भूकंप और सुनामी के बाद परमाणु विकिरण के संकट से ग्रस्त जापान के फुकुशिमा एटमी संयंत्र में सोमवार को दूसरा विस्फोट हुआ। तीन के दिन के भीतर हुआ यह दूसरा धमाका इतना जोरदार था कि 40 किलोमीटर तक इसकी आवाज सुनी गई। विस्फोट के कारण रिएक्टर की इमारत की छत उड़ गई और दीवारें भी गिर गई। विस्फोट में 11 लोग घायल हुए हैं, जबकि सात लापता बताए जा रहे हैं। क्योदो समाचार एजेंसी के अनुसार रिएक्टर नंबर-2 में विस्फोट की वजह से रिएक्टर नंबर-3 भी क्षतिग्रस्त हो गया। धमाके के बाद से इसके कूलिंग सिस्टम में खराबी आ गई है, जिसे ठीक करने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक विस्फोट से संयंत्र के पिघलने या नष्ट हो जाने का खतरा बढ़ गया है। यदि ऐसा होता है, तो परमाणु विकिरण को फैलने से नहीं रोका जा सकेगा। फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के रिएक्टर नंबर-2 में पहले से हाइड्रोजन विस्फोट के खतरे की आशंका जताई गई थी। इससे पहले जापान के प्रधानमंत्री नाओतो कान ने कहा था कि उनका देश द्वितीय विश्व युद्ध में हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। जापानी की समाचार एजेंसी एनएचके के मुताबिक सोमवार को फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में स्थानीय समयानुसार सुबह 11 बजे विस्फोट हुआ। इसका धमाका जिसने भी सुनी वह कांप गया। हालांकि कुछ देर बाद ही जापानी परमाणु एजेंसी स्पष्ट किया कि खतरे की बात नहीं, क्योंकि मुख्य भट्टी या कंटेनर में विस्फोट नहीं हुआ है। विस्फोट संयंत्र की इमारत में हुआ है। दूसरी ओर वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) ने भी अपने अधिकारियों के हवाले से इस बात की पुष्टि की है कि अभी तक बड़ा खतरा नहीं है। आइएईए ने बताया कि रिएक्टर नंबर-3 में अब भी कूलिंग का काम जारी है। मुख्य कैबिनेट सचिव युकिओ एदानो ने पे्रस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमारा प्रयास है कि कम से कम विकिरण पदार्थ हवा में फैले। फुकुशिमा परमाणु संयंत्र शुक्रवार को आए भूकंप और सुनामी के बाद से ही बंद है। इसके आस-पास 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले करीब दो लाख लोगों सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है। शनिवार को इस संयंत्र में पहला विस्फोट हुआ था, जिसके बाद क्षेत्र में विकिरण फैलना शुरू हो गया था। जापान के परमाणु और औद्योगिक सुरक्षा एजेंसी ने कहा है कि राहत की बात यह है कि हवाएं रिहायशी इलाकों की तरफ नहीं बह रही हैं और विकिरण का स्तर ज्यादा नहीं है। इसके बावजूद रविवार तक 190 लोगों के इसका शिकार होने की खबर थी। मियागी प्रांत में 2000 शव बरामद मीडिया अब तक दस हजार लोगों की मौत की आशंका व्यक्त कर चुका है। इस बीच सोमवार को मियागी शहर में समुद्र तट पर 2000 लोगों की लाशें मिलने की खबर आई है। सुनामी से हुई तबाही की नई तस्वीरें सामने आने से पता चल रहा है कि कई तटीय गांव और कस्बे नक्शे से साफ हो गए हैं। सोमवार को तटीय इलाकों में एक बार फिर उस समय हड़कंप मच गया, जब एक टीवी चैनल ने सुनामी के आने की खबर चला दी। जल्द ही सरकारी मौसम विभाग के प्रवक्ता न इसका खंडन किया, तब लोगों को राहत मिली। समुद्र किनारे संयंत्र बनाने पर बहस जापान में भूकंप और सुनामी से परमाणु संयंत्रों के क्षतिग्रस्त होने की घटना ने परमाणु विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि परमाणु संयंत्र समुद्र किनारे हों या नहीं? आइएईए के मुताबिक दुनिया भर के 445 परमाणु संयंत्रों में से अधिकतर समुद्र किनारे हैं। ऐसे में यह सवाल अब बड़ा हो गया है कि संयंत्र स्थापित करने से पहले पानी की उपलब्धता को प्रमुख माना जाए या फिर ऐसी जगह का चयन हो जहां पर भूंकप या सुनामी का खतरा कम हो। दूसरी ओर सोमवार को स्विट्जरलैंड ने परमाणु संयंत्र बनाने और उनमें बदलाव का कार्य रोकने की घोषणा की है। उसका कहना है कि वह संयंत्रों की सुरक्षा की समीक्षा कराने के बाद ही कोई निर्णय लेगा। अमेरिकी दल विकिरण की चपेट में अमेरिका के विमान वाहक पोत पर सवार चालक दल के सदस्य जापानी परमाणु रिएक्टरों से निकले रेडियोधर्मी विकिरण की चपेट में आ गए हैं। यह पोत प्रशांत महासागर से गुजर रहा था। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने सरकारी अधिकारियों के हवाले से रविवार को कहा कि विमान वाहक पोत, रोनाल्ड रीगन जापानी रिएक्टरों से निकले रेडियोधर्मी धुएं की चपेट में आ गया। इसके परिणामस्वरूप चालक दल के सदस्य लगभग एक घंटे में ही एक महीने के बराबर विकिरण की मात्रा ग्रहण कर गए। कुछ अमेरिकी हेलीकाप्टर क्षतिग्रस्त रिएक्टरों से लगभग 60 मील उत्तर में उड़ रहे थे। ये हेलीकाप्टर भी रेडियोधर्मी कणों की चपेट में आ गए और उनकी बाद में धुलाई करनी पड़ी। जापान के फुकुशिमा शहर में एक परमाणु रिएक्टर में सोमवार को हुए विस्फोट के बाद छह लोग घायल हो गए। इस शहर में दो परमाणु संयंत्र हैं और दोनों में कुल 10 रिएक्टर हैं|
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