Monday, March 14, 2011

जापान पर परमाणु विकिरण की नई आफत


द्वितीय विश्व युद्ध में परमाणु हमले का सामना करने वाले जापान पर अब भूकंप और सुनामी के बाद परमाणु विकिरण का खतरा मंडरा रहा है। शनिवार को फुकुशिमा स्थित परमाणु संयंत्र के रिएक्टर नंबर एक में विस्फोट के बाद अब तीन नंबर रिएक्टर में धमाके की आशंका जाहिर की गई है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश के प्रधानमंत्री नाओतो कान ने कहा है कि जापानी आज वैसे ही संकट का सामना कर रहा है, जैसा द्वितीय विश्व युद्ध में परमाणु हमले के वक्त था। जापान के प्रधानमंत्री नाओतो कान ने परमाणु विकिरण के खतरे को बेहद गंभीर बताते हुए कहा,वैज्ञानिक स्थिति से निपटने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, यह परमाणु संकट रूस के चेर्नोबिल शहर के परमाणु संकट (1986) जैसा भयावह नहीं है। जापान के प्रधानमंत्री का यह बयान उन खबरों के बाद आया जिनमें फुकुशिमा स्थित परमाणु संयंत्र के रिएक्टर नंबर-3 में भी विस्फोट का खतरा बताया गया है। इससे पहले, जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव यूकिओ एदानो ने संवाददाता सम्मेलन में खतरे की बात को स्वीकारा और माना कि रिएक्टर नंबर-3 में विस्फोट का खतरा बढ़ रहा है। इसी संयंत्र के रिएक्टर नंबर-1 में शनिवार को भारी विस्फोट हुआ था, जिसके बाद परमाणु विकिरण भी हुआ। रविवार को दूसरे रिएक्टर में विस्फोट के संबंध में मुख्य कैबिनेट सचिव ने बताया कि ईंधन छड़ें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इसी कारण विस्फोट का खतरा बढ़ गया है। शनिवार को विस्फोट के बाद हुए परमाणु विकिरण से अब तक 190 लोगों के प्रभावित होने की खबर है। ये सभी परमाणु संयंत्र के 10 किलोमीटर के दायरे में थे। सरकार ने 22 लोगों के विकिरण से प्रभावित होने की पुष्टि कर दी है। सतर्कता बरतते हुए सरकार ने इस क्षेत्र से एक लाख 40 हजार लोगों को निकाल लिया है। न्यूक्लियर सेफ्टी एजेंसी ने विकिरण से संबंधित घटनाओं की अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की एक से सात तक की सूची में जापान की घटना को चौथे नंबर पर रखा है। वहीं, जापान संकट के कारण दुनिया में परमाणु ऊर्जा के विकल्प की तलाश पर बहस तेज हो गई है। जर्मनी व ऑस्ट्रेलिया में वैज्ञानिकों समेत तमाम लोगों ने इसका जोरदार विरोध किया है|

No comments:

Post a Comment