Tuesday, March 15, 2011

नकली करेंसी से वार करता पाकिस्तान


पाकिस्तान के बनने के समय से लेकर अब तक यह प्रश्न महत्वपूर्ण बना हुआ है कि वह भारत से कैसे रिश्ते चाहता है। क्या वह और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई भारत के विरुद्ध छद्म युद्ध जारी रखेगी। अब तक का इतिहास बताता है कि यह रवैया नहीं बदलेगा। भारत के साथ प्रत्यक्ष युद्ध की रणनीति में मिली असफलता के बाद से पाकिस्तानी हुक्मरानों ने आतंकवाद के साथ गठबंधन कर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया और अब वह नकली भारतीय करेंसी के जरिए युद्ध लड़ता दिखायी दे रहा है। इसके परिणाम क्या होंगे, कहना मुश्किल है, लेकिन फिलहाल पाकिस्तान की इस नयी रणनीति से भारत के लिए खासी मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। अन्तरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंतण्ररिपोर्ट 2011 ने नकली करेंसी के मामले में पाकिस्तान को पुन: कटघरे में खड़ा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी मात्रा में काला धन, पैसे भेजने के तरीकों और असुरक्षित सीमाओं की वजह से भारत में मनी लॉन्ड्रिंग की समस्या खतरनाक दर से बढ़ रही है। इसके मुताबिक भारत में आने वाले नकली नोट पाकिस्तान में तैयार किए जाते हैं और इसके बाद ये कई अन्तरराष्ट्रीय मागरें से होते हुए भारत पहुंच जाते हैं। इस मुद्रा का इस्तेमाल देश में आतंकवादी और आपराधिक संगठन अपनी गतिविधियां संचालित करने में करते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पड़ोसी देशों में पाकिस्तानी उच्चायोग ही इन नकली नोटों के कारोबार में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ढाका और काठमांडू स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग नकली नोट तैयार करने के साथ-साथ भारत में इनकी खेप पहुंचाने में भी मदद कर रहे हैं। केवल बांग्लादेश और नेपाल से ही नहीं बल्कि श्रीलंका और थाइलैंड से भी नकली भारतीय करेंसी भारत भेजी जा रही है यानी पाकिस्तान इन देशों सहित कई अन्य देशों के जरिए नकली नोटों का संगठित कारोबार चला रहा है। इस करेंसी से बड़े पैमाने पर हथियार व गोला बारूद की खरीद-फरोख्त होती है और यह असली के साथ मिल कर बाजार में चलने लगती है। मतलब यह कि पाकिस्तान भारत में एक तीर से दो निशाने साध रहा है। पहला भारत में नकली मुद्रा का समानांतर प्रवाह करा कर काली कमाई की अर्थव्यवस्था को बुनियादी आधार दिया जा रहा है और दूसरा इसी के जरिए भारत में आतंकवादी गतिविधियां चलायी जा रही हैं। कुछ समय पहले भारत सरकार ने इंटरपोल से मदद लेने तथा ब्रिटेन सहित यूरोपीय देशों से पाकिस्तान को करेंसी से सम्बंधित सामग्री की आपूर्ति करने वालों पर नजर रखने के लिए आग्रह करने का मन बनाया था। लेकिन अमल कितना हुआ, यह नहीं कहा जा सकता क्योंकि सकारात्मक परिणाम अब तक सामने नहीं आए हैं। भारत की खुफिया एजेंसी के अधिकारियों के पास यह सूचना है कि नकली भारतीय करेंसी आईएसआई की देखरेख में कराची, क्वेटा और लाहौर में छपती है, जिसे आईएसआई तथा लश्कर-एतै यबा के निर्देशन में नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के जरिए भारत पहुंचा दिया जाता है। सीधा अर्थ यह कि पाकिस्तान इस नकली करेंसी के जरिए आतंक के लिए फंडिंग करता है। आईबी के अधिकारी इस मामले में केन्द्र को काफी समय पहले आगाह कर चुके हैं कि नकली करेंसी वाया नेपाल और बांग्लादेश भारत की अर्थव्यवस्था में जुड़कर लगातार उसका आयतन बढ़ा रही है। ऐसी सूचनाएं भी हैं कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आतंकी अभियानों के लिए सालाना फंडिंग बढ़ाती जा रही है, जिसका अधिकांश भाग इसी नकली करेंसी से निर्मित होता है। दरअसल पाकिस्तान ने अब तक जितने भी प्रत्यक्ष- परोक्ष युद्ध भारत से लड़े हैं, उनमें वह चित ही हुआ है। इसलिए अब उसने नकली करेंसी का सहारा लिया है ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को क्षति पहुंचे। इस नकली करेंसी से देश को कई रूप में नुकसान होगा जैसे यह अर्थव्यवस्था में अनावश्यक तरलता बढ़ेगी जो पहले से ही नुकसानदेह स्तर पर पहुंच रही है। दूसरी तरफ यह हमारे बैंकिंग सेक्टर में भ्रष्टाचार का वायरस पहुंचाएगी। ऐसा होने पर बाजार दिशाहीन हो सकता है, जिसका सीधा प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। तीसरा इससे भारतीय करेंसी नोट, भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार की विश्वसनीयता को धक्का पहुंचेगा। चूंकि यह मुद्रा अपने कुछ विकृत और ध्वंसक उद्देश्यों के साथ भारत में प्रवेश कर रही है, इसलिए उन गतिविधियों की संभावना भी तेज होगी। यानी इस षडयंत्र पर अतिशीघ्र अंकुश लगाने की जरूरत है। लेकिन यह तभी सभंव है जब भारत पाकिस्तान की समस्त गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए उसके उच्चायोगों पर भी लगाम कसे। लेकिन उच्चायोगों पर लगाम लगाना भारत सरकार के लिए आसान नहीं है क्योंकि उस स्थिति में पाकिस्तान से सम्बंध समाप्त करने होंगे। बहरहाल नकली करेंसी पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए टेरर फंडिंग का एक बड़ा जरिया बन रही है, इसलिए आने वाले समय में यह भारत के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकती है।

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