Sunday, January 30, 2011

भावी अफगान राजनीतिक व्यवस्था में पाक का दखल


अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने के लिए गठित संयुक्त मेल मिलाप आयोग (जेआरसी) में पाकिस्तान की औपचारिक भूमिका होगी। इसका उद्देश्य तालिबान के साथ सीधे वार्ता के तौर-तरीके तय करना है। आयोग की अध्यक्षता अफ-पाक के विदेश मंत्री करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के सैन्य व खुफिया अधिकारियों को भी आयोग में शामिल किया गया है। आयोग के गठन की घोषणा पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री जलमय रसूल ने की। पाकिस्तान के समाचार पत्र द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार आयोग का गठन अफगानिस्तान में शांति स्थापना के उद्देश्य से राजनीतिक हल के लिए दोनों देशों की ओर से उठाया गया पहला कदम है। एक अधिकारी ने कहा कि यह कदम अफगानिस्तान में भावी राजनीतिक व्यवस्था में पाककी महत्वपूर्ण भूमिका का संकेत है। रिपोर्ट में कहा गया कि आयोग का मुख्य उद्देश्य अफगानिस्तान में मेल-मिलाप प्रक्रिया को गति देने और इसके लिए तालिबान के साथ सीधी बातचीत के तौर-तरीके तय करना है। समाचार पत्र द डान ने सूत्रों के हवाले से कहा कि आयोग अफगान-तालिबान से संपर्क स्थापित करके यह संदेश देगा कि देश ने मेल-मिलाप प्रक्रिया में पाकिस्तान को औपचारिक भूमिका सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों देश संबंधों में सुधार होने के बाद मेल-मिलाप प्रक्रिया के लिए संयुक्त संस्था गठित करने के लिए पिछले कुछ सप्ताह से चर्चा कर रहे थे। दोनों देश अमेरिका की वार्षिक रिपोर्ट के बाद आयोग के गठन पर सहमत हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कवायद जुलाई में अफगानिस्तान से होने वाली पहले चरण की सैन्य वापसी के मद्देनजर की जा रही है। इससे पहले कुरैशी और रसूल ने संयुक्त आयोग के गठन की घोषणा की। पाकिस्तानी विदेशमंत्री ने कहा कि पुन:एकीकरण व मेल-मिलाप प्रयास अफगान नीत प्रक्रिया का हिस्सा है और पाकिस्तान इन प्रयासों में मदद करेगा।


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