अमेरिका कर रहा विद्रोहियों को हथियार देने पर विचार….
लीबिया में तानाशाह कर्नल मुअम्मर गद्दाफी की सेना ने लोकतंत्र समर्थकों पर पलटवार किया है। सेना के टैंकों, बंदूकों और रॉकेटों की तूफानी मार के कारण लोकतंत्र तंत्र को पीछे हटना पड़ा है। तेल से मालामाल शहर रास लानुफ और ब्रेगा से लोकतंत्र समर्थकों के पीछे हटने के बाद अमेरिका और उनके सहयोगी उन्हें हथियारों से लैस करने पर विचार कर रहे हैं। अल जजीरा के अनुसार गद्दाफी के गृह नगर सिर्ते से सौ किलोमीटर की दूरी पर लोकतंत्र समर्थकों को रोक देने के बाद सेना ने उन्हें रास लानुफ से खदेड़ दिया। इस तरह 19 मार्च से फ्रांसीसी एवं ब्रिटिश वायुसेना केहमले करने का पासा पलट गया। एक अरबी चैनल ने लोकतंत्र समर्थक के हवाले से कहा, हम मशीनगन से टैंकों का मुकाबला नहीं कर सकते। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि हवाई हमलों के बगैर गद्दाफी हमारा नरसंहार कर देगा। मंगलवार को लोकतंत्र समर्थकों के सिर्ते के करीब पहुंचने की खबर थी। लीबिया के तीसरे सबसे बड़े शहर मिस्राता में भी भीषण संघर्ष की खबर है। पिछले दो हफ्तों से इस शहर पर गद्दाफी की सेना का कब्जा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस संघर्ष में 150 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इस बीच अमेरिका ने लोकतंत्र समर्थकों को हथियारबंद करने की संभावना से इंकार नहीं किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, हम गद्दाफी की स्थिति का आकलन करने में जुटे हैं। हालांकि गद्दाफी पर शिकंजा कसा जा चुका है, इसके बावजूद उनके लीबिया छोड़ने को लेकर कोई समझौता करने के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। दूसरी ओर रूस ने लोकतंत्र समर्थकों को हथियार देने के विचार का विरोध किया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के तहत लोकतंत्र समर्थकों को हथियार देने को कोई अधिकार नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लीबिया में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को अमल में लाने के लिए सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस सैन्य अभियान की कमान अब नाटो संभाल चुका है। ओबामा ने कहा, हमारा मानना है कि जब सामूहिक कार्रवाई की जाएगी तो दुनिया अधिक सुरक्षित होगी। कार्रवाई का बोझ सिर्फ अमेरिका के ऊपर नहीं होना चाहिए। जारी रहेंगे हवाई हमले वैश्विक नेताओं ने लीबिया के तानाशाह कर्नल मुअम्मर गद्दाफी पर सत्ता छोड़ने के लिए दबाव बढ़ाते हुए, नागरिकों पर किए जा रहे नृशंस हमलों को रोकने के वास्ते वायु हमले तेज करने की प्रतिबद्धता जताई। लंदन में बुधवार को आयोजित सम्मेलन में 40 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में लीबिया के लोकतंत्र समर्थकों को दिए जाने वाले सहयोग का समन्वय करने के लिए एक समूह बनाने पर सहमति तैयार हुई। इसका नेतृत्व कतर करेगा। सम्मलेन में सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि गद्दाफी शासन करने का अधिकार खो चुके हैं। अमेरिकी विदेश हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि गठबंधन सेना तब तक हवाई हमले जारी रखेगी, जब तक गद्दाफी नागरिकों पर हमले बंद करने की संयुक्त राष्ट्र की मांग मान नहीं लेते। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र समर्थकों को हथियार दिए जाने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है लेकिन संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के तहत नागरिक को हथियार दिए जा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय गद्दाफी पर इतना दबाव बनाएगा कि वे अलग-थलग पड़ जाएंगे और सत्ता छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे। बेटी की मदद ले रहे गद्दाफी लीबिया में अपनी सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए तानाशाह कर्नल मुअम्मर गद्दाफी अपनी खूबसूरत बेटी आयशा का सहारा ले रहे है। गद्दाफी को आठ बच्चों में आयशा अकेली बेटी है। डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, गद्दाफी की आकर्षक और सुंदर वकील बेटी आयशा अल-गद्दाफी युद्ध क्षेत्र में सेना के जवानों से मिल कर अपने पिता की विश्वसनीयता को कायम करने की कोशिश में जुटी हैं। 34 वर्षीया आयशा द्वारा अपने पिता के समर्थन के कारण संयुक्त राष्ट्र की सद्भावना दूत की भूमिका से हटा दिया गया है। उन्हें जुलाई 2009 में संयुक्त राष्ट्र की सद्भावना दूत नियुक्त किया गया था। आयशा के अपने पिता को समर्थन की वजह उनके छोटे भाई खमीस की मौत बताई जा रही है। खबरों के अनुसार 27 वर्षीय खमीस आयशा के काफी करीब था, जिसकी मौत पिछले सप्ताह एक हवाई हमले में हुई थी। जबकि बुधवार को खमीस को अपने समर्थकों का अभिवादन करते हुए दिखाया गया है। 1986 में लीबिया पर अमेरिकी हमले में गोद ली बहन हन्ना की मौत के बाद से आयशा अमेरिका से नफरत करती है। उस समय आयशा की आयु नौ वर्ष थी। जर्मन मॉडल क्लाडिया शिफर जैसी दिखने वाली सुंदर और आकर्षक आयशा इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की निजी वकील के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। हथियार नहीं देगा ब्रिटेन ब्रिटिश विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा कि लीबियाई विद्रोहियों को हथियार मुहैया कराने की उनके देश की कोई योजना नहीं है। बीबीसी डॉट को डॉट यूके के अनुसार हेग ने कहा कि कर्नल गद्दाफी के शासन की समाप्ति के लिए संघर्षरत लीबियाई विद्रोहियों को किसी भी रूप में हथियार देने की उनके देश की कोई योजना नहीं है, लेकिन इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि विद्रोहियों को हथियार मुहैया कराने की संभावना को वह खारिज नहीं करते। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि कर्नल गद्दाफी बहुत कमजोर पड़ गए हैं और अंततोगत्वा वह सत्ता छोड़ देंगे। दूसरी ओर गद्दाफी समर्थक बलों ने विद्रोहियों को कई किलोमीटर पीछे खदेड़ दिया है। विद्रोही हाल के दिनों में गठबंधन सेना के हवाई हमलों के सहारे काफी आगे बढ़ गए थे, लेकिन बुधवार को वे फिर पिछड़ते दिखाई दिए.
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