Sunday, April 17, 2011

भारतीय छात्रों ने बढ़ाया देश का मान


दो भारतीय बच्चों ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा आयोजित एक प्रतियोगिता में पुरस्कार जीत देश का नाम रोशन किया है। सातवीं कक्षा के इन छात्रों को रोमानियाई दल के साथ संयुक्त रूप से दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। चेन्नई के भवन राजाजी विद्याश्रम में पढ़ाई कर रहे एम. श्रीवत्सन और वसुंधरा गौथम तमिलनाडु की ओर से यह प्रतियोगिता जीतने वाले इकलौते प्रतिभागी हैं। प्रोजेक्ट आइआरआइएस (इंटरनेशनल रिसर्च एंड इंटीग्रेशन स्टेशन) के तहत इन्होंने मानव के अंतरिक्ष में बसने के लिए आवासीय विकल्प को डिजाइन करने के साथ-साथ विकसित भी किया। जीवन के विस्तृत और गहरे प्रतिनिधित्व और अंतरिक्ष में इसकी जरूरत के लिए इस डिजाइन को बेहद प्रशंसा मिली। श्रीवत्सन ने कहा कि जैसा हम सोचते हैं कि किसी अन्य ग्रह पर बिना जरूरी संसाधनों के जीवन कैसा होगा, इस नजरिए से यह प्रोजक्ट अपेक्षाकृत आसान है। खाद्य, सफाई व्यवस्था, आश्रय और ऊर्जा तक मानव जीवन के लिए सभी मूलभूत जरूरी चीजें उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने जिदंगी जीने के तरीके, जैसै- प्रबंधन, गवर्नेस, रोजगार, संस्कृति और यातायात की भी संकल्पना की है। श्रीवत्सन के पिता मनिवनन ने कहा कि श्रीवत्सन और वसुंधरा प्रतिदिन तीन घंटे से भी ज्यादा अपने प्रोजेक्ट पर कार्य करते थे। मेरा योगदान सिर्फ उन्हें प्रतियोगिता के बारे में जानकारी देने तक था जो मैंने नासा की वेबसाइट से पता की थी। वसुंधरा जहां खाद्य और अन्य जैविक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करती थीं वहीं, श्रीवत्सन तकनीकी जानकारियों पर काम करते थे। उन्होंने बताया कि इस प्रोजक्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू क्वांटम कंप्यूटर का इस्तेमाल है जिन्होंने अंतरिक्ष की बस्ती का बेहद अहम हिस्सा बनाया।


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