लीबिया में हार के कगार पर पहुंचे विद्रोहियों ने संगठित होकर दोगुने उत्साह से फिर संभाला मोर्चा, अजदाबिया में घमासान तेज
लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और इटली की ओर से मोर्चा खोले जाने के बाद उम्मीद छोड़ चुके विद्रोही अब नए उत्साह के साथ गद्दाफी के वफादारों से टक्कर ले रहे हैं। कुछ दिनों पहले गद्दाफी ने सैन्य अभियान तेज कर दिए वे सभी इलाके कब्जा लिए जिन पर विद्रोहियों ने कुछ सप्ताह पहले कब्जा जमा लिया था। लीबिया के विद्रोहियों ने गद्दाफी समर्थकों पर हवाई हमलों का स्वागत करते हुए उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें पश्चिमी देशों के हवाई हमलों से आम नागरिकों को खतरे की बात कही जा रही थी। विद्रोहियों संगठनों के प्रवक्ता ने कहा, हम पश्चिमी देशों के हवाई हमलों का स्वागत करते हैं। अब हमारा लक्ष्य त्रिपोली से गद्दाफी के शासन को उखाड़ना है। हां-अगर ये देश थल सैनिकों को लीबिया की जमीन पर उतारेंगे तो हम उसका विरोध करेंगे। फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से लीबिया को नो फ्लाई जोन बनाने के बाद गद्दाफी के ठिकानों और सैनिकों को निशाना बनाते हुए शनिवार को पहला हमला किया था। पश्चिमी देशों के लड़ाकू विमान और समुद्र में तैनात जंगी जहाज तभी से लगातार गद्दाफी के ठिकानों और सैनिकों को निशाना बना रहे हैं। अमेरिका और ब्रिटेन ने पनडुब्बियों और युद्धपोतों से भी टॉमहॉक मिसाइलें बरसाई। इन हमलों में गद्दाफी का शाही आवास भी नष्ट हो गया। यूरोपीय देशों और अमेरिका ने स्पष्ट किया कि वे लीबिया के तानाशाह को निशाना नहीं बना रहे हैं बल्कि वहां उठ रही लोकतंत्र की मांग को कुचले जाने के लिए निर्दोषों का खून बहने से रोकने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं। रविवार रात दूसरे दौर के हमले में यूरोपीय सेनाओं ने त्रिपोली, मिस्राता, ताजौरा और अजदाबिया में हवाई हमले किए। इन सभी शहरों में गद्दाफी के हवाई और फौजी ठिकाने हैं। लीबिया प्रशासन ने आरोप लगाए हैं कि यूरोपीय और अमेरिकी सेना के हमले में बेकसूर नागरिक मारे जा रहे हैं। लीबिया ने 64 नागरिकों के मरने की बात कही है, जबकि यूरोपीय देशों ने इसका खंडन किया है। ब्रिटेन ने हमलों में लीबियाई नागरिकों के लिए पैदा हुए खतरे को देखते हुए रविवार सुबह के बाद हमले रोक दिए थे। लीबिया के सैन्य प्रवक्ता ने रविवार को नए युद्धविराम की घोषणा की। उनकी घोषणा से पहले और बाद में त्रिपोली में जोरदार बम धमाके हुए। बेनगाजी की सीमा के पास गद्दाफी के 14 सैनिकों के शव मिले। अजदाबिया रणनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण शहर है, क्योंकि इस पर नियंत्रण होने के बाद त्रिपोली जाने के रास्ते खुल जाते हैं। गद्दाफी ने समर्थकों ने राजधानी त्रिपोली से विद्रोहियों के कब्जे वाले बेनगाजी शहर तक जुलूस के रूप में कूच करने का आह्वान किया है। अमेरिकी और यूरोपीय हवाई हमलों का असर दिखा है और गद्दाफी की सेना के हमले कम हुए है। अमेरिकी सेना के जॉइंट स्टाफ के निदेशक वाइस एडमिरल बिल गोर्थने ने मीडिया से कहा, लीबिया के आकाश में अब कोई हलचल नहीं है। न ही उसके राडारों के संकेत मिल रहे हैं। 2003 में इराक में अमेरिकी हमले के बाद किसी अरब देश पर यह पहला बड़ा अमेरिकी-यूरोपीय हमला है। गद्दाफी ने की आत्महत्या की कोशिश? : कर्नल मुअम्मर गद्दाफी का अंत क्या होगा? इस पर पूरी दुनिया की नजरें लगी हैं। शनिवार को उन्हें आखिरी बार देखा गया था और इसके बाद से वे ओझल हैं। ऐसे में त्रिपोली में फैल रही तमाम अफवाहों में से एक यह भी है कि उन्होंने लीबिया पर पश्चिमी देशों के हमले के बाद आत्महत्या की कोशिश की है। लीबिया के राष्ट्रीय टेलीविजन पर एक दर्शक ने फोन कर हकीकत जानने की कोशिश की, तो तत्काल लाइन काट दी गई। बंकर में जा छिपा तानाशाह : अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन की सेनाओं के हवाई हमले के बाद तानाशाह कर्नल मुअम्मर गद्दाफी एक अंडरग्राउंड बंकर में पहुंच गए हैं। हमलों के बाद किसी ने उन्हें नहीं देखा है। टाइम पत्रिका के अनुसार, गद्दाफी राजधानी त्रिपोली के दक्षिण में स्थित बाब अल-अजीजिया के बंकर में परिवार समेत रह रहे हैं। रविवार को प्रसारित राष्ट्र के नाम संदेश भी उन्होंने वहीं रिकॉर्ड किया। बाब अल-अजीजिया मिलिटरी बैरक और कंपाउंड है। पत्रिका के अनुसार, गद्दाफी प्रशासन की ओर से शनिवार को दो बार मीडिया के चुनिंदा लोगों को बाब अल-अजीजिया के बंकरों में ले जाया गया। बताया गया है कि गद्दाफी और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए बनाया गया बंकर कई घुमावदार रास्तों और दीवारों से घिरा है। इसे देखने वाले एक पत्रकार ने कहा कि ऐसा लगता है, हम किसी जेम्स बॉन्ड फिल्म का कोई निचले दर्जे का सेट देख रहे हैं। एक दीवार पार करके जब आप बढ़ते हैं, तो कई सैनिकों का सुरक्षा घेरा मिलता है। जो करीब पचास मीटर की जगह में फैला है। उसके बाद एक और दीवार आती है। इसके बाद फिर सैनिक हैं और फिर दीवार। गद्दाफी के बेटे की मौत? : कर्नल मुअम्मर गद्दाफी के एक बेटे खमीस गद्दाफी के मारे जाने की खबर है। बताया जा रहा है कि त्रिपोली के एक सैन्य ठिकाने में लीबियाई वायुसेना के एक पायलट ने अपना विमान जानबूझ कर गिरा दिया, जिससे लगी आग में खमीस झुलस गया था। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। अरेबियन बिजनेस न्यूज वेबसाइट ने यह खबर दी है। हालांकि लीबिया प्रशासन ने इस खबर का खंडन किया है। पश्चिम देशों के साथ आया कतर : लीबिया में बाहरी फौजों का जमावड़ा जारी है। कतर इसके लिए चार विमान भेजने वाला है। इसके साथ ही लीबिया पर कार्रवाई करने वाला कतर पहला अरब देश बन गया। दूसरी ओर फ्रांस का विमान वाहक पोत चार्ल्स द गाल भी भूमध्यसागर के तोलॉन बंदरगाह के लिए रवाना हो चुका है। डेनमार्क और नार्वे भी अपने विमान भेज रहे हैं। स्पेन ने तीन लड़ाकू विमान और एक विमान में ईधन भरने वाला विमान लीबिया रवाना किया है। इटली के लड़ाकू विमान भी तैनाती के लिए तैयार हैं। कनाडा ने सिसली में छह विमान लगाए हैं। भारत हमलों के खिलाफ : भारत ने सोमवार को पश्चिमी देशों से आग्रह किया कि लीबिया में की जा रही बमबारी रोक दी जाए, साथ ही उसने सुझाव दिया कि गद्दाफी के शासन के खिलाफ हिंसक विद्रोह को समाप्त कर बातचीत का रास्ता अपनाया जाए। विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने स्पष्ट किया कि भारत गद्दाफी का मित्र नहीं है और लीबिया के लोगों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। भारत सुरक्षा परिषद के उन पांच सदस्यों में शामिल था, जिन्होंने लीबिया को नो फ्लाई जोन बनाने वाले प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया था। अन्य चार सदस्यों में रूस, चीन, जर्मनी व ब्राजील शामिल हैं। यमन में मंत्रिमंडल बर्खास्त, प्रमुख सैन्य जनरल ने छोड़ा राष्ट्रपति का साथ : यमन में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन को देखते हुए राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह ने रविवार को मंत्रिमंडल बर्खास्त कर दिया। जबकि सोमवार को उन्हें बड़ा झटका तब लगा सेना की पहली सशस्त्र डिविजन के प्रमुख मेजर जनरल अली मोहसिन अल-अहमर प्रदर्शनकारियों से जा मिले। सालेह ने मंत्रिमंडल भंग करने का निर्णय तीन मंत्रियों के इस्तीफे के बाद लिया है। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से यमन में सालेह के 30 साल से ज्यादा के शासन को खत्म करने के लिए लगातार प्रदर्शन हो रहे है। विपक्ष के अनुसार, शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों पर हुए हमले में 52 लोगों की मौत भी हुई थी|
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