दुबई में पाक नागरिक की हत्या में १७ भारतीयों को सुनाई गयी है मौत की सजा
संयुक्त अरब अमीरात में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत के मामले में मिली सजा-ए-मौत के खिलाफ लड़ रहे 17 भारतीयों का मामला उलझ गया है। सजा झेल रहे भारतीय नागरिकों ने अपने पक्ष को मजबूत बताते हुए पीडि़त परिवार को हर्जाना राशि चुका कर मामले में सुलह करने का फार्मूला ठुकरा दिया है। इस बीच, मामले पर केंद्र सरकार ने दुबई स्थित भारतीय मिशन को हर संभव कानूनी मदद मुहैया कराने को कहा है। सरकार को मिली जानकारी के मुताबिक मारे गए पाकिस्तानी नागरिक के परिवार ने अदालत को बताया था कि वह मुआवजा लेकर सुलह करने को तैयार है। हालांकि इस बारे में अदालत ने बचाव पक्ष को पुनर्विचार के लिए और वक्त दिया है। पीडि़त परिवार का जोर दिया यानी खून की मुआवजा राशि या फिर कसास (सजा-ए-मौत) पर है। मामले पर अगली सुनवाई 17 फरवरी 2011 को होगी। इस मामलें में फंसे भारतीयों में 16 पंजाब के रहने वाले हैं और एक नागरिक हरियाणा का है। भारतीय नागरिकों को पाकिस्तानी नागरिक मिसरी नजीर खान को मारने और तीन को घायल करने के आरोप में मार्च 2010 में मौत की सजा सुनाई गई थी। मामले में बचाव पक्ष की दलील है कि अभियोजन पक्ष बीती कई सुनवाइयों के दौरान हत्या में इस्तेमालल किए गए हथियार को पेश नहीं कर सका है। साथ ही उसके तर्को में भी कई कमियां हैं, जिसने खुद को बेगुनाह साबित करने की कोशिश कर रहे भारतीयों के मामले को मजबूत कर दिया है। अदालत ने अभियोजन को ज्यादा गवाहों को पेश करने के आदेश के साथ सुनवाई 17 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायमूर्ति अब्दुल्ला यूसुफ अल शम्सी की अध्यक्षता वाले न्यायमूर्ति अहमद लबीब और सरकारी वकील मुस्तफा अल बारोडी के अदालती दल ने समझौता पत्र, बचाव पक्ष के वकीलों को सौंप दिया। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि वह इस प्रस्ताव पर बचाव पक्ष के परिजनों से और दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के एक प्रतिनिधि से चर्चा करेंगे। बचाव पक्ष की एक सदस्य, बिंदू चेत्तुर ने कहा कि गुरुवार को अदालत में पेश हुए दो जांचकर्ताओं के साथ जिरह की गई और उनसे मिले जवाब से इस मामले में बचाव पक्ष मजबूत हुआ है। बचाव पक्ष ने न्यायाधीश से आग्रह किया कि वह बाकी बचे दो जांच अधिकारियों को भी अदालत में तलब करे। बचाव पक्ष ने अदालत से यह भी आग्रह किया कि वह उन हथियारों को पेश करने का आदेश जारी करे, जिनका इस्तेमाल मारपीट में किया गया था और उन्हें बाद में शारजाह पुलिस ने जब्त कर लिया था। चेत्तुर ने यह भी कहा कि प्रमुख आरोपी राजू की अनुपस्थिति एक अलग मुद्दा है, जिसकी जांच की जानी चाहिए।
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