Thursday, April 14, 2011

बदलेगा दुनिया की तस्वीर


बीते कुछ वर्षो तक विकासशील देशों की प्रतिभाएं विकसित देशों में जाती थीं, लेकिन आने वाले वर्षो में इन देशों से प्रतिभाएं वापस अपने देशों में लौटेंगी। रिवर्स ब्रेन ड्रेन की यह प्रवृत्ति विदेश में रह रहे लोगों में तेजी से पनप रही है और वे अपने देश वापस लौट कर काम कर रहे हैं। आने वाले वर्षो में प्रतिभाओं की अपने देश में वापसी दुनिया को नई तस्वीर प्रदान करेगी। एक अध्ययन में यह बात कही गई है। अमेरिका की व्यापार अनुसंधान और सलाहकार कंपनी फ्रॉस्ट एंड सुलिवन द्वारा किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है। इसके मुताबिक, स्वदेश लौटकर काम करने की प्रवृति के कारण आने वाले समय में दुनिया का नक्शा पूरी तरह से बदल जाएगा। उसके मुताबिक भारत जैसे देश में, जहां उच्च स्तरीय नौकरी की काफी संभावनाएं हैं, विदेश से वापस आ कर काम करने वालों में केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि अमेरिकी और यूरोपवासी भी बड़ी संख्या में होंगे। इन देशों द्वारा दिया जाने वाला वेतन भी विकसित देशों से बेहतर होगा। व‌र्ल्ड्स टॉप ग्लोबल मेगा ट्रेंड्स टू 2020 एंड इंप्लीकेशन्स टू बिजनेस सोसाइटी एंड कल्चर शीर्षक वाली इस रिपोर्ट का उद्देश्य दुनिया भर की कंपनियों को लोगों की बदलती हुई मानसिकता के साथ सामंजस्य बनाने का है। फ्रॉस्ट एंड सुलिवन ने कहा कि ये ट्रेंड व्यवसाय, अर्थ, संस्कृति, रोजगार और निजी जिंदगी को पूरी तरह से प्रभावित करेगा। फ्रॉस्ट एंड सुलिवन के सहयोगी श्रवंत सिंह ने कहा, स्वदेश लौटने की प्रवृति के अलावा तेजी से बढ़ रहा शहरीकरण भी व्यापारिक संगठनों को अपने शहरी बिजनेस मॉडल को पुन‌र्व्यवस्थित करने पर मजबूर करेगा। इलेक्ट्रनिक वाहनों की बढ़ती संख्या और सोशल नेटवर्किग साइट भी सामाजिक परिवर्तन में एक बड़ी भूमिका निभाएंगी। जिसके जरिये लोग आसानी से एक-दूसरे से जुड़ कर अपने व्यवसाय को बढ़ा सकेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, महिला सशक्तिकरण भी एक नई ऊंचाई तक पहुंच जाएगा, जहां चार में से एक कर्मचारी महिला होगी। 2020 तक कई देशों के उच्च स्तरीय विभागों में 40 प्रतिशत तक महिलाएं हो सकती हैं|

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