लीबिया में पिछले चार दिन से अमेरिका और उसके सहयोगियों के धुआंधार हवाई हमलों के बावजूद लीबियाई राष्ट्रपति मुअम्मर गद्दाफी की सेना मिसुराता, अजदाबिया और जिंतान पर कब्जा पाने के लिए तेजी से बढ़ रही है। दूसरी ओर लीबिया से संबंधित रणनीति तैयार करने में जुटे पश्चिमी देश बैकफुट पर आते दिख रहे हैं। अमेरिका के हमलों की अगुआई से इंकार करने के बाद उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में मतभेद गहरा गए हैं। हालांकि व्हाइट हाउस दावा कर रहा है कि मतभेद जल्द सुलझा लिए जाएंगे, लेकिन बात इतनी सरल नहीं है। नाटो देशों की कई मंत्रियों ने इस बात पर विशेष आपत्ति जताई हमलों से पहले लीबिया से बाहर निकलने के बारे में नहीं सोचा गया। अमेरिका और सहयोगी इस बात पर तो सहमत हैं कि नाटो को लीबिया में सैन्य अभियान के कमान ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन इस पर मतभेद है कि इस गठबंधन को लीबियाई नेता मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ जारी अभियान की पूरी कमान अपने हाथ में ले लेनी चाहिए या नहीं? दूसरी ओर गद्दाफी समर्थक सेना ने टैंकों और भारी तोपों से मिसुराता की घेराबंदी जारी रखी। यह पश्चिम लीबिया में एकमात्र ऐसा शहर है जो विद्रोहियों के कब्जे में है। लीबियाई सेना की भारी गोलाबारी में बच्चों सहित 50 व्यक्ति मारे गए। इसके साथ ही जिंतान पर कब्जे के लिए भी भारी संघर्ष जारी है जहां गद्दाफी के सैनिकों ने विद्रोहियों को कई बार पीछे ढकेला। लगातार चौथी रात राजधानी त्रिपोली में विस्फोट की तेज आवाजें सुनी गईं और विमानभेदी तोपों से दागे जाने वाले गोलों से पूरे आसमान में आग की लपटें देखी गई। ब्रिटेन को सता रही युद्ध पर होने वाले खर्च की चिंता लंदन, एजेंसी : लीबिया पर हमले में ब्रिटिश सेना के शामिल होने पर यहां असंतोष बढ़ने लगा है। मंगलवार को सशस्त्र सेना मंत्री निक हार्वे ने कहा, हम नहीं जानते कि लड़ाई कब तक चलेगी। हमें नहीं पता कि गद्दाफी की ताकत कब खत्म होगी। विपक्षी सांसदों ने इस बात का अंदेशा जाहिर किया है कि ये लड़ाई 30 साल लंबी हो सकती है। विदेश सचिव विलियम हेग ने कहा, ये लड़ाई काफी महंगी साबित हो सकती है, फिलहाल ये कहना मुश्किल है कि लड़ाई में ब्रिटेन की सहभागिता कब तक रहेगी। मुझे नहीं लगता कि इसका कोई निश्चित समय बताया जा सकता है। हेग ने आगे कहा, हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के निर्देशों का पालन करते रहेंगे जब तक लीबिया में पूर्ण रूप से संघर्ष विराम नहीं हो जाता। सरकार के मुताबिक सैन्य कार्यवाई पर प्रतिदिन का खर्च तीस लाख पाउंड (लगभग 22 करोड़ रुपये) के आस-पास है। जबकि डेली मेल की खबर के मुताबिक पहले तीन दिन की सैन्य कार्यवाई का खर्च 1.8 करोड़ पाउंड (लगभग 13 अरब रुपये) है। चांसलर जॉर्ज ऑस्बॉर्न ने लोगों को भरोसा दिलाया कि लड़ाई का खर्च लाखों में सकता है, करोड़ो में नहीं। लेकिन लड़ाई में होने वाले खर्च का जोर शोर से विरोध किया जा रहा है। गठबंधन सेना के दूसरे सदस्य भी इस झंझट से पीछा छुड़ाना चाह रहे हैं। नॉर्वे के विदेश मंत्री जोनार गाहर ने कहा है हम अपने लड़ाकू विमान तीन महीने से अधिक समय तक नहीं देंगे। खुफिया विभाग प्रमुख ने इंग्लैंड के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून को संभावित परेशानियों के बारे में चेतावनी भी दे दी है। फिलहाल गठबंधन सेना इस बात का इंतजार कर रही है कि लीबिया गद्दाफी समर्थकों और विरोधियों में विभाजित जाए ताकि गद्दाफी से निपटने में आसानी हो सके|
No comments:
Post a Comment