पाकिस्तान के साथ आतंकवाद के खिलाफ चल रहे साझा अभियान के खर्च की अदाएगी अमेरिका ने रोक दी है। शनिवार को जारी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान द्वारा अमेरिका को भेजे गए खर्च के हिसाब में गंभीर त्रुटि पाए जाने के कारण अमेरिका ने चार अरब डॉलर (लगभग 17 हजार 671 करोड़ रुपये) की रकम रोक दी। पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने संसद की रक्षा संबंधी स्थाई समिति की बैठक में कहा, पाकिस्तानी सेना ने 12 अरब डॉलर (लगभग 53 हजार 15 करोड़) रुपये का हिसाब भेजा था। अमेरिका ने केवल आठ अरब (लगभग 35 हजार 343 करोड़) डॉलर का भुगतान कर किया है। अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका ने शेष धन की अदायगी नहीं की है। रक्षा सचिव पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल अथर अली ने भी यह माना है। हालांकि अधिकारियों ने अदायगी नहीं किए जाने के कारण के बारे में कुछ नही बताया। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा, अमेरिकी राजस्व विभाग पाकिस्तान द्वारा भेजे गए बिल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए भुगतान रोक दिया है। रक्षा सचिव ने कहा, दोनो देशों के बीच समझौते के तहत अमेरिका पाकिस्तानी सीमा के भीतर के सेना खर्च देने के लिए सहमत था। अखबार ने अज्ञात सूत्र के हवाले से कहा, अमेरिका द्वारा उठाए गई आपत्ति को दूर करने के लिए किसी तरह का प्रयास नहीं किया जा रहा है। अमेरिका ने पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा भेजे गए बिल पर गंभीर शिकायत दर्ज की है। पाकिस्तान खर्च अदाएगी के अमेरिका के कानून का पालन नहीं कर रहा है। द्विपक्षीय वार्ता के दौरान अमेरिका ने कहा कि या तो बिल में गड़बड़ी है या यह लोग दोगुना खर्च बता रहे हैं। हालांकि विस्तृत विचार विमर्श के बाद अमेरिका फिलहाल कुछ करोड़ रुपये देने के लिए सहमत हो गया है। उधर, इस्लामाबाद की लंबे समय से की जा रही ड्रोन देने की मांग को आखिरकार अमेरिका ने मान लिया। हालांकि उसने पाकिस्तान को शक्तिशाली ड्रोन के बजाए मिनी ड्रोन्स देने का फैसला किया है। साथ ही ओबामा प्रशासन ने संकेत दिए कि वह पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर बमबारी अभियान से पीछे नहीं हटेगा। शुक्रवार को आतंकी ठिकानों पर हमले करके उसने इरादे जाहिर भी कर दिए। इस हमले में 25 आतंकियों की मौत हो गई। यह हमले उस समय हुए जब पाकिस्तान के विदेश सचिव अमेरिकी विदेश सचिव मार्क ग्रासमैन समेत कई अमेरिकी अधिकारियों के साथ अमेरिका में बैठक कर रहे थे। बैठक के कुछ घंटों पहले अमेरिकी सेना के एक अधिकारी ने इस्लामाबाद में घोषणा की कि वॉशिंगटन पाकिस्तान को 85 छोटे रेवेन मानवरहित (ड्रोन) विमान उपलब्ध कराएगा। रेवेन छोटी दूरी के निगरानी विमान हैं जो घातक नहीं होते। इन्हें अमेरिका की ऐरोवायरमेंट कंपनी ने बनाया है। यह दुनिया भर में इस्तेमाल किए जाने वाले मानवरहित विमानों में से एक हैं। इसे अमेरिका के सहयोगी देशों इटली, स्पेन और नार्वे में इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिकी अधिकारियों ने इन विमानों की आपूर्ति की तिथि या कीमत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।
ड्रोन नीति की समीक्षा हो : अमेरिका को अपने ड्रोन हमलों की नीति की समीक्षा करने की जरूरत हैं क्योंकि इससे उसे ही लाभ होगा। पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर ने यह टिप्पणी अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि मार्क ग्रासमैन के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में वॉशिंगटन में की। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अमेरिका के ड्रोन हमलों में आतंकवादियों के साथ निर्दोष लोग भी मारे जाते हैं। इसलिए वह अमेरिका को यह हमले रोकने के लिए कह रहा है। पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने बशीर के हवाले से कहा, अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ड्रोन हमलों को महत्वपूर्ण हथियार मानता है, लेकिन हम ऐसा नहीं मानते। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी लोग हताहतों की संख्या को देखते हुए बेहद चिंतित हैं। इसकी समीक्षा किए जाने की जरूरत है। इस पर ग्रासमैन ने कहा, आतंकवाद के खिलाफ किए जा रहे सभी प्रयास पाकिस्तानी और अमेरिकियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर डिजाइन किए गए हैं। दो दिवसीय यह वार्ता अगले महीने इस्लामाबाद में एक रणनीतिक वार्ता का मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
कयानी ने कहा, आतंकियों की कमर तोड़ दी गई है
पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल अश्फाक परवेज कयानी ने कहा है कि सेना ने आतंकवादियों की कमर तोड़ दी है और वह जल्द ही उन्हें शिकस्त दे देगी। कयानी की यह टिप्पणी आतंकवादियों से निपटने की पाकिस्तानी सेना की क्षमता पर अमेरिका के चिंता जताए जाने के बाद आई है। कयानी ने कहा, मैं भरोसा दिलाता हूं कि पाकिस्तानी सेना मुल्क के सामने मौजूद अंदरूनी और बाहरी खतरों से वाकिफ है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हमारे अफसरों और जवानों ने बड़ी कुर्बानियां दी हैं। हमने काफी कामयाबी हासिल की है। उनकी इस टिप्पणी से तीन दिन पहले अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी एडमिरल माइक मुलेन ने आगाह किया था कि हक्कानी के आतंकवादी तंत्र से आइएसआइ के लंबे समय से कायम रिश्ते ही पाकिस्तान के अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंधों का कारण हैं।
No comments:
Post a Comment