनकी उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। मतदान के तीनों दौर में कोई सदस्य गैर-हाजिर रहता है तो संसद अध्यक्ष को उसे अयोग्य करने का अधिकार रहेगा।
Sunday, January 30, 2011
नेपाल में प्रधानमंत्री पद के लिए तीन फरवरी को 17वीं बार चुनाव
नया प्रधानमंत्री चुनने की करीब सात महीने में हुईं 16 नाकाम कोशिशों के बाद नेपाल के सांसद इस प्रक्रिया की नए सिरे से शुरुआत करेंगे। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि आपसी गतिरोध वाले राजनीतिक दल सरकार के गठन के लिए राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित 26 जनवरी की समय सीमा से पहले उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहे हैं। राष्ट्रपति राम बरन यादव ने बहुमत के आधार पर नए प्रधानमंत्री का चुनाव करने की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करने के संसद को निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री पद का चुनाव कराने वाली संसद की कार्य मंत्रणा समिति ने घोषणा की कि दलों को दो फरवरी तक नामांकन दाखिल करने होंगे। इसके बाद तीन फरवरी को नया चुनाव होगा। अगर जरूरी हुआ तो दूसरे और तीसरे दौर का चुनाव पांच तथा छह फरवरी को होगा। तीन मुख्य दलों यूसीपीएन (माओइस्ट) और सत्तारूढ़ दल के दो सहयोगी सीपीएन (यूएमएल) और नेपाली कांग्रेस के बीच बुधवार को हुई अहम बैठक के बाद भी गतिरोध खत्म नहीं हो पाया क्योंकि तीनों दल प्रधानमंत्री पद के लिए आम सहमति वाले उम्मीदवार का चयन करने पर राजी नहीं हो सके। राष्ट्रपति यादव द्वारा आम सहमति वाली सरकार के गठन के लिए तय की गई दूसरी समय सीमा भी खत्म हो गई। माओवादियों ने कहा कि वे अगली गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगे क्योंकि सदन में उनकी संख्या ज्यादा है। माओवादी प्रमुख प्रचंड ने जोर दिया कि उनकी पार्टी को सरकार बनाने का मौका दिया जाना चाहिए क्योंकि पूर्व विद्रोहियों ने अब अपने लड़ाकों को संयुक्त राष्ट्र का मिशन खत्म होने के बाद मुख्य राजनीतिक दलों की विशेष समिति की निगरानी के दायरे में रख दिया है। नेपाल की 601 सदस्ईय संविधान सभा में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को जीत हासिल करने के लिए 50 फीसदी से अधिक सदस्यों का समर्थन मिलना जरूरी है। हालांकि सभा में किसी भी दल को बहुमत हासिल नहीं है और आपसी गतिरोध वाले दल कोई गठबंधन बनाने में विफल रहे हैं। बीती 25 जनवरी को एकराज भंडारी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्ईय संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री का चुनाव करने संबंधी नियमों में अहम बदलावों को मंजूरी दे दी। बदलाव के बाद सांसदों के लिए सदन के नए नेता का चुनाव करने के लिए मतदान करना अनिवार्य कर दिया गया है। सिफारिशों के तहत सांसदों को मतदान से गैर-हाजिर रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उनकी उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। मतदान के तीनों दौर में कोई सदस्य गैर-हाजिर रहता है तो संसद अध्यक्ष को उसे अयोग्य करने का अधिकार रहेगा।
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