Sunday, January 9, 2011

पाक की ओर से तेल की कीमतें वापस लेने पर वॉशिंगटन ने दिखाई दबंगई

अमेरिका को पाकिस्तान के आर्थिक और प्रशासनिक मामलों में दखल देने का पूरा हक है, क्योंकि वॉशिंगटन उसे सबसे ज्यादा सहायता मुहैया कराता है। पाकिस्तान में अमेरिका के राजदूत कैमरन मुंटर ने शनिवार को जियो टीवी को दिए साक्षात्कार में यह बात कही। वह अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के उस बयान पर जवाब दे रहे थे जिसमें उन्होंने तेल की कीमतें घटाने के लिए पाक सरकार की आलोचना की थी। हिलेरी ने शुक्रवार को कहा था कि पाक सरकार को अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। उसने तेल की कीमतों के दाम वापस लेकर ठीक नहीं किया। यह पाकिस्तान के भविष्य से जुड़ा फैसला नहीं है। हिलेरी के इस बयान पर पाकिस्तान में प्रतिक्रिया हो रही है। खासतौर पर पाक के विपक्षी दल इसे अंदरूनी मामलों में अमेरिकी दखल बता रहे हैं। बहरहाल, मंुटर ने कहा कि हम पाकिस्तान को सबसे अधिक मदद मुहैया कराने वालों में शामिल हैं। लिहाजा अमेरिका को पाकिस्तान के आर्थिक और प्रशासनिक मामलों में दखल देने का अधिकार है। इस्लामाबाद में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुंटर ने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान के सामने सम्मान और गरिमा के साथ मांग रखी थी। उन्होंने कहा कि ईधन की कीमतों को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। इससे अर्थव्यवस्था में सुधार के प्रयासों को झटका लगेगा। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, मुझे भरोसा है कि पाकिस्तान सरकार ईधन की कीमतों सहित अपने आर्थिक नियमों और नियमन में सुधार करेगी। अमेरिका पाकिस्तान को और सैनिक सहायता देगा ओबामा प्रशासन के शीर्ष अधिकारी मानते हैं कि पाकिस्तान कबीलाई इलाकों में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है। इसके बावजूद अमेरिका पाकिस्तान को और सैनिक, खुफिया और आर्थिक सहायता मुहैया कराने जा रहा है। वर्ष 2011 में पाकिस्तान को लगभग तीन अरब डॉलर (लगभग 136 अरब रुपये) की अमेरिकी सहायता मिलने की संभावना है। पाकिस्तान यह शिकायत करता रहा है कि जंगी जहाजों सहित अन्य सैनिक उपकरण प्रदान करने के अनुरोध पर अमेरिका की ओर से देरी की जा रही है। वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, उपराष्ट्रपति जोसेफ बिडेन अपनी अगले सप्ताह होने वाली पाक यात्रा के दौरान इस सहायता की घोषणा करेंगे। बिडेन की इस यात्रा को विशेष महत्व दिया जा रहा है क्योंकि अमेरिका पाकिस्तानी सेना द्वारा उत्तरी वजीरिस्तान क्षेत्र में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई तेज नहीं किए जाने से बहुत चिंतित है। पाक के इस क्षेत्र को अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों से लड़ रहे अल कायदा, तालिबान, हक्कानी नेटवर्क और अन्य कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों का सबसे मजबूत ठिकाना मानती हैं। अमेरिका पाकिस्तान से खुफिया सहयोग भी बढ़ाने जा रहा है। खुफिया सहयोग द्वारा वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच राजनीतिक, व्यापारिक और सुरक्षा संबंध स्थापित करने का प्रयास करेगा। इससे भारत द्वारा अफगानिस्तान में अपना प्रभाव जमाने के पाकिस्तान के भय को कम करने में मदद मिलेगी।


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