चीन का अमेरिका और यूरोप में निर्यात घट रहा है। ऐसे में यहां के कारोबारियों की निगाहें भारत पर हैं। चीन के आधिकारिक मीडिया के अनुसार चीन की कंपनियां अब भारतीय बाजार में अपनी छाप छोड़ रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार चीन के उद्यमी के स्वामित्व वाली लेनोवो कंप्यूटर्स भारतीय बाजार में एचपी, डेल, एसर से कड़ी प्रतिस्पर्धा के दौर में नौ प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी हासिल कर चुकी है। चीन की दूरसंचार उपकरण कंपनियां हुवावेई और जेडटीई भी तेजी से भारतीय बाजार में पैर पसार रही हैं। चीन की कंपनी लेनोवो ने 2005 में आईबीएम की पर्सनल कंप्यूटर इकाई का अधिग्रहण किया था। लेनोवो ने अब 2014 तक इस क्षेत्र में भारत में सभी बड़े खिलाड़ियों को पीछे छोड़ने की योजना बनाई है। लेनोवो इंडिया के प्रबंध निदेशक आर के अमर बाबू ने चाइना डेली से कहा, ‘यदि हम चीन के बाजार में नंबर वन हो सकते हैं तो भारत में क्यों नहीं। दोनों देशों (भारत व चीन) में काफी समानताएं हैं।’
उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास, बाजार पहुंच तथा परिपक्वता के मामले में भारत चीन से थोड़ा पीछे है। ऐसे में लेनोवो के सफल अनुभवों को भारत पर लागू किया जा सकता है। जेडटीई टेलीकाम इंडिया के चेयरमैन डी के घोष ने कहा कि हमारे उत्पाद चूंकि चीन में बनते हैं इसलिए ये हमारे प्रतिद्वंद्वियों से 25 फीसद सस्ते पड़ते हैं। ‘हमें उम्मीद है कि भारत में हमारा कारोबार सालाना 30 फीसद की दर से बढ़ेगा और अगले तीन साल में हम इस क्षेत्र में दो प्रमुख खिलाड़ियों में होंगे।’
शोध कंपनी मैसन के अनुसार, भारत के दूरसंचार उपकरण बाजार में जेडटीई फिलहाल एरिक्सन, हुवावेई और नोकिया सीमंस नेटवर्क के बाद चौथे स्थान पर है। चीन भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार के रूप में उभर रहा है। पिछले साल दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 60 अरब डालर पर पहुंच जाने की उम्मीद है। इससे पिछले साल यह 42 अरब डालर रहा था। अमेरिका और यूरोपीय देशों में वित्तीय संकट की वजह से आज की तारीख में ज्यादा से ज्यादा चीनी कंपनियों की निगाह अपने पड़ोसी देश पर है। भारत में चीन के राजदूत ज्यांग यान ने कहा, ‘चीन और भारत के बीच बढ़ते आर्थिक रिश्तों के बावजूद दोनों देशों के राजनीति संबंध अभी भी काफी कमजोर हैं। ‘इन्हें आसानी से नुकसान पहुंचाया जा सकता है और दुरुस्त करने में काफी दिक्कत आती है।’
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