जापान में शुक्रवार को आए भूकंप और सुनामी के बाद मरने वालों की संख्या हजारों में होने का अंदेशा जताया जा रहा है। शनिवार तक देश भर में 1700 लोगों की मौत के बाद रविवार को अकेले मियागी प्रांत में 10 हजार से ज्यादा लोगों के मरने की बात कही जा रही है। जापान की समाचार एजेंसी क्योदो के मुताबिक इन आपदाओं के कारण तीन लाख लोगो को विभिन्न इलाकों से हटाना पड़ा है। दूसरी ओर जापान में रविवार को राहत कार्य ने गति पकड़ी। जापान सरकार ने को देखते हुए राहत कार्य में लगे सैनिकों की संख्या एक लाख कर दी है। अमेरिकी सैन्य विमान भी प्रभावितों तक सहायता पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री नाओतो कान ने कहा, मैंने लोगों की मदद के लिए प्रयास तेज करने के आदेश दिए हैं। हम इस आपदा से उबरने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। अपने स्थान से आठ फुट खिसका जापान भूकंप और सुनामी के बाद जापान अपने स्थान से आठ फुट खिसक गया है। अमेरिकी भू-गर्भ सर्वेक्षण के भूकंप विशेषज्ञ पाल अर्ले ने कहा, यह सर्वमान्य आकड़ा है। जापान करीब आठ फुट खिसक गया है। सर्वेक्षण के मुताबिक भूकंप और टेक्टोनिक शिफ्ट प्रशांत और उत्तर अमेरिकी प्लेटों के बीच दाब त्रुटि आने के कारण आया। प्रशांत प्लेट उत्तर अमेरिकी प्लेट को प्रतिवर्ष 3.3 इंच प्रतिवर्ष की गति से ढकेलती है, लेकिन भूकंप ऐसा बड़ा झटका ला सकता है जो प्लेट को आगे खिसका देता है। उन्होंने कहा, इतना बड़ा भूकंप के झटके से आप इतना बदलाव पा सकते हैं। वास्तविक त्रुटि से त्रुटि के दोनों ओर करीब 65 फुट की आपेक्षिक गति मिल सकती है। गत शुक्रवार को आए 9.0 की तीव्रता के भूकंप के कारण आई सुनामी ने जापान के पूर्वोत्तर तटवर्ती नगरों और शहरों को अपनी चपेट में ले लिया। सूनामी ने रास्ते में आने वाली सभी चीजों को तहस-नहस कर दिया। प्रधानमंत्री नाओतो कान ने इसे अभूतपूर्व राष्ट्रीय आपदा करार दिया। मदद के लिए आगे आए 69 देश जापान में शुक्रवार को आए भूकंप और सुनामी से मची भीषण तबाही से देश को उबारने में मदद करने के लिए 69 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मदद की पेशकश की है। जापान के विदेश मंत्रालय के अनुसार वियतनाम सहित 12 देश और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) राहत एवं बचाव दल भेज रहे हैं। इनके अलावा संयुक्त राष्ट्र बाल कोष सहित पांच अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी राहत आपूर्ति और बचाव दल भेजने के लिए आगे आई हैं। मंत्रालय के अनुसार रविवार दोपहर चीन के भूकंप प्रशासन से 15 सदस्यीय राहत दल जापान पहुंच गया। इसके पहले दक्षिण कोरिया और सिंगापुर से बचावकर्मी पहुंच गए हैं। चीन के बचाव विशेषज्ञों की योजना आपदा प्रभावित इलाकों में जाकर वहां शीघ्र राहत कार्य शुरू करने की है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक चीन के रेड क्रास सोसायटी ने जापान को आपातकालीन सहायता के रूप में करीब 152,087 डॉलर देने का फैसला किया है। चीन के अन्य संगठनों चीन-जापान फ्रेंडशिप एसोसिएशन और चाइनीज पीपुल्स एसोसिएशन फॉर फ्रेंडशिप विथ कंट्रीज ने भूकंप से राहत पहुंचाने के लिए 15,400 डॉलर का दान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसे विनाशकारी आपदा बताते हुए अपनी मदद का वादा किया है। अमेरिकी राजदूत जॉन रूस ने कहा कि अमेरिका ने राहत एवं बचाव कार्य के लिए वहां दो विमानों को भेज चुका है। मलेशिया की सरकार ने तलाशी एवं बचाव दल के साथ 15 डॉक्टरों और चिकित्सकीय मदद भेजा है। जबकि रूसी राष्ट्रपति दमित्रि मेदवेदेव ने जापान को मदद करने के लिए आवश्यक बलों और संसाधनों को तैयार रखने के लिए कहा है। इन देशों के अलावा ब्रिटेन, कंबोडिया, सिंगापुर, फिजी, मेक्सिको और दक्षिणी कोरिया ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। अब और गहराया बिजली का संकट भूकंप और सुनामी से प्रभावित जापान के परमाणु संयंत्रों के कारण वहां बिजली संकट पैदा हो गया है। सरकार ने रविवार को यह चेतावनी दी और लोगों को बिजली कटौती के लिए तैयार रहने को कहा। आर्थिक, व्यापार और उद्योग मामलों के मंत्री बनरी कैदा ने एक पे्रस कॉन्फ्रेंस में कहा कि खास तौर पर देश के पूर्वी हिस्से में बिजली आपूर्ति का संकट है। यहां टोक्यो इलेक्टि्रक पावर (टेपको) और तोहोकू इलेक्टि्रक पावर कंपनियां बिजली आपूर्ति करती हैं। टेपको पूर्वी क्षेत्र के पांच इलाकों में बिजली देती है, जहां प्रत्येक में क्रमवार ढंग से दिन में तीन घंटे बिजली काटी जा रही है। मंत्री ने कहा कि यह स्थिति आने वाले कई हफ्तों तक जारी रह सकती है। कंपनी की बिजली आपूर्ति में 25 प्रतिशत की कमी संभव है। उत्तरी जापान में बिजली आपूर्ति करने वाली तोहोकू ने भी अपने ग्राहकों को कटौती के लिए तैयार रहने को कहा है। जापान में परमाणु संयंत्र देश को 30 प्रतिशत बिजली आपूर्ति करते हैं। यहां के 50 में से 11 परमाणु संयंत्र भूकंप और सुनामी क्षेत्र में स्थित हैं, जो बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। भूकंप ने पैदा की एटम बमों से ज्यादा ऊर्जा दुनिया में अभी मौजूद सारे परमाणु हथियारों से जितनी ऊर्जा पैदा हो सकती है, उससे हजार गुना ज्यादा ऊर्जा शुक्रवार को जापान में आए भूकंप से पैदा हुई थी। वैज्ञानिकों के अनुसार मौजूदा परमाणु हथियारों से 67000 करोड़ टन टीनएनटी (परमाणु ऊर्जा मापने की इकाई) ऊर्जा पैदा होगी। इस तथ्य के साथ वैज्ञानिकों ने यह याद दिलाया है कि समुद्र के तल में पैदा होने वाले भूकंप धरती पर आने वाले भूकंप से ज्यादा घातक होते हैं। वे सुनामी पैदा करते हैं, जो समुद्र तटों पर भीषण तबाही लाती हैं। जापान का भूकंप प्रशांत महासागर में स्थित रिंग ऑफ फायर पट्टी में में हुई हलचल से आया है। यह 25000 मील लंबी पट्टी है, जिसमें सैकड़ों ज्वालामुखी मौजूद हैं। इस पट्टी में पृथ्वी के महाद्वीपों का निर्माण करने वाली ठोस चट्टानों वाली दर्जनों परतों (प्लेट्स) के जोड़ हैं। जापान इनके ऊपर स्थित है, इसलिए यहां अक्सर भूकंप आते हैं|
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