पिछले दिनों जापान में आए भूकंप और सुनामी से जापान की अर्थव्यवस्था को जबरदस्त चोट लगी है। जापान के सम्राट ने परंपरा से हटकर देश के नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यह जापान के लिए सबसे बड़ी त्रासदी है। जापान का एक दुर्भाग्य यह भी है कि वह देश के विकास के लिए परमाणु ऊर्जा पर काफी निर्भर करता है। जापान में परमाणु हादसे से अन्य देश भी कांप उठे हैं। सबसे अधिक चिंता तो भारत में हो रही है जहां बड़े पैमाने पर परमाणु रिएक्टर लगाने की तैयारी चल रही है। महाराष्ट्र के जैतपुर में निकट भविष्य में ही एक विशाल परमाणु रिएक्टर लगने वाला था। परंतु अब वहां की स्थानीय जनता ने इसका प्रबल विरोध शुरू कर दिया है। यदि भूकंप या किसी अन्य कारण से कोई परमाणु रिएक्टर फट गया तो लाखों लोगों को उसके दुष्परिणाम भुगतने होंगे। अन्य देशों की तुलना में भारत की जनसंख्या बहुत अधिक है और आबादी का घनत्व भी बहुत ज्यादा है। जापान में भूकंप और सुनामी के कारण कितने लोग मरे और कितने जीवनभर के लिए अपंग हो गए, इसका सही आकलन हो ही नहीं पाया है। जिन लोगों ने जापान की कंपनी सोनी के चेयरमैन की आत्मकथा पढ़ी होगी उन्हें याद होगा कि द्वितीय विश्र्वयुद्ध के बाद जापान की जनता ने कितने कष्ट भोगे थे। परंतु जापान की जनता ने हौसला नहीं खोया। देखते-देखते जापान के उद्यमियों ने छोटे-छोटे इलेक्ट्रोनिक सामान के अलावा बड़े-बड़े पानी के जहाज और हवाई जहाज बनाने शुरू कर दिए। सारी दुनिया ने जापानियों की बुद्धिमत्ता, कुशलता और कठिन परिश्रम का लोहा मान लिया। बहुत जल्द जापान अमेरिका के बाद संसार का दूसरा समृद्ध देश बन गया। वह उदारतापूर्वक अन्य देशों को आर्थिक सहायता देने लगा। परंतु हाल में दुर्भाग्य ने जापान को आ घेरा। वहां की राजनीति में घोर अस्थिरता छाई हुई है। एक महीने पहले ही भ्रष्टाचार के आरोप में वहां के विदेश मंत्री हटाए गए। सरकार देश को सही दिशा दे नहीं पा रही थी। जापान का आर्थिक विकास पहले की अपेक्षा घटकर 3.9 प्रतिशत हो गया। इसके पहले कि जापान की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था अपने पैरों पर खड़ी होती भूकंप और सुनामी ने उसे फिर जमीन पर पटक दिया। अब जापान के लिए फिर से पहले की तरह एक संपन्न राष्ट्र बनना बहुत ही कठिन है। जापान की ध्वस्त अर्थव्यवस्था का प्रभाव अन्य देशों पर भी पड़ेगा। जापान संसार के कई देशों से खासकर भारत, इंडोनेशिया ओर ऑस्ट्रेलिया आदि देशों से भारी मात्रा में लौह अयस्क आयात करता है और अत्यंत ही उम्दा किस्म का स्टील बनाकर उसे विदेशों को निर्यात करता है। संभवत: आने वाले अनेक वषरें तक वह ऐसा नहीं कर पाएगा। स्टील के अलावा जापान भारी मात्रा में इलेक्ट्रोनिक सामान, कागज, समुद्री जहाज, हवाई जहाज और दूसरी अनेक उपभोक्ता और औद्योगिक वस्तुओं का निर्यात करता है। जापान अर्द्धविकसित और विकासशील देशों में भी जमकर निवेश करता था। अब यह निवेश रुक जाएगा। सबसे बुरा असर तो जापान के पर्यटन उद्योग पर होगा। इस त्रासदी के बाद अकेले थाईलैंड के 70 हजार पर्यटकों ने जापान जाने का अपना विचार बदल दिया। इसके अलावा बड़ी संख्या में जापान के लोग भी दूसरे देशों में घूमने जाते थे। भगवान बुद्ध की जन्मस्थली होने के कारण खास तौर पर भारत में काफी जापानी पर्यटक आते थे। संकट के कारण जापानी पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट देखने को मिलेगी। प्रकृति के कहर के कारण जापान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। उसे अपने पैरों पर खड़ा होने में संभवत: कई वर्ष लग जाएंगे। परंतु इस प्राकृतिक आपदा ने भारत जैसे देश को एक बड़ी सीख दी है जो बहुत बड़े पैमाने पर परमाणु ऊर्जा का उत्पादन करने वाला है। (लेखक पूर्व सांसद व पूर्व राजदूत हैं)
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