Monday, March 21, 2011

जापान ने हाथ खड़े किए, मदद के लिए लगाई अमेरिका से गुहार


भूकंप और सुनामी के आपदा से उबरने के प्रयास में परमाणु विकिरण के खतरे से रू-ब-रू जापान पर संकट बढ़ता जा रहा है। फुकुशिमा के देइची संयंत्र के रिएक्टर नंबर तीन की स्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ रही है। उससे बड़े पैमाने पर रेडियोएक्टिव पदार्थो के रिसाव का खतरा बढ़ गया है। यही कारण है कि जापान की परमाणु और औद्योगिक सुरक्षा एजेंसी ने परमाणु खतरे के स्तर को शुक्रवार को सात बिंदुओं वाले स्केल पर बढ़ा पर पांच कर दिया। अब यह खतरा 1986 में हुई चेर्नोबिल दुर्घटना से मात्र दो बिंदु कम है। ताजा खतरे में रिएक्टर नंबर एक, दो और तीन को रखा गया है। क्योदो समाचार एजेंसी के अनुसार तीनों रिएक्टरों से परमाणु विकिरण हो रहा है और उनमें विस्फोट का खतरा बरकरार है। संयंत्र का कार्य देखने वाली टोक्यो इलेक्टि्रक पावर कंपनी के प्रबंधक निदेशक एकियो कोमिरी ने शुक्रवार को रोते हुए स्वीकार किया कि परमाणु विकिरण जिस स्तर पर हो रहा है उससे जिंदगी को खतरा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) ने भी इसे अत्यधिक गंभीर घोषित किया है। जापान ने इस खतरे से निपटने के लिए अब अमेरिका से मदद मांगी है। जापान के प्रधानमंत्री नाओतो कान ने आइएईए के प्रमुख युकिया अमानो से भेंट की और परमाणु विकिरण की मुश्किल से निपटने के उपायों पर बात की। कान ने यह भी भरोसा दिलाया कि वह फुकुशिमा परमाणु संयंत्र के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पूरी जानकारी देते रहेंगे। इस बीच, एक सप्ताह पहले आए भीषण भूकंप और सुनामी में अब तक 16 हजार लोग या तो मारे गए हैं या लापता हैं। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा शुक्रवार को वॉशिंगटन स्थित जापानी दूतावास पहुंचे और वहां रखी शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। शोक पुस्तिका पर इसे दिल दहला देने वाली त्रासदी करार दिया। इसके अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कई यूरोपीय देशों ने जापान में परमाणु विकिरण के बढ़ते हुए खतरे को देख कर अपने नागरिकों को जापान छोड़ देने को कहा है। अमेरिका ने दूतावास के कर्मचारियों और उनके परिवार के लोगों को वापस लौट आने की अनुमति प्रदान कर दी है|

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