Thursday, January 20, 2011

चीन का अरुणाचल नीति में बदलाव से इंकार

चीन ने स्पष्ट कर दिया है कि उसने अरुणाचल प्रदेश के संबंध में नीति परिवर्तित नहीं की है। कुछ दिनों पहले ही चीन ने इस प्रदेश के दो खिलाडि़यों को नत्थी वीजा जारी किया था। इस पर भारत सरकार ने कड़ा एतराज जताया था। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, पूर्वी क्षेत्र के विवादास्पद इलाके समेत चीन-भारत सीमा को लेकर हमारा रुख स्पष्ट और लंबे समय से कायम है। भारतीय पक्ष इस बात को जानता है। भारत-चीन सीमा का पूर्वी हिस्सा अरुणाचल प्रदेश है। इस मुद्दे पर समाधान के लिए दोनों पक्ष अब तक 14 दौर की वार्ता कर चुके हैं। अरुणाचल प्रदेश के दो खिलाडि़यों को फुजियान प्रांत में वेटलिफ्टिंग ग्रां प्री में भाग लेने के लिए जाना था। चीन की ओर से उन्हें नत्थी किया गया वीजा जारी किया गया। इस मुद्दे पर पिछले सप्ताह विवाद हुआ था, जिससे जुड़े सवाल पर सोमवार को चीनी विदेश मंत्रालय ने स्पष्टीकरण दिया। इन दोनों को भारतीय आव्रजन अधिकारियों ने लौटा दिया था, क्योंकि भारत ऐसे वीजा को मान्यता नहीं देता। दूसरी ओर चीन का मानना है कि अरुणाचल प्रदेश उसका भाग है और इसलिए वहां के लोगों को वीजा की जरूरत नहीं है। ऐसे में चीन को यह स्पष्ट करना चाहिए था कि जब वह अरुणाचल के लोगों को वीजा ही नहीं देने की नीति अपना रहा था तो नत्थी वीजा क्यों दे रहा है। इससे तो उसकी नीति में परिवर्तन के संकेत मिलते हैं। बहरहाल, चीन यह मानने को तैयार नहीं कि अरुणाचल प्रदेश के बारे में उसने नीति बदली है। चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में भारत से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ रोंग यिंग ने कहा, मुझे लगता है कि चीन की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है, लेकिन उन्हें आने-जाने की सुविधा देना अच्छा है। वीजा नहीं देने से यह नुकसान होता कि विवाद सुलझने तक अरुणाचल के लोग चीन नहीं आ पाते। दूसरी ओर भारतीय अधिकारियों ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि क्या चीन अरुणाचल प्रदेश को लेकर एक निश्चित वीजा नीति पर चलने वाला है, क्योंकि मुख्यमंत्री दोरजी खांडू के अब के सलाहकार विशाल नाबाम 2006 में एक महीने के पर्यटक वीजा पर चीन गए थे, जबकि प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारी को 2007 में वीजा देने से इंकार कर दिया गया था। हाल की भारत यात्रा में चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने वादा किया था कि वह इस मुद्दे का समाधान करेंगे। बीजिंग ने किया उत्तर कोरिया में सैनिक भेजने का खंडन : चीन ने उन रिपोर्टो का खंडन किया है जिनमें उसके सैनिकों की उत्तर कोरिया में तैनाती की तैयारी का दावा किया गया था। चीनी रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वह संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी के बगैर वहां सैनिक नहीं भेजेगा। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, चीन संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी के बगैर अन्य देशों में एक भी सैनिक नहीं भेजेगा।


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